Mazagon Dock Shipbuilders Dividend: सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने गुरुवार (30 अप्रैल) को बाजार बंद होने के बाद मार्च तिमाही के नतीजे जारी कर दिए। कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में कंसोलिडेट नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 109 प्रतिशत बढ़कर 679.18 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने पिछले साल की इसी अवधि में 325.29 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।
कंपनी का इंटीग्रेट रेवेन्यू मार्च तिमाही में 21.3 प्रतिशत बढ़कर 3,850.39 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले साल 3,174.41 करोड़ रुपये था। ईबिटडा में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह 355 प्रतिशत बढ़कर 542.89 करोड़ रुपये हो गया। यह एक साल पहले 119.34 करोड़ रुपये था। ईबिटडा मार्जिन 14.1 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 3.8 प्रतिशत था।
कंपनी ने बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए 5 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 4.62 रुपये के अंतिम डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी, जो आगामी वार्षिक आम बैठक में ली जाएगी।
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मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मुख्य रूप से भारतीय नौसेना, कोस्ट गार्ड और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां और कमर्शियल जहाज बनाती है। इसके अलावा कंपनी ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म का निर्माण और मर म्मत कार्य भी करती है। यह रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। बीएसई पर कंपनी के शेयर गुरुवार को 38.25 रुपये या 1.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,733.25 रुपये पर बंद हुए।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने पहली भी कई बार अपने निवेशकों को डिविडेंड दिया है। फरवरी 2026 में कंपनी ने 7.50 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दिया था। वर्ष 2025 में कंपनी ने कई चरणों में डिविडेंड दिया, जिसमें 6 रुपये का अंतरिम, 3 रुपये का अंतरिम और 2.71 रुपये का अंतिम डिविडेंड शामिल था। वर्ष 2024 कंपनी के लिए खास रहा। जब उसने 23.19 रुपये का अंतरिम और 12.11 रुपये का अंतिम डिविडेंड दिया, जो अब तक के उच्च स्तरों में से एक है।