सुजलॉन एनर्जी शुक्रवार (17 अप्रैल) को 5 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ बंद हुआ। -प्रतीकात्मक फोटो
Suzlon Energy Share: विंड एनर्जी सेक्टर का मल्टीबैगर स्टॉक सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) बीते एक हफ्ते में करीब 17 फीसदी उछल गया। शेयर में एक बार तेजी का सेंटीमेंट बनता नजर आ रहा है। दमदार ऑर्डर बुक, मजबूत फंडामेंटल और बेहतर ग्रोथ आउटलुक के दम पर ब्रोकरेज हाउस एंबिट कैपिटल (Ambit Capital) ने सुजलॉन एनर्जी पर BUY रेटिंग के साथ कवरेज की शुरुआत की है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की ऑर्डरबुक मजबूत है और रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान बेहतर है। आने वाले सालों में सुजलॉन का मार्केट शेयर बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच सकता है। यह एनर्जी शेयर शुक्रवार (17 अप्रैल) को 5 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ बंद हुआ।
एंबिट कैपिटल ने सुजलॉन एनर्जी पर खरीदारी की सलाह के साथ कवरेज शुरू किया है। स्टॉक पर अगले 12 महीने के नजरिए से टारगेट प्राइस 60 रुपये प्रति शेयर रखा है। शुक्रवार को BSE पर शेयर 52.94 रुपये पर बंद हुआ। इस तरह मौजूदा भाव से स्टॉक करीब 14 फीसदी का अपसाइड दिखा सकता है। इंट्राडे में स्टॉक ने 53.70 का हाई और 50.54 का लो बनाया। हालांकि, यह शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई (74.30) से अभी करीब 30 फीसदी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का मार्केट कैप 72,605 करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया गया।
सुजलॉन एनर्जी के लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस की बात की जाए, तो यह मल्टीबैगर शेयर रहा है। बीते पांच साल में इस शेयर ने 1105 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। वहीं, 3 साल का रिटर्न 550 फीसदी रहा है। दो साल में 30 फीसदी उछला है। बीते एक साल में बाजार में बिकवाली के दबाव में शेयर में अच्छा खासा करेक्शन आया है। हालांकि, बीते एक महीने से शेयर ने एक बार फिर तेजी का सेंटीमेंट दिखाया है। एक महीने में शेयर 28 फीसदी से ज्यादा उछला है।
एंबिट कैपिटल का कहना है कि वित्त वर्ष 2032 तक हर साल 6-8 गीगावॉट विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की मांग बनी रहेगी, जो रिन्यूएबल एनर्जी (RE-RTC/FDRE) टेंडर्स से आएगी। FY32 के बाद इंस्टॉलेशन 10GW से ऊपर जा सकते हैं, और बिजली उत्पादन में विंड की हिस्सेदारी FY32 तक 6% से बढ़कर 8% और FY47 तक 15% हो सकती है। वहीं, सुजलॉन की मार्केट हिस्सेदारी FY25 तक 32% से बढ़कर FY27 के बाद 40% से ज्यादा हो सकती है, जिसे टर्नकी क्षमताओं और ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) नियमों के बाद चीनी कंपनियों की कीमत बढ़त कम होने से मदद मिलेगी।
एंबिट ने FY26-30 के लिए 15% और FY30-35 के लिए 11% EPS CAGR का अनुमान लगाया है। FY32 तक सुजलॉन लगभग 20,000 करोड़ रुपये का नेट कैश बना सकती है, जिसे BESS (Battery Energy Storage System) जैसे नए क्षेत्रों में निवेश किया जा सकता है।
ब्रोकरेज का कहना है कि FY28 तक कामकाजी मुनाफा (EBITDA) में 40% बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 4300 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह FY26-28 के बीच 15% वॉल्यूम CAGR से संभव है। वहीं, सुजलॉन के पास 6.4GW का मजबूत ऑर्डर बुक है, जिससे अगले 2 साल की ग्रोथ स्पष्ट दिखती है। FY30 तक 20% से ज्यादा RoCE (रिटर्न ऑन कैपिटल इम्प्लॉयड) रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट का कहना है कि भारत में 60-70% विंड बिजली उत्पादन मॉनसून के दौरान होता है, जब सोलर उत्पादन सबसे कम होता है। केवल सोलर और बैटरी (BESS) के जरिए 24×7 बिजली देना मुश्किल है, क्योंकि यह दिन में एक बार ही डिस्चार्ज दे सकता है या गर्मियों में अतिरिक्त उत्पादन कर सकता है। इसलिए भारत के ऊर्जा बदलाव में विंड की भूमिका अहम होगी, क्योंकि यह सोलर को दिन और मौसम दोनों स्तर पर सपोर्ट करता है।
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ब्रोकरेज ने FY36 तक 140GW और FY50 तक 430GW विंड क्षमता का अनुमान लगाया है, जो CEA के अनुमान 155GW और 450GW से थोड़ा कम है। कंपनी की EPC और WTG मिक्स स्ट्रैटेजी पर जोर है, जो मौजूदा 20% से बढ़कर 50% तक जा सकता है। सुजलॉन पहले ही 22GW की साइट पाइपलाइन तैयार कर चुकी है। ALMM नियमों से चीनी कंपनियों की कीमत बढ़त (15-20%) घटकर 5% से कम रह जाएगी, जिससे सुजलॉन को क्वॉलिटी के आधार पर बढ़त मिलेगी। 2026 के अंत तक 5MW टरबाइन विकसित होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूत होगी।
डिस्क्लेमर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज ने दी है। ये बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के विचार नहीं हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। इसलिए निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।