भारत की सरकारी बीमा कंपनी और सबसे बड़ी घरेलू संस्थागत निवेशकों में से एक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर पोर्टफोलियो में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के चलते 70,105 करोड़ का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) के शेयरों में हुआ है। आंकड़ों से जाहिर होता है कि 27 फरवरी को युद्ध की घोषणा से ठीक एक दिन पहले एलआईसी का पोर्टफोलियो 14.88 लाख करोड़ रुपये का था लेकिन 9 मार्च को यह घटकर 14.17 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह से पोर्टफोलियो में 4.7 फीसदी यानी 70,105 करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
यह गणना ऐस इक्विटी से प्राप्त कंपनियों की शेयरधारिता आंकड़ों पर आधारित है, जिनमें एलआईसी की 1 फीसदी से अधिक इक्विटी हिस्सेदारी है। इस बीच, इस साल जनवरी से अब तक (वाईटीडी) यानी 9 मार्च तक एलआईसी के पोर्टफोलियो में 7.1 फीसदी यानी 1.08 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में करीब 4.5 फीसदी की गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रमुख बेंचमार्क की तुलना में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में ज्यादा नुकसान हुआ है। एनएसई निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में इस दौरान करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है।
आंकड़ों के अनुसार एलआईसी के करीब 21.8 फीसदी यानी 15,293 करोड़ रुपये के नुकसान का कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई भारी गिरावट रही। इसके अलावा, इस दौरान लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) के शेयरों में करीब 11 फीसदी (7,609 करोड़ रुपये) की गिरावट दर्ज की गई।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी. चोकालिंगम के अनुसार बैंकिंग शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ क्योंकि युद्ध ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं और भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ा दीं।
उन्होंने कहा, तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना और ब्याज दरों में वृद्धि के डर से बैंकों की कमाई पर असर पड़ा होगा। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों में ज्यादातर बैंकिंग शेयरों खासकर एसबीआई के शेयरों ने बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया है। भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच इन सभी कारणों से बैंकिंग शेयरों में गिरावट आई।
विश्लेषकों का कहना है कि अन्य शेयरों की बात करें तो एलऐंडटी में नवीनतम उपलब्ध शेयरधारिता पैटर्न के अनुसार एलआईसी की 12.7 फीसदी हिस्सेदारी है और इसके शेयरों में भारी गिरावट आई है क्योंकि पश्चिम एशिया कंपनी के प्रमुख बाजारों में से एक है। एलऐंडटी ने 28 जनवरी को तीसरी तिमाही की आय संबंधी कॉन्फ्रेंस कॉल में बताया था कि 3.57 लाख करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बुक में पश्चिम एशिया का हिस्सा करीब 75 फीसदी है।
एमके ग्लोबल के एक नोट के अनुसार पश्चिम एशियाई क्षेत्र में एलऐंडटी की सबसे बड़ी उपस्थिति सऊदी अरब में है, जहां हाइड्रोकार्बन साइटों पर काम चल रहा है जबकि नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली अनुसंधान एवं विकास (टीऐंडडी) परिचालन पूरे इलाके में फैले हुए हैं।
हालांकि मौजूदा हालात का आकलन करना मुश्किल है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तीन महीने की देरी और मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बन सेगमेंट में कम ऑर्डर को देखते हुए वित्त वर्ष 2027/28 में एलऐंडटी की मुख्य आय 11 से 12 फीसदी तक घट सकती है।
एमके ग्लोबल में कंपनी पर नजर रखने वाले विश्लेषक अश्विनी शर्मा और अभिषेक तापड़िया ने लिखा है, ऑर्डरों को देखते हुए वित्त वर्ष 2026 में लगभग 10 फीसदी का असर पड़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया में फिलहाल एलऐंडटी के 12,000-15,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
हमें निकट भविष्य में नए ऑर्डर और काम में देरी और स्थगन का जोखिम दिख रहा है। शेयर ने नकारात्मक प्रतिक्रिया जताई है और मुख्य बिजनेस वित्त वर्ष 2027/28 के लिए क्रमशः 23/19 गुना पीई पर कारोबार कर रहा है। हम खरीद की रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं और सम-ऑफ-द-पार्ट्स (एसओटीपी) के आधार पर 4,800 रुपये का लक्ष्य तय करते हैं।
मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषक भी दीर्घकालिक दृष्टिकोण से एलऐंडटी के शेयरों को लेकर आशावादी बने हुए हैं। लेकिन निकट भविष्य की चुनौतियों के प्रति आगाह करते हैं। उन्होंने हाल में जारी एक नोट में कहा, मौजूदा अस्थिर परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए हमने मुख्य व्यवसाय के मूल्यांकन को 27 गुना से घटाकर 25 गुना कर दिया है और दो साल के लिए लक्षित कीमत को संशोधित करते हुए 4,400 रुपये (पहले 4,600 रुपये) निर्धारित किया है। हम खरीद की रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं।