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बदल रही निवेश की आदतें, अब बाजार में घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा

14.5 करोड़ निवेशकों के साथ कैपिटल मार्केट बना भारत की नई ग्रोथ स्टोरी, म्युचुअल फंड AUM 80 लाख करोड़ रुपये के पार

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 08, 2026 | 2:54 PM IST

अगर आप शेयर बाजार, म्युचुअल फंड या अन्य निवेश विकल्पों में पैसा लगाते हैं, तो आपके लिए एक अहम संकेत सामने आया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का कहना है कि देश में निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग केवल सेविंग्स अकाउंट या पारंपरिक इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि कैपिटल मार्केट को संपत्ति बनाने और लंबी अव​धि के निवेश का प्रमुख माध्यम बना रहे हैं। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का मानना है कि यह बदलाव भारत की आर्थिक प्रगति, वित्तीय जागरूकता और निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कैपिटल मार्केट में बढ़ता निवेश भारतीयों के निवेश के तरीके और देश की विकास यात्रा में उनकी भागीदारी में आ रहे स्ट्रक्च रलबदलाव को दर्शाता है। ICICI सिक्योरिटीज इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा, “कैपिटल मार्केट तेजी से घरेलू बचत और वेल्थ किएशन का एक मुख्य माध्यम बन रहा है।”

PMS नियमों पर आएगा कंसल्टेशन पेपर

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) से जुड़े नियमों पर उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने इसकी समयसीमा बताने से इनकार कर दिया।

पांडे ने कहा कि भारत की आर्थिक उन्नति केवल हाई ग्रोथ रेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के फॉर्मलाइजेशन, सेविंग्स का बाजार में बढ़ता निवेश और संस्थाओं में बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है।

सिक्युरिटीज मार्केट 14.5 करोड़ निवेशक

भारतीय बाजारों के बारे में उन्होंने कहा कि देश में अब सिक्युरिटी मार्केट के निवेशकों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ हो चुकी है और निवेशक आधार सालाना 20 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रहा है। वहीं, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की परिसंप​त्तियां (AUM) पिछले वर्षों में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई हैं। साथ ही कैपिटल मार्केट में घरेलू निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।

पांडे ने कहा कि GDP में हाउस​होल्ड सेविंग्स की हिस्सेदारी FY23 के करीब 20 फीसदी से बढ़कर FY25 में 21.7 फीसदी हो गई है। इसके पीछे अलग-अलग फाइनें​शियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी प्रमुख कारण रही है। ये सभी बदलाव साफ तौर पर बदलाव की ओर इशारा करते हैं। अब हाउसहोल्ड अपनी सेविंग्स का बड़ा हिस्सा बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं।

कैपिटल मार्केट से ग्रोथ को सपोर्ट

सेबी प्रमुख ने कहा कि भारत के कैपिटल मार्केट केवल देश की आर्थिक ग्रोथ को नहीं दिखा रहे हैं, बल्कि उसे गति भी दे रहे हैं। कैपिटल मार्केट हाउसहोल्ड सेविंग्स को इंडस्ट्री से जोड़ने, वैश्विक पूंजी आकर्षित करने और आर्थिक गति को निवेश अवसरों में बदलने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि FY26 में इक्विटी इश्यू के जरिए 4.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। वहीं, 366 आईपीओ के ज​रिए करीब लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई। इसके अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड इश्यू 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहे, जो वेल्थ क्रिएशन में बाजार की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

मार्केट कैप जीडीपी का 128% हुआ

पांडे ने कहा कि मार्केट कैपिटलाइजेशन एक दशक पहले GDP के करीब 69 फीसदी के बराबर था, जो अब हाल में हुए बाजार सुधारों के बावजूद बढ़कर लगभग 128 फीसदी हो गया है। निवेशकों की बढ़ती संख्या नियामकों और बाजार से जुड़े संस्थानों की जिम्मेदारी भी बढ़ाती है। उन्हें पारदर्शिता, निवेशक संरक्षण और बाजार की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी होगी।

पांडे के अनुसार, नियामकीय स्तर पर सेबी का नजरिया संतुलित नियमन का है, जिसमें निवेशकों की सुरक्षा, बाजार तक आसान पहुंच और बाजार के विकास के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है। सेबी ने पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को आसान करने, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को गहरा करने और बाजार मध्यस्थों के लिए अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के मकसद से कई सुधार किए हैं।

निवेशकों को बाजार व्यवस्था का केंद्र बताते हुए पांडे ने कहा कि हर नियामकीय सुधार और बाजार पहल का अंतिम मकसद निवेशकों का भरोसा मजबूत करना होना चाहिए। अगर निवेशक खुद को जागरूक, सुरक्षित और निष्पक्ष व्यवहार का पात्र महसूस करेगा, तो उसका भरोसा बढ़ेगा, भागीदारी गहरी होगी और बाजार मजबूत तथा टिकाऊ आधार पर आगे बढ़ता रहेगा।

एजेंसी इनपुट के साथ 

First Published : June 8, 2026 | 2:54 PM IST