शेयर बाजार

RBI के फैसले से बाजार में जोश, रेट सेंसिटिव शेयरों में 12% तक की जोरदार तेजी

बैंकिंग शेयरों में यूनियन बैंक, इंडसइंड बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में 10% तक की तेजी देखी गई।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- April 08, 2026 | 12:17 PM IST

Rate Sensitive Stocks: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। साथ ही अपने रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। इस खबर के बाद के बाद रीपो रेट से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिली। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर से बाजार में बने सकारात्मक माहौल से भी इंडेक्स में मजबूती को मदद मिली।

रेट सेंसिटिव शेयरों में निफ्टी ऑटो इंडेक्स में अच्छी हलचल देखी गई। अशोक लेलैंड, समवर्धना मदरसन, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), भारत फोर्ज, मारुति सुजुकी, यूनो मिंडा, टीवीएस मोटर कंपनी और आयशर मोटर्स के शेयर 12 प्रतिशत तक चढ़ गए।

वहीं, बैंकिंग शेयरों में यूनियन बैंक, इंडसइंड बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक (PNB), एक्सिस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई।

इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी मजबूती देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी, बीएसई और मुथूट फाइनेंस शीर्ष बढ़त वाले शेयर रहे। इनमें 8 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

रीपो रेट 5.25% पर बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार (8 अप्रैल) को मॉनेटरी पॉलिसी पर अपने फैसले का एलान कर दिया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है।

समिति ने मिडिल ईस्ट में संघर्ष की परिस्थितियों पर गौर करते हुए स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी (SDF) दर को 5 प्रतिशत पर बनाए रखा गया। वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी (MSF) दर और बैंक दर दोनों को 5.5 प्रतिशत पर रखा गया है। यह समिति की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी है। फरवरी में हुई इससे पिछली बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था।

क्रिसिल की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे ने कहा, ” एमपीसी द्वारा की गई लगातार दर कटौतियों और सरकार के सहयोगी राजकोषीय उपायों ने खपत मांग को बढ़ावा दिया है। बैंक ऋण वृद्धि बढ़कर करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो सितंबर 2024 के बाद सबसे अधिक है। हमारा मानना है कि इस वित्त वर्ष में कुल 125 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट कटौती का असर अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही तक खपत को सहारा देता रहेगा।”

उन्होंने कहा, ”अगले वित्त वर्ष में महंगाई के बढ़ने और आर्थिक वृद्धि के मजबूत बने रहने के बीच एमपीसी के दरों में ठहराव बनाए रखने की संभावना है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और जीडीपी सीरीज में होने वाले बदलावों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इससे वृद्धि और महंगाई के आकलन पर असर पड़ सकता है। आरबीआई किसी भी अप्रत्याशित झटकों से निपटने के लिए अपने विकल्प खुले रखेगा।”

First Published : April 8, 2026 | 12:00 PM IST