विश्लेषकों ने भारतीय कंपनी जगत के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की कमाई में बढ़ोतरी के अनुमानों में कटौती शुरू कर दी है। यह कमी कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने के बीच की गई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की लड़ाई के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, उसका असर अभी पूरी तरह से सामने नहीं आया है। अगली कुछ तिमाहियों में भारतीय कंपनी जगत के वित्त प्रदर्शन पर इसका बुरा असर पड़ने की संभावना है। उन्हें लगता है कि इसका असर आखिरकार वित्त वर्ष 27 के आंकड़ों पर पड़ेगा।
निप्पॉन इंडिया ऐसेट मैनेजमेंट में न्यू ऐसेट क्लास के प्रमुख एंड्रयू हॉलैंड को खाडी युद्ध से पहले वित्त वर्ष 26-27 के लिए कमाई में करीब 10-12 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, जिसके और अधिक होने की संभावना थी। उन्होंने कहा, अगर पश्चिम एशिया में हालात जल्द ठीक हो जाते हैं तो शायद एक तिमाही के लिए थोड़ा झटका लग सकता है, लेकिन हमें फिर से उसी 10-12 फीसदी की रफ्तार पर लौट आना चाहिए। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीदों को घटाकर लगभग 6-10 फीसदी तक किया जा सकता है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण के मुताबिक पिछले हफ्ते के आखिर तक मार्च 2026 की तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली 141 कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ (असाधारण लाभ और हानियों को समायोजित करने के बाद) सालाना आधार पर 14 फ़ीसदी बढ़ा है। यह पिछली 10 तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार से हुई बढ़ोतरी है। इन कंपनियों का शुद्ध लाभ (असाधारण लाभ और हानियों को समायोजित करने के बाद) वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में 1.7 फ़ीसदी बढ़ा था और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 8.6 फ़ीसदी बढ़ा था।
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गतिरोध के कारण सोमवार को इनमें करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने राजनयिकों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की पाकिस्तान की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी थी।
हॉलैंड ने कहा कि तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, संभवतः 90–100 डॉलर प्रति बैरल पर और यह इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज स्ट्रेट में बाधा रहती है या नहीं। उन्होंने कहा, अभी इसका कोई पक्का जवाब नहीं है क्योंकि इसमें बहुत सारे कारक हैं। अगर स्ट्रेट फिर से खुल जाता है तो तेल की कीमतें तेजी से गिर सकती हैं। लेकिन कमाई पर इसका असर दिखने में समय लगेगा और सामान्य होने से पहले शायद एक तिमाही तक इसका असर रह सकता है।
जेपी मॉर्गन के विशेषज्ञों ने भी पश्चिम एशिया की जंग के चलते वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी को लेकर जोखिमों का इशारा किया है। उनका अनुमान है कि भले ही संघर्षविराम हो गया हो, लेकिन आपूर्ति में रुकावटें और ऊंची लागत अगले कुछ महीनों तक बनी रहेगी। ऊर्जा की आपूर्ति सामान्य होने में तीन से चार महीने का समय और लगने की संभावना है। जेपी मॉर्गन ने पिछले कुछ हफ्तों में कंज्यूमर, ऑटो, फाइनैंशियल और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) जैसे अलग-अलग सेक्टरों में वित्त वर्ष 27 के लिए कमाई के अपने अनुमानों को भारांकित औसत के आधार पर 2 से 10 फीसदी तक घटा दिया है।
जेपी मॉर्गन के राजीव बत्रा ने हाल के एक नोट में लिखा, अलग-अलग सेक्टरों में चुनौतियां कई तरीकों से सामने आएंगी, जिनमें सीधे खपत पर असर, मार्जिन में कमी, कामकाज में अड़चन और दूसरे दर्जे के असर शामिल हैं। हमने कैलेंडर वर्ष 26/27 के लिए एमएससीआई इंडिया की कमाई में बढ़ोतरी के अपने अनुमानों को 2 फीसदी/ 1 फीसदी घटाकर 11 फीसदी / 13 फीसदी कर दिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों के अलावा अगले कुछ महीनों में एक और चीज पर नजर रखनी होगी और वह है रुपये-डॉलर का समीकरण। भारत की कमाई का कुछ हिस्सा निर्यात पर निर्भर है। फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), धातु और ऑटो जैसे सेक्टरों को रुपये के कमजोर होने से फायदा होता है।
इलारा कैपिटल के प्रमुख बिनो पातिपरमपिल ने कहा, वित्त वर्ष 27 के लिए पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले हम निफ्टी ईपीएस (प्रति शेयर आय) में 15 फीसदी की बढ़त की उम्मीद कर रहे थे। मेरी शुरुआती राय यह है कि अगर युद्ध जारी रहता है और तेल के दाम कुछ और महीने ऊंचे रहते हैं तो यह घटकर 7-8 फीसदी तक आ सकती है। ऑटोमोबाइल से लेकर तेल व गैस और एयरलाइंस जैसे सेक्टरों पर इसका असर पड़ सकता है।