Oil Stock: हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी रिफाइनिंग और मार्केटिंग (OMCs) कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने में जल्दबाजी नहीं कर सकती हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जोरदारी तेजी आई है। संघर्ष के बढ़ने या घटने की संभावनाओं से तेल में तेज हलचल देखी जा रही है। इस स्थिति के बीच ब्रोकरेज हॉउस सीएलजी का मानना है कि महारत्न पीएसयू कंपनी ओएनजीसी (ONGC) का शेयर 65 प्रतिशत का रिटर्न दे सकता है।
ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने ओएनजीसी लिमिटेड पर ‘BUY’ रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर टारगेट प्राइस 315 रुपये से बढ़ाकर 405 रुपये कर दिया है। ओएनजीसी के शेयर बुधवार को 270 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए।
ब्रोकरेज ने कहा कि युद्ध से पहले के अंतर को मानें तो वाहन ईंधन के लिए ब्रेक-ईवन ब्रेंट स्तर 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमत जल्द ही इन स्तरों से नीचे नहीं जाएगी। इसके चलते ओएमसी कंपनियों के लिए सही मार्केटिंग मार्जिन कमाना मुश्किल हो सकता है। जबकि पिछले दो-तीन वर्षों में असामान्य रूप से अधिक मार्जिन देखने को मिला था।
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सीएलएसए के विश्लेषकों विकाश कुमार जैन और समृद्ध मंगला ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ”हमें उम्मीद नहीं है कि कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बड़ी बढ़ोतरी करेंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मिले अधिक लाभ के बाद अब इन कंपनियों को संतुलन बनाए रखना पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, ”90 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर भी हमें ओएनजीसी के शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 65 प्रतिशत तक बढ़त की संभावना दिखती है। यह सेक्टर का पसंदीदा शेयर बन सकता है। डाउनस्ट्रीम स्प्रेड का ऊंचा स्तर रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य रिफाइनिंग कंपनियों की आय के लिए भी सकारात्मक रहेगा।”
नोमुरा के अनुमान के अनुसार प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग भारत में बहुत ही छोटे उपभोक्ता वर्ग द्वारा किया जाता है। इसका बाजार हिस्सा एकल अंक के निचले स्तर पर है। उनका कहना है कि कीमत बढ़ने का तेल मार्केटिंग कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर बहुत सीमित असर पड़ेगा, जो एक प्रतिशत से भी कम रहेगा।
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दूसरी ओर, औद्योगिक डीजल देश में बिकने वाले कुल डीजल का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, कीमत बढ़ने के बावजूद तेल मार्केटिंग कंपनियां औद्योगिक ग्राहकों को डीजल बेचने में घाटा उठाती रह सकती हैं। ऐसा इसलये क्योंकि मार्केटिंग खंड के लिए उनकी कुल लागत वर्तमान में 140 रुपये प्रति लीटर से अधिक है।
(डिस्क्लमेर: यहां शेयर में सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)