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Investment Strategy: नए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की शुरुआत बुधवार (1 अप्रैल) से हो रही है। नया वित्त वर्ष निवेशकों के लिए निवेश की नई योजना, प्लानिंग और एसेट अलोकेशन काफी अहम होता है। वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू स्तर पर चुनौतियों के बीच यह सवाल अहम है कि 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष में निवेशकों किस तरह निवेश की रणनीति बनानी चाहिए और कैसे एसेट अलोकेशन करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि FY27 में निवेश के लिए संतुलित रणनीति जरूरी है। इक्विटी में अवसर हैं, लेकिन अस्थिरता बनी रह सकती है। सोना-चांदी सेफ विकल्प हैं, जबकि फिक्स्ड इनकम स्थिरता देता है।
एनालिस्ट के अनुसार, FY27 में निवेशकों के लिए इक्विटी (शेयर बाजार) में बने रहना बेहतर हो सकता है, भले ही हाल के भू-राजनीतिक तनाव का पूरा असर अभी बाजार और कॉरपोरेट आय में दिखाई न दे। FY26 में वैश्विक बाजारों, खासकर भारत, ने ट्रेड वार, पश्चिम एशिया में तनाव, सोना-चांदी की कीमतों में तेजी और फिर गिरावट, एआई से जुड़ी बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जैसी चुनौतियों का सामना किया। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाला, जिससे रुपया कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया।
यहां यह जानते हैं कि प्रमुख एनालिस्ट के अनुसार, FY27 में इक्विटी, सोना, चांदी, कच्चा तेल, रियल एस्टेट और रुपया जैसे अलग-अलग एसेट क्लास की परफॉर्मेंस कैसी रह सकती है। साथ ही निवेशकों के लिए एक आदर्श निवेश रणनीति क्या हो सकती है।
घरेलू सपोर्ट की कमी, अमेरिका में भारी नुकसान, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और इस साल होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव आखिर में पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त कर सकते हैं, जो अप्रैल से आगे नहीं चलने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं, हालांकि यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ सकती हैं।
हमारा मानना है कि इस गर्मी महंगाई 6% से ऊपर जा सकती है, जिससे ब्याज दरों में कटौती कम से कम दो तिमाहियों तक टल सकती है और GDP वृद्धि धीमी पड़ सकती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने साल के अंत तक निफ्टी का लक्ष्य घटाकर 26,000 कर दिया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 12% ऊपर है। निवेशकों के लिए ब्रॉडर मार्केट से दूर रहने की सलाह है। तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल और अस्थिरता के चलते हमारा भारतीय बाजार पर ‘न्यूट्रल’ रुख हैं।
हाल की गिरावट ने FY27 में निवेशकों के लिए इक्विटी में प्रवेश का बेहतर मौका दिया है। भारत की इनकम सायकल अभी भी मजबूत है, जिसे कैपेक्स, मजबूत बैंकिंग और घरेलू निवेश का समर्थन मिल रहा है। ऐसे में इक्विटी में निवेश बढ़ाना समझदारी होगी। 65% इक्विटी निवेश से FY27 में 12–15% रिटर्न मिल सकता है, हालांकि सेक्टर के बीच अंतर रहेगा और सही शेयर चुनना जरूरी होगा।
सोना और चांदी में आई गिरावट को ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं समझना चाहिए। मुद्रा अस्थिरता और वैश्विक कर्ज के माहौल में इनकी भूमिका मजबूत बनी हुई है। यह गिरावट निवेश का अच्छा मौका देती है, इसलिए 25% निवेश सोना-चांदी में उचित है, जहां मध्यम अवधि में 10–12% रिटर्न मिल सकता है। बाकी 10% निवेश फिक्स्ड इनकम में रखना पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है।
निवेशकों को इक्विटी की ओर झुकाव रखना चाहिए। सेंसेक्स का PE करीब 20x है, जो 5-10 साल के औसत (लगभग 24x) से कम है। मार्केट कैप टू GDP अनुपात भी घटकर 125% रह गया है, जो FY27 में 115% तक आ सकता है। यह शेयर बाजार में निवेश के लिए आकर्षक स्तर है। भारत की मध्यम से लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि कहानी मजबूत बनी हुई है। हालांकि, कुल निवेश में कम से कम 30% फिक्स्ड इनकम (जैसे बैंक डिपॉजिट और सरकारी बॉन्ड) में रखना चाहिए।
सोने में लंबी अवधि (3 साल से अधिक) के लिए निवेश किया जा सकता है, लेकिन अल्पावधि में इसमें 5–10% की गिरावट संभव है। रियल एस्टेट की कीमतें पिछले 5 वर्षों की तेजी के बाद अब कुछ समय के लिए स्थिर रह सकती हैं।