कुछ समय की भू-राजनीतिक उथल-पुथल और कमरों के औसत किराये (एआरआर) में नरमी का असर सूचीबद्ध होटल कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। जहां एक ओर घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, वहीं विदेशी पर्यटकों के आगमन में गिरावट आ सकती है। इससे प्रीमियम श्रेणी में कमरे की दरें और ऑक्यूपेंसी दोनों ही प्रभावित हो सकती हैं।
ज़्यादातर ब्रोकरेज इस सेक्टर के मध्यम अवधि के परिदृश्य को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। हालांकि अल्पावधि में वृद्धि और मार्जिन के रुझान इस पर निर्भर करेंगे कि लड़ाई कब तक चलती है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषको अधिदेव चट्टोपाध्याय और साईश्वर रावेकर का कहना है कि मार्च में घरेलू मांग मजबूत बनी रही, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव ने विदेश से आने वाले यात्रियों पर असर डाला है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार लग्जरी होटलों में 30 से 50 फीसदी मेहमान विदेश से आते हैं और ये होटल बाकी होटलों की तुलना में खाने-पीने की चीजों और एमआईसीई (मीटिंग, इन्सेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन) से ज्यादा कमाई करते हैं। राजस्व में इनका बड़ा हिस्सा होता है। लेकिन अप्रैल-मई के लिए ये होटल विदेशियों की बुकिंग रद्द होते देख रहे हैं। इसकी वजह विदेशी उड़ानों को लेकर अनिश्चितता और सफर महंगा होना है।
नोमुरा रिसर्च ने इंडियन होटल्स कंपनी और आईटीसी होटल्स के प्रबंधन का हवाला देते हुए कहा है कि इस युद्ध का इन दोनों होटल शृंखलाओं पर सीमित असर पड़ा है। दुबई में आईएचसीएल के प्रबंधन अनुबंध के तहत तीन होटल हैं, जिनसे कुल राजस्व का सिर्फ 5 से 6 फीसदी हिस्सा आता है।
नोमुरा के विश्लेषक आकाश गुप्ता ने कहा, चूंकि सिर्फ़ दुबई की प्रॉपर्टीज पर असर पड़ा है। इसलिए प्रबंधन शुल्क पर भी असर सीमित ही रहेगा। इस लड़ाई के कारण कंपनी की कुछ घरेलू बुकिंग रद्द हुई हैं और बुकिंग बढ़ाने के अनुरोध मिले हैं। ब्रोकरेज फर्में कमरों के औसत किराये पर नजर रखे हुए हैं, जिनमें हाल के कुछ महीनों में उतारचढ़ाव रहा है।
एचवीएस एनारॉक मॉनिटर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि जनवरी में पिछले 14 महीनों की सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की गई। शादियों के बाद हालात सामान्य होने और त्योहारों के पीक सीजन के बाद मांग में कमी आने के कारण कमरों के औसत किराये में वृद्धि एक अंक (3 से 5 फीसदी) रही और यह 9,400 से 9,600 रुपये पर पहुंची। ऑक्यूपेंसी 66 से 68 फीसदी पर स्थिर रही, जिसके परिणामस्वरूप उपलब्ध प्रति कमरे के राजस्व में सालाना आधार पर 4 से 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
विकास आहूजा की अगुआई में एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषकों का अनुमान है कि यह सेक्टर परिचालन के मोर्चे पर अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखेगा, जिसे ठीक-ठाक कॉरपोरेट यात्रा, एमआईसीई की मांग, बड़े कार्यक्रमों और शादी-ब्याह के मज़बूत सेगमेंट से मदद मिलेगी।
बड़े शहरों में रोजाना की औसत दरें फरवरी के आखिर में अपने चरम पर थीं। इसकी वजह थी इवेंट से जुड़ी मांग, जैसे दिल्ली में होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (मसलन एआई इम्पैक्ट समिट 2026), कॉरपोरेट यात्राओं में तेजी और छुट्टियों के मौसम में घूमने-फिरने की मांग शामिल थी। मार्च की शुरुआत से लेकर महीने के मध्य तक दरें थोड़ी कम हो गईं, क्योंकि इवेंट से जुड़ी मांग घटने लगी थी। नोमुरा का अनुमान है कि मासिक आधार पर दरों में 15 से 20 फीसदी की गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक घटनाएं हैं, जिनके कारण बुकिंग रद्द हो रही हैं।
ज़्यादातर ब्रोकरेज इस सेक्टर को लेकर तेजी का नजरिया बनाए हुए हैं। नोमुरा ने आईएचसीएल और आईटीसी होटल्स की खरीद की रेटिंग बरकरार रखी है और 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए कमरे की दरों में तिमाही आधार पर 7 से 10 फीसदी और सालाना आधार पर 8 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है। आईएचसीएल और लेमन ट्री होटल्स के लिए नए एग्रीमेंट का मोमेंटम मजबूत रहा और आईएचसीएल व आईटीसी होटल्स दोनों ने ही नए होटल खोले।
अगर कोई बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल न हो तो आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 28 तक होटलों में कमरों के औसत किराए में 6 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। कंपनियों के लिए 2024-25 से लेकर वित्त वर्ष 28 तक परिचालन मुनाफे में 15 से 20 फीसदी की वृद्धि के लिए नई परिसंपत्ति जोड़ना और उन्हें पूरा करना अहम होगा। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने आईएचसीएल, आईटीसी होटल्स, लीला पैलेस होटल्स ऐंड रिसॉर्ट्स, शैले होटल्स, लेमन ट्री होटल्स और ब्रिगेड होटल वेंचर्स को खरीद की रेटिंग दी है।
एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि मध्यम अवधि में वृद्धि की वजह मांग और आपूर्ति में लगातार बना असंतुलन (भविष्य की 65 से 70 फीसदी आपूर्ति 10 अग्रणी शहरों से इतर होगी)।