भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेजी देखने को मिली और बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी छह हफ्तों के सर्वोच्च स्तर पर बंद हुए। इस तेजी की मुख्य वजह बैंकिंग शेयरों में उछाल रही, जो कमाई के मजबूत आंकड़ों के कारण आई। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रुपये के डेरिवेटिव सौदों पर लगी पाबंदियों में ढील देने और ईरान-अमेरिका के बीच तनाव घटने की संभावना ने सकारात्मक माहौल बनाया।
सेंसेक्स 753 अंक यानी 0.96 फीसदी की बढ़त के साथ 79,273 पर बंद हुआ। निफ्टी 212 अंक यानी 0.9 फीसदी की बढ़त के साथ 24,577 पर टिका। दोनों सूचकांक 6 मार्च के बाद के अपने सबसे मजबूत स्तर पर बंद हुए। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 468.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज शेयरों ने इस तेजी में अहम भूमिका निभाई। मजबूत नतीजों के कारण एचडीएफसी बैंक में 2.04 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक में 2.4 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। इन दोनों ने मिलकर सेंसेक्स की बढ़त में आधे से ज्यादा का योगदान दिया। निफ्टी बैंक इंडेक्स 1.4 फीसदी ऊपर चढ़ा। बाजार के माहौल को आरबीआई के उस फैसले से भी संबल मिला, जिसमें उसने इस महीने की शुरुआत में मुद्रा की अस्थिरता पर लगाम कसने के लिए रुपये के डेरिवेटिव सौदों पर लगाई कुछ पाबंदियों को वापस ले लिया।
आने वाले समय में बाजार की दिशा ईरान और अमेरिका के हालात पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर करीब से नजर रखे हुए हैं कि ईरान इस हफ्ते संघर्षविराम की समय सीमा खत्म होने से पहले बातचीत में शामिल होता है या नहीं और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति फिर से शुरू हो पाती है या नहीं। होर्मुज में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे भारत में महंगाई और आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं पर मुश्किलें मंडरा रही हैं क्योंकि भारत ऊर्जा आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। ब्रेंट क्रूड 90.3 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से उसकी कीमतों में 22 फीसदी की उछाल आ चुकी है।
भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फिर से बिकवाली शुरू कर दी है। इस साल जनवरी से अब तक उनकी निकासी पहले के किसी भी पूरे साल की कुल निकासी से ज्यादा हो गई है। मंगलवार को एफपीआई ने 1,919 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,221 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। 2026 में एफपीआई की शुद्ध निकासी अब तक 1.67 लाख करोड़ रुपये रही है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज़ में शोध प्रमुख (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, बेहतर होते आर्थिक संकेतकों, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और चौथी तिमाही की मजबूत कमाई की रफ्तार के सहारे भारतीय शेयर बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ने का सिलसिला बने रहने की संभावना है। लेकिन जैसे-जैसे संघर्षविराम की अंतिम समय सीमा नजदीक आ रही है, अमेरिका-ईरान की बातचीत के नतीजों पर नजर रखना जरूरी होगा। कोई भी प्रतिकूल घटनाक्रम बाजार में गिरावट का जोखिम पैदा कर सकता है। एफआईआई के निवेश के रुझान भी काफी अहम होंगे क्योंकि हाल की बिकवाली से संकेत मिलता है कि बाजार में पूरी तरह से पलटाव अभी तक नहीं आया है।