2026 में हॉस्पिटल शेयर सबसे मजबूत थीम में से एक बनकर उभरे हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने व्यापक बेंचमार्क सूचकांकों से स्पष्ट रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह हैं – कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी, हॉस्पिटल में मरीजों के रहने की दर (ऑक्यूपेंसी लेवल) में सुधार, प्रति बिस्तर औसत कमाई में इजाफा और बड़े हॉस्पिटल शृंखलाओं की आक्रामक विस्तार योजनाएं।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार साल 2026 में 26 मई तक निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 7 फीसदी की बढ़त हुई है जबकि बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स में 8.5 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, इसके 20 घटकों में से ज्यादातर दवा कंपनियां हैं, लेकिन हॉस्पिटल शेयरों पर करीब से नजर डालने पर अलग ही तस्वीर सामने आती है।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार हाल में सूचीबद्ध पार्क मेडि वर्ल्ड का शेयर सबसे ज्यादा मुनाफा वाले शेयर के तौर पर उभरा है। इसमें सालाना हिसाब से 96 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद कृष्णा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (केआईएमएस) का नंबर है, जिसमें 26 फीसदी की बढ़त हुई है।
एस्टर डीएम हेल्थकेयर ,जिसका बड़ा पुनर्गठन हुआ था, के शेयरों में 23 फीसदी की तेजी आई है जबकि यथार्थ हॉस्पिटल और अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज के शेयरों में क्रमशः 20 और 17 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, फोर्टिस हेल्थकेयर के शेयरों में 10 फीसदी का लाभ हुआ है। ग्लोबल हेल्थ (मेदांत), रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर और नारायण हृदयालय जैसे अन्य शेयरों में भी तेजी का रुख रहा। लेकिन जूपिटर लाइफ लाइन हॉस्पिटल्स और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में 5 फीसदी तक की गिरावट आई है।
जानकारों का मानना है कि मौजूदा तेजी को असल में परिचालन मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन से मदद मिली है। बीएस रिसर्च ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक इन हॉस्पिटल कंपनियों (एस्टर डीएम को छोड़कर) ने 2025-26 में वित्तीय मोर्चे पर सामूहिक रूप से मजबूत प्रदर्शन किया है। उनकी कुल कमाई पिछले साल के मुकाबले 20.4 फीसदी बढ़कर लगभग 73,321.3 करोड़ रुपये हो गई जबकि 2024-25 में यह लगभग 60,905.6 करोड़ रुपये थी।
परिचालन के मोर्चे में भी सुधार हुआ। वित्त वर्ष 25 में एबिटा से पहले की कुल कमाई 13,060.2 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 20.3 फीसदी के इजाफे के साथ 15,720.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 26 में कुल शुद्ध लाभ 20.9 फीसदी बढ़ा और 7,507.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो पिछले वित्त वर्ष में 6,207.5 करोड़ रुपये था।
विश्लेषकों ने कहा कि इस सेक्टर को लंबे समय के संरचनात्मक कारकों से भी फायदा मिल रहा है, जैसे स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, बीमा पहुंच में इजाफा, मेडिकल टूरिज्म, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में बढ़ोतरी और विशेष सेवाओं की मजबूत मांग।
सैमको सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जे. प्रजापति ने कहा कि सालों तक सूचीबद्ध हॉस्पिटल कारोबार को ज्यादा पूंजी वाले और धीरे-धीरे बढ़ने वाले कारोबार के तौर पर देखा जाता था क्योंकि इनमें शुरुआती समय लंबा होता था, नियामकीय बाधाएं होती थीं और विस्तार की लागत बहुत ज्यादा होती थी। लेकिन अब यह सोच बदल रही है।
उन्होंने कहा, हॉस्पिटल कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं, जिन्हें अच्छी कमाई की संभावना, मरीज़ों के रहने के मज़बूत रुझान और विस्तार से मार्जिन बढ़ाने की क्षमता का सहारा मिल रहा है। हम अपोलो, मैक्स, फोर्टिस, नारायण, एस्टर डीएम और मेदांत को लेकर सकारात्मक हैं।