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3000 करोड़ जुटाने की तैयारी में Punjab & Sind Bank, QIP प्लान से घटेगी सरकार की हिस्सेदारी

Punjab & Sind Bank ने ₹3000 करोड़ जुटाने के लिए QIP प्लान शुरू किया है, साथ ही NIM सुधार और साइबर जोखिम कम करने पर फोकस बढ़ाया है।

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मनोजित साहा   
Last Updated- April 29, 2026 | 9:17 AM IST

पंजाब ऐंड सिंध बैंक के बोर्ड ने साइबर जोखिमों के उभरते नए परिदृश्य के मद्देनजर वेंडर जोखिम घटाने के लिए रणनीतिक फैसला लिया है। पंजाब ऐंड सिंध बैंक के एमडी व सीईओ स्वरूप साहा ने मनोजित साहा को वीडियो साक्षात्कार में बताया कि शुद्ध ब्याज मार्जिन अपने निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और इस मार्जिन में चालू वित्तीय वर्ष में वृद्धि होगी। पेश हैं मुख्य अंश :

वित्त वर्ष 26 में शुद्ध ब्याज मार्जिन बीते वर्ष की तुलना में घट गया है। इसका क्या कारण है?  क्या वित्त वर्ष 27 के लिए दिशानिर्देश हैं?

हम पारंपरिक रूप से निम्न चालू एवं बचत खाता (कासा) बैंक हैं। हम सभी भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में कटौती के दौर में कासा की चुनौतियों को समझते हैं। हमारे बही खाते में 50 प्रतिशत बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है। हमने पूरी कटौती को संभाल लिया है। हम मौजूदा वित्त वर्ष मार्च, 2027 में 2.65 प्रतिशत तक सुधरने की स्थिति में हैं।

बैंक ने प्रति शेयर 39 पैसे का लाभांश घोषित किया है, जो उच्च स्तर पर है। इसका क्या औचित्य है?

यह फैसला हमारे विवेक पर निर्भर है। हमने पाया कि बैंक पूंजी के मामले में अच्छी स्थिति में है। बैंक की कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17 प्रतिशत से अधिक है। बैंक के बोर्ड ने बाजार के रुझान और शेयर धारकों के मूल्य के संदर्भ में इसे उच्च स्तर के बारे में देने के बारे में ध्यान दिया है।
हम पिछले साल और उससे पहले अधिक लाभांश नहीं दे सके थे। शेयरधारकों के हितों की भी सेवा करनी है। इस वर्ष (वित्त वर्ष 27) में शुद्ध लाभ (1,322) बैंक के इतिहास में सर्वाधिक है।

बैंक में सरकारी हिस्सेदारी 93.85% है और यह बहुत अधिक है। इसे कम करने की क्या योजना है?

हमने इसे पिछले साल तीन-साढ़े तीन प्रतिशत कम किया था। इस वर्ष हमारे पास 3,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी जुटाने के लिए बोर्ड की मंजूरी भी है। समयसीमा बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगी। मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति कर दी गई है। हम निवेशकों के साथ चर्चा शुरू करेंगे, संवाद करेंगे और अपने बारे में जानकारी देंगे। यह योग्य संस्थागत प्लेसमेंट (क्यूआईपी) होगा। दूसरा, भारत सरकार का प्रयास है, जो उन्होंने कुछ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए (ओएफएस) किया है। इन दोनों को मिलाने से सरकारी हिस्सेदारी कम होगी।

बैंक को आईटी प्रणाली के आंतरिक संसाधनों को मजबूत करने की क्या योजना है, ताकि बैंक पूरी तरह से बाहरी विक्रेताओं पर निर्भर न रहे?

यह बहुत ही वाजिब प्रश्न है। हमने बोर्ड स्तर पर वेंडर जोखिम प्रबंधन पर काम करने, वेंडर से जुड़े जोखिम को कम करने का  रणनीतिक रोडमैप भी तैयार किया है। हमें डिजिटल और साइबर मोर्चे पर आने वाले नए-नए आयामों के कारण मजबूत आंतरिक प्रणालियां बनाने की जरूरत है। बोर्ड ने वेंडर पर निर्भरता कम करने की योजना भी बनाई है। वेंडर पर निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है लेकिन कुछ हद तक निर्भरता बनी रहेगी।

First Published : April 29, 2026 | 9:17 AM IST