शेयर बाजार

JPMorgan ने भारत की रेटिंग घटाकर ‘न्यूट्रल’ की, बढ़ते वैल्यूएशन और कमाई जोखिम पर चिंता

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि ऊर्जा की ज्यादा लागत और आपूर्ति में रुकावटों की वजह से भारत की कमाई पर खतरा मंडरा रहा है

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समी मोडक   
Last Updated- April 24, 2026 | 10:42 PM IST

जेपी मॉर्गन ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग घटाकर ‘न्यूट्रल’ यानी तटस्थ कर दी है। उसने इसका कारण ऊंचा मूल्यांकन, कमाई को लेकर बढ़ता जोखिम और अगली पीढ़ी की टेक्नॉलजी में सीमित हिस्सेदारी बताया है। शुक्रवार को जारी एक नोट में जेपी मॉर्गन में एशिया के प्रमुख और ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी स्ट्रैटेजी के सह-प्रमुख राजीव बत्रा ने कहा, ‘हालांकि भारत की बुनियादी विकास गाथा मजबूत बनी हुई है, लेकिन कई खास वजहों से रिस्क/रिवार्ड के आधार पर दूसरे उभरते बाजार (ईएम) हमें ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं।’

ब्रोकरेज फर्म ने एशियाई टेक्नॉलजी शेयरों को लेकर अपना नजरिया ज्यादा सकारात्मक कर लिया है। एआई में आई नई तेजी के बीच उसने ताइवान की रेटिंग बढ़ाकर ‘ओवरवेट’ कर दी है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी-50 सूचकांक के लिए 27,000 का लक्ष्य तय किया है। उसके अनुसार इस सूचकांक के लिए बुल-केस यानी तेजी की ​स्थिति में 30,000 और बियर-केस 20,500 का है।

बत्रा ने कहा, ‘भारत में पहले से ही ‘कमी के कारण प्रीमियम’ पर ट्रेड होता रहा है, जिसकी वजह ऊंची वृद्धि और नीतियों में स्थिरता है। लेकिन पिछली आठ तिमाहियों में कमजोर एक अंक की पिछली वृ​द्धि से उस प्रीमियम को चुनौती मिल रही है। भले ही एमएससीआई ईएम इंडेक्स के साथ भारत का मूल्यांकन अंतर 65 प्रतिशत (109 फीसदी के सर्वा​धिक प्रीमियम के मुकाबले) तक कम हो गया है, फिर भी यह कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रतिस्प​र्धियों के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है, जो ज्यादा या वैसी ही आगामी आय वृद्धि के लिए खरीदारी का सस्ता मौका मुहैया कराते हैं।’

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि ऊर्जा की ज्यादा लागत और आपूर्ति में रुकावटों की वजह से भारत की कमाई पर खतरा मंडरा रहा है। ब्रोकरेज के विश्लेषकों ने प्रमुख क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2027 के लिए आय अनुमानों में 2-10 फीसदी की कटौती की है। ब्रोकरेज ने 2026 के लिए आय में बढ़ोतरी के अपने अनुमानों को 2 प्रतिशत घटाकर 11 फीसदी कर दिया है और कैलेंडर वर्ष 2027 के लिए 1 प्रतिशत घटाकर 13 कर दिया है।

एक और बड़ी चिंता इक्विटी घटाना है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा, ‘जैसे-जैसे कंपनियां बढ़ोतरी के लिए अधिक इक्विटी पूंजी जारी करती हैं (अतिरिक्त निर्गम या नई कंपनियां), मौजूदा इक्विटी की कीमतों पर इसका सीधा या परोक्ष प्रभाव पड़ता है। हालांकि मौजूदा समय में फंड जुटाने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उम्मीद है कि अधिकांश भारतीय कंपनियां इन बाहरी दबावों के सामान्य होने पर पूंजी जुटाने की अपनी योजनाओं को फिर शुरू करेंगी।’

रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू बाजार में मजबूत निवेश -2025 की शुरुआत से अब तक लगभग 120 अरब डॉलर- ने विदेशी निवेश के बाहर जाने का असर कम किया है, लेकिन आईपीओ, क्यूआईपी और प्रवर्तकों के हिस्सेदारी बेचने में आई तेजी मौजूदा शेयरधारकों के लिए मुनाफे की गुंजाइश सीमित कर रही है।

First Published : April 24, 2026 | 10:07 PM IST