Stock Market: चुनाव के बाद अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर सिर्फ आम लोगों की जेब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों के मन में कई अहम सवाल उठ रहे हैं…क्या महंगे ईंधन की वजह से बाजार में गिरावट आ सकती है? किन सेक्टर्स और कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा? क्या ऑटो, एविएशन और एफएमसीजी जैसे सेक्टर दबाव में आ जाएंगे? और सबसे जरुरी सवाल—ऐसे माहौल में किन शेयरों से दूरी बनाना बेहतर होगा या किन स्टॉक्स को बेच देना चाहिए?
साथ ही, बढ़ती तेल कीमतों का कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर क्या असर पड़ेगा। कच्चे तेल और ईंधन की लागत बढ़ने से कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इससे उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है। कई कंपनियां इस बढ़ती लागत को ग्राहकों पर डालने में सक्षम नहीं होतीं, जिससे उनके मार्जिन पर असर पड़ता है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि बदलते इस आर्थिक माहौल में सही रणनीति क्या होनी चाहिए।
एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट (फंडामेंटल) और सीएफए वकारजावेद खान का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि अब टाली नहीं जा सकती। यह हर उस भारतीय व्यवसाय पर एक तरह से छिपा हुआ टैक्स है जो ट्रांसपोर्ट, निर्माण या कंजम्प्शन से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि बाजार एक साथ तीन चीजों को कीमतों में शामिल करेगा। पहला महंगाई में बढ़ोतरी, दूसरा उपभोक्ता खर्च में कमी और तीसरा आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया का जटिल होना।
खान ने कहा कि शुरुआत में उपभोग आधारित सेक्टर्स में बिकवाली देखने को मिल सकती है। वहीं, डिफेंस सेक्टर और अपस्ट्रीम एनर्जी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि के घोषणा के दिन निफ्टी पर दबाव रहने की संभावना है। हालांकि लंबे समय में यह स्थिति बेहतर भी मानी जा सकती है, क्योंकि तेल मार्केटिँग कंपनियों पर अंडर-रिकवरी का दबाव एक बड़ा स्ट्रक्चरल जोखिम है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर और रिसर्च प्रमुख जी चोक्कलिंगम के अनुसार, बाजार पहले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की संभावना को काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुका है। उनका मानना है कि सरकार के पास बढ़ती तेल कीमतों से निपटने के लिए पर्याप्त गुंजाइश है। अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती भी है, तो वह चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
उन्होंने कहा, ”शेयर बाजार में ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ हद तक बढ़ोतरी पहले ही कीमतों में शामिल है। अगर सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक बढ़ाती है, तो बाजार इसे सहज रूप से स्वीकार कर लेगा। हालांकि, यह बढ़ोतरी एक साथ नहीं होगी और ईंधन की कीमतों में एक बार में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना पूरी तरह से नकार दी गई है।”
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खान के अनुसार, पांच सेक्टर सीधे तौर पर प्रभावित हो सक्तये हैं। एयरलाइंस सेक्टर में एटीएफ कुल ऑपरेटिंग लागत का 35 से 40 प्रतिशत होता है। इससे इंडिगो (Indigo) और स्पाइसजेट (SpiceJet) पर सीधा असर पड़ेगा। पेंट कंपनियां जैसे एशियन पेंट्स, बर्जर (Burger) और कंसाई नेरोलैक अपने कच्चे माल का करीब 40 प्रतिशत पेट्रोकेमिकल्स से लेती हैं। इससे उनके मार्जिन तुरंत प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि टायर कंपनियां जैसे अपोलो, सीएट (CEAT) और एमआरएफ (MRF) को कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में उछाल का सामना करना पड़ेगा। वहीं, लॉजिस्टिक्स और एफएमसीजी सेक्टर भी प्रभावित होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में 65–70 प्रतिशत माल ढुलाई डीजल पर निर्भर है, जिससे लागत बढ़ेगी।
खान ने बताया कि उन कंपनियों में निवेश कम करना बेहतर होगा जिनकी ईंधन पर निर्भरता ज्यादा है और जिनकी कीमत बढ़ाने की क्षमता कमजोर है। खासकर एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कम मार्जिन वाले उपभोक्ता सेक्टर में। तेल मार्केटिँग कंपनियों में पॉलिसी से जुड़ा जोखिम बना रह सकता है। इससे इनमें उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर महंगाई बढ़ती है तो ब्याज दरों से जुड़े उपभोग वाले शेयरों में भी कटौती करना बेहतर हो सकता है। हालांकि, पूरी तरह बिकवाली करने के बजाय संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए और मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर मार्जिन वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
खान के अनुसार, तेल की कीमतें बढ़ने से उन कंपनियों के मुनाफे (ईबिट्डा मार्जिन) पर दबाव पड़ेगा, जहां ईंधन एक बड़ा खर्च है और कीमत बढ़ाने की क्षमता सीमित है। कंपनियों की वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ सकती है और लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने में देरी हो सकती है। ऐसे सेक्टर्स में आमतौर पर मुनाफे के अनुमान घटाए जाते हैं और मांग पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, अपस्ट्रीम ऊर्जा कंपनियों को ज्यादा कीमतों का फायदा मिल सकता है। इससे उनका प्रदर्शन बेहतर हो सकता है और बाजार की कमजोरी को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।