प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बेंचमार्क सूचकांकों में शुक्रवार को तेजी आई। इस कारण इक्विटी बाजार को विदेशी फंडों की लगातार निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद हफ्ते भर में थोड़ी-बहुत बढ़त हासिल करने में मदद मिली। ज्यादातर वैश्विक बाजारों में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में शांति समझौते के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर निवेशकों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।
सेंसेक्स 232 अंक यानी 0.3 फीसदी बढ़कर 75,415 पर बंद हुआ जबकि एनएसई निफ्टी 65 अंक यानी 0.3 फीसदी बढ़ा और 23,719 पर पहुंचा। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 0.2 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि निफ्टी में 0.3 फीसदी का। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में आई तेजी ने साप्ताहिक रिकवरी की अगुआई की।
पिछले हफ्ते लगभग 6 फीसदी गिरने के बाद इस हफ्ते निफ्टी आईटी इंडेक्स में 4.3 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से होने वाले बदलावों को लेकर चिंताओं के बीच बाजार में आई तेज गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग (सस्ते दामों पर शेयर खरीद) की वजह से यह बढ़त हुई। ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया और इस हफ्ते निफ्टी ऑयल ऐंड गैस इंडेक्स में करीब एक फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
बाजार का माहौल तब बेहतर हुआ, जब ऐसी खबरें आईं कि पश्चिम एशिया में करीब तीन महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम हुए हैं। हालांकि ईरान के यूरेनियम भंडार और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर अभी भी असहमति बनी हुई है।
निफ्टी दो हफ्तों में पहली बार अपने 50 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर बंद हुआ, जो निवेशकों के बीच बेहतर होते सेंटिमेंट का संकेत है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में निदेशक (इक्विटी रणनीति) क्रांति बाथिनी ने कहा, यह तेजी तब तक कायम रहने की संभावना नहीं है जब तक ईरान और अमेरिका इस शांति वार्ता के संबंध में कोई द्विपक्षीय कूटनीतिक बयान नहीं देते और कच्चे तेल की कीमतें निर्णायक रूप से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे नहीं आ जातीं।
उन्होंने कहा, इस हफ्ते निवेशकों ने आईटी शेयरों को निचले स्तरों पर खरीदा जबकि बड़े प्राइवेट बैंकों को फायदा हुआ। निवेशकों का मानना है कि ये बैंक महंगाई और ज्यादा यील्ड वाले हालात का सामना कर सकते हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि यह एक हफ्ते पहले के 110 डॉलर के स्तर से नीचे है, लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
शुक्रवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 4,440 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू निवेशकों ने 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया। विश्लेषकों ने बताया कि जहां मुख्य सूचकांकों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, वहीं अलग-अलग सेक्टरों में काफी हलचल देखने को मिली। निवेशक ऊर्जा की बढ़ी कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के असर का अपने हिसाब से आकलन करते हुए एक सेक्टर से निवेश निकाल दूसरे में कर रहे थे।
16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से सात ने हफ्ते का अंत बढ़त के साथ किया। आईटी के बाद निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा बढ़ने वाला इंडेक्स रहा, जिसमें 2.4 फीसदी की वृद्धि हुई।
ग्रीन पोर्टफोलियो के स्मॉलकेस मैनेजर, सीआईओ और सह-संस्थापक अनुज जैन ने कहा, हम भारत के घरेलू पूंजीगत खर्च और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर जैसे पूंजीगत सामान, इंडस्ट्रियल, रक्षा और बीएफएसआई को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इन सेक्टरों में कमाई की संभावनाएं और सरकारी नीतियों का समर्थन लगातार अनुकूल बना हुआ है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच फार्मा और कुछ चुनिंदा एफएमसीजी जैसे डिफेंसिव सेक्टर से पोर्टफोलियो को स्थिरता मिलने की उम्मीद है जबकि आईटी सेवाओं में वैश्विक मांग की स्थिति बेहतर होने के साथ-साथ धीरे-धीरे सुधार के अवसर मिल सकते हैं।
व्यापक बाजार में भी तेजी देखने को मिली। इस हफ्ते निफ्टी मिडकैप 100 में 1.4 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.4 फीसदी की बढ़त आई। निजी क्षेत्र के वित्तीय शेयरों में भी उछाल आई। ऐक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक इस हफ्ते क्रमशः 3.3 फीसदी और 1.6 फीसदी ऊपर चढ़े।