सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बेंचमार्क सूचकांक की लगातार 3 दिन की बढ़त का सिलसिला आज टूट गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया जिससे बाजार में गिरावट आई। सेंसेक्स 757 अंक की गिरावट के साथ 78,516 पर बंद हुआ और निफ्टी 199 अंक नीचे 24,378 पर बंद हुआ।
अमेरिका-ईरान में युद्ध विराम पर वार्ता की उम्मीद से बाजार में तीन दिन की तेजी के बाद मंगलवार को सूचकांक 3 मार्च के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे। आईटी शेयरों में बिकवाली से बाजार में गिरावट आई। आईटी सूचकांक करीब 4 फीसदी टूट गया।
अपेक्षा से कमजोर आय का अनुमान जारी करने के बाद एचसीएल टेक में करीब 11 फीसदी की गिरावट आई जो करीब एक दशक में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। इस दृष्टिकोण ने इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियों के शेयरों को भी नीचे खींच लिया। बाजार के भागीदारों ने इस गिरावट के लिए वैश्विक अनिश्चितता और कंपनियों की कमाई में नरमी के मिले-जुले कारणों का हवाला दिया।
पीएल कैपिटल में एडवाइजरी के प्रमुख विक्रम कसात ने कहा, ‘तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेश की लगातार निकासी ने बाजार में उठापटक को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है।’आपूर्ति में रुकावट की चिंता के बीच कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं मगर बाद में थोड़ी नरम पड़कर 98 डॉलर के पास आ गईंं।
शेयरडॉटमार्केट के बाजार विश्लेषक मयंक जैन ने कहा, ‘ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के आस-पास बनी हुई हैं। भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए ये कीमतें एक तरह से शुल्क की तरह काम करती हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है और महंगाई बढ़ने का जाखिम रहता है। नतीजतन, युद्ध से जुड़ी कोई भी नई खबर या बातचीत में और ज्यादा रुकावट आने से बाजार में तुरंत और बड़े पैमाने पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।’
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के उपाध्यक्ष, रिटेल रिसर्च प्रमुख, सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली से यह बिकवाली और बढ़ गई। उन्होंने बताया कि आईटी क्षेत्र को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है जिनमें विवेकाधीन खर्च में सतर्कता, अमेरिका में अनिश्चितता के बीच व्यापार करार पूरा होने में देर और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से कीमतों पर पड़ने वाला दबाव शामिल है।
बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 4 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया जिससे निवेशकों की सतर्कता साफ झलकती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और घरेलू संस्थागत निवेशक, दोनों शुद्ध बिकवाल रहे। इस महीने बाजार में करीब 12 फीसदी की तेज सुधार के बाद उन्होंने मुनाफावसूली की। विदेशी निवेशकों ने 2,078 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बेंचमार्क सूचकांक में नरमी के बावजूद व्यापक बाजार ने मजबूती दिखाई। निफ्टी मिडकैप 0.2 फीसदी और स्मॉलकैप 1.1 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ।