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विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भारतीय राजनीति और नीतिगत निरंतरता को लेकर एक बड़ा संकेत दिया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की विधानसभा राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणामों की सबसे बड़ी खासियत पश्चिम बंगाल में सत्ता में बीजेपी का पहली बार सत्ता में आना और तमिलनाडु में एक नई विजय की टीवीके की पार्टी का दमदार उदय रहा। एनॉलिस्ट का मानना है कि यह जीत 2029 लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी को मजबूत आधार दे सकती है और केंद्र स्तर पर पॉलिसी में निरंतरता बनी रहने की संभावना है। इससे बाजारों को भी पॉजिटिव संकेत मिलेगा।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने चुनावी नतीजों पर अपनी हालिया रिपोर्ट बताया कि पश्चिम बंगाल की जीत ने प्रधानमंत्री मोदी की उस छवि को और मजबूत किया है कि वह भारतीय मतदाताओं के अलग-अलग वर्गों में व्यापक लोकप्रियता रखने वाले नेता हैं। यानी, अभी भी भारतीय राजनीति में ब्रांड मोदी सबसे बड़ा आकर्षण है।
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के साथ बीजेपी ने 2024 लोकसभा चुनावों में मिले झटके से उबरने की अपनी प्रक्रिया को और मजबूत कर लिया है। इसके बाद पार्टी हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार जैसे कई राज्यों में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है। पश्चिम बंगाल की जीत पार्टी का मनोबल और बढ़ाएगी। खासकर, फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी का उत्साह मजबूत रहेगा। भारतीय राजनीति के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे अहम राज्य माना जाता है, जहां 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन लगातार कमजोर होता दिखाई दे रहा है। गठबंधन के कई सहयोगी दल हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और अब पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में एनडीए के सामने जमीन खोते गए हैं। इस गठबंधन ने 2024 लोकसभा चुनावों में कुछ बढ़त बनाई थी।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस INDIA गठबंधन के प्रमुख स्तंभों में से एक थी। लेकिन पश्चिम बंगाल चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन और तमिलनाडु में DMK की हार के बाद ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस एक बार फिर गठबंधन में अपनी केंद्रीय भूमिका मजबूत करेगी। हालांकि लगातार चुनावी हार के कारण पूरा गठबंधन कमजोर पड़ चुका है और आगे की रणनीति तय करने के लिए उसे गंभीर आत्ममंथन की जरूरत होगी।
ब्रोकरेज रिपोर्ट का कहना है कि हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों को बाजार सकारात्मक रूप से देख सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह केवल “बदलाव का संदेश” नहीं, बल्कि पॉलिसी को लेकर निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्योंकि सत्तारूढ़ NDA की स्थिति और मजबूत हुई है। वहीं, 2024 लोकसभा चुनावों में BJP को मिले झटके को लेकर जो चिंताएं थीं, वे अब काफी हद तक खत्म होती दिखाई दे रही हैं।
चुनावी नतीजों का संबंधित राज्यों की आर्थिक वृद्धि पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है, खासकर पश्चिम बंगाल में हुआ बड़ा राजनीतिक बदलाव आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। हालांकि चुनावी नतीजों के शुरुआती असर के बाद बाजार का ध्यान जल्दी ही पश्चिम एशिया युद्ध और FY26 की चौथी तिमाही (4QFY26) के नतीजों पर शिफ्ट हो जाएगा।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अब तक आए कॉर्पोरेट नतीजे अनुमान के अनुरूप रहे हैं और उनका रुझान सकारात्मक रहा है। अब तक 109 कंपनियों ने नतीजे घोषित किए हैं, जो MOFSL यूनिवर्स के अनुमानित नेट प्रॉफिट (PAT) पूल का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं। इन कंपनियों की बिक्री अनुमान से 1.6 प्रतिशत बेहतर रही, कामकाजी मुनाफा (EBITDA) अनुमान के अनुरूप रहा। जबकि PAT अनुमान से 2.6 प्रतिशत अधिक रहा।
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सेक्टर स्तर पर बैंकिंग, कंज्यूमर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हेल्थकेयर, मेटल्स और रिटेल सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं ऑटो, NBFC नॉन-लेंडर्स, ऑयल एंड गैस और यूटिलिटीज सेक्टर कुल PAT स्तर पर अनुमान से कमजोर रहे। हालांकि निकट अवधि में बाजार पश्चिम एशिया संकट से जुड़े उतार-चढ़ाव के प्रभाव में रह सकता है। साथ ही कमोडिटी कीमतों में तेजी भी एक अहम जोखिम बनी रहेगी, क्योंकि लंबे समय तक ऊंचे दाम भारत के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों और मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं।
मोतीलाल ओसवाल ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में Large Caps और Mid Caps को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। टॉप निफ्टी-50 आइडिया में Bharti Airtel, SBI, ICICI Bank, M&M, Titan, Bharat Electronics, Eternal, Tata Steel, Infosys, और Interglobe Aviation को जगह दी है। वहीं, टॉन नॉन-निफ्टी-50 आइडिया में TVS Motors, ICICI PRU AMC, Groww, Indian Hotels, AU Small Finance, Dixon Tech., Lenskart, Waaree Energies, Coforge, Radico Khaitan, और Delhivery शामिल हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर में निवेश संबंधी सलाह ब्रोकरेज हाउस ने दी है। ये बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के विचार नहीं हैं। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)