प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
निफ्टी मिडकैप 100 मंगलवार को 0.54 फीसदी बढ़कर 62,299 के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया जबकि ईरान पर अमेरिका के नए हमलों के बीच बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट आई। लिहाजा, शांति समझौते की उम्मीदें धूमिल हो गईं। सेंसेक्स 479 अंक यानी 0.6 फीसदी की गिरावट के साथ 76,009.70 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 118 अंक यानी 0.5 फीसदी गिरकर 23,914 पर बंद हुआ।
भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2.5 फीसदी बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.5 फीसदी गिरकर 95.7 पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष में निफ्टी मिडकैप 100 में अब तक 18.3 फीसदी की बढ़त हुई है। जहां एक ओर मिडकैप इंडेक्स ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ, वहीं बेंचमार्क सेंसेक्स अपने शिखर से 11.4 फीसदी नीचे बना हुआ है। निफ्टी 9.2 प्रतिशत नीचे है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 अभी भी अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर से 7.2 फीसदी दूर है।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 468.7 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 17,444 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्शाता है। 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफआईआई) अब तक 2.3 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों के शुद्ध बिकवाल रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक मिडकैप की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि इनमें सेक्टोरल विविधता है, जो निवेश के अनोखे थीमेटिक और निचले स्तर के आसपास खरीदारी के मौके देती है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि यह सेगमेंट विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली से काफी हद तक सुरक्षित है।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, मिड-कैप शेयर अभी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि वे आमतौर पर एफपीआई के पसंदीदा नहीं होते। विदेशी फंड बड़े पैमाने पर बड़े बैंकों और इंडेक्स में ज्यादा भार वाले दूसरे शेयरों को बेच रहे हैं। इसका असर बेंचमार्क इंडेक्स और बाजार के कुल माहौल पर पड़ा है। दूसरी ओर, मिड-कैप को ज्यादातर घरेलू खुदरा और एचएनआई निवेशक चला रहे हैं।
भट्ट ने कहा कि भले ही मिड-कैप स्पेस में मूल्यांकन ज्यादा लग रहे हों, लेकिन उनमें कमाई में बढ़ोतरी लार्ज-कैप के मुकाबले काफी ज्यादा मजबूत रही है।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी. चोकालिंगम ने कहा, मिड-कैप बढ़ते रहेंगे। उन पर रुपये के गिरने या एफपीआई की बिकवाली का कोई असर नहीं पड़ता। इसके अलावा, हर हफ्ते लाखों नए रिटेल निवेशक बाजार में आते हैं। डीआईआई भी उन मिड-कैप को खरीदते दिख रहे हैं जहां एफपीआई की पोजीशन काफी कम हैं।
भट्ट ने कहा, मिड-कैप में ज्यादा सेक्टोरल विविधता और ज्यादा कंपनी-विशेष में बढ़त की कहानी होती हैं। निवेशक इस संभावना से भी आकर्षित होते हैं कि सफल मिड-कैप आखिरकार लार्ज-कैप बन सकते हैं और बेंचमार्क इंडेक्स में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, मिड-कैप म्युचुअल फंडों में मजबूत निवेश की आवक ने मांग को और बढ़ा दिया है क्योंकि इन फंडों के लिए इस सेगमेंट में ही पूंजी लगाना अनिवार्य होता है। जहां तक स्मॉल-कैप की बात है, कमाई में वृद्धि हालांकि अच्छी रही है, फिर भी निवेशक अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित और स्थापित मिड-कैप शेयरों को ज्यादा पसंद करते दिख रहे हैं। स्मॉल-कैप अभी भी अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से कुछ दूरी पर हैं क्योंकि निवेशक वृद्धि और स्थिरता के बीच संतुलन की तलाश में हैं।
मंगलवार को बाजार में चढ़ने-गिरने वाले शेयरों का अनुपात मिला-जुला रहा। जहां 2,139 शेयरों में गिरावट आई वहीं 2,067 शेयरों में बढ़त देखने को मिली।
आगे चलकर, मिडकैप सेक्टर की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संघर्षों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से विभिन्न उद्योगों में परिवहन, ऊर्जा और इनपुट लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो निवेशक अपनी रणनीतियों और जोखिम उठाने की क्षमता पर फिर से सोच सकते हैं।