रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का प्रदर्शन वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में करीब-करीब सपाट रह सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि इसकी वजह ऑयल-टु-केमिकल्स (ओ2सी) कारोबार में कमजोरी और खुदरा क्षेत्र में धीमी वृद्धि होना है। हालांकि इन दोनों वर्टिकल की कमजोरी की भरपाई दूरसंचार क्षेत्र में हुई लगातार बढ़त से हो सकती है। कंपनी शुक्रवार को चौथी तिमाही के नतीजे घोषित करेगी।
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि संयुक्त रूप से कंपनी का राजस्व 2.7 लाख करोड़ रुपये से 2.8 लाख करोड़ रुपये के बीच रहेगा, जिसका मतलब है कि सालाना आधार पर इसमें 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी होगी। एबिटा 44,000–45,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर लगभग सपाट है। शुद्ध लाभ 16,200 करोड़ रुपये से 18,470 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 17 फीसदी तक की गिरावट दर्शाता है। मार्जिन में कमी की संभावना है, जिसका मुख्य कारण ऑयल टू केमिकल (ओ2सी) सेगमेंट पर दबाव होना है।
विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोकेमिकल स्प्रेड पर असर, जियो के प्रति ग्राहक राजस्व (एआरपीयू) का ट्रेंड और नए ग्राहकों का जुड़ना और लगातार निवेश के बीच खुदरा क्षेत्र में मार्जिन का बढ़ना,ये कुछ ऐसे अहम कारक होंगे, जिन पर नजर रखी जाएगी। शेयर बाजारों में आरआईएल का शेयर अपने 52 हफ्ते के उच्चस्तर 1,611 रुपये से 16.5 फीसदी नीचे आ गया है। 2026 में अब तक यह 14.5 फीसदी गिरा है जबकि बीएसई सेंसेक्स में 8.9 फीसदी की गिरावट आई है।
नोमूरा
नोमुरा को ओ2सी और खुदरा क्षेत्र में सुस्त प्रदर्शन की उम्मीद है, जबकि जियो के स्थिर रहने की संभावना है। उसका अनुमान है कि संयुक्त एबिटा 44,450 करोड़ रुपये रहेगा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 3 फीसदी कम और पिछले साल के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा है।
ओ2सी एबिटा 15,100 करोड़ रुपये (तिमाही आधार पर 9 फीसदी की गिरावट, सालाना आधार पर स्थिर) पर रहने की संभावना है। इस पर कच्चे तेल के ऊंचे प्रीमियम, माल ढुलाई और बीमा की बढ़ी हुई लागत, एलपीजी उत्पादन में वृद्धि, ईंधन की खुदरा बिक्री में नुकसान और केजी गैस के डायवर्जन का असर पड़ने की संभावना है। अपस्ट्रीम एबिटा 4,680 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कम उत्पादन और रखरखाव की ऊंची लागत के कारण तिमाही आधार पर 4 फीसदी कम रहेगा।
जियो का एबिटा 18,230 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसमें तिमाही आधार पर 3% और सालाना आधार पर 15% की बढ़त संभव है। । इसकी वजह है तिमाही के दौरान करीब 80 लाख नए ग्राहकों का जुड़ना, जिससे कुल ग्राहक संख्या 52.3 करोड़ तक पहुंच गई है और एआरपीयू बढ़कर 216 रुपये प्रति माह हो गया है।
खुदरा से मिलने वाला राजस्व 91,050 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो तिमाही आधार पर 3% की गिरावट लेकिन सालाना आधार पर 9% की बढ़त है जबकि इसका एबिटा 6,830 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जिसमें सालाना आधार पर 5% की बढ़त संभव है। नोमूरा का अनुमान है कि संयुक्त राजस्व 2.84 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 17,000 करोड़ रुपये रह सकता है जो सालाना आधार पर 12 फीसदी कम होगा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि ओ2सी से होने वाली कमाई में सालाना आधार पर 9 फीसदी की गिरावट आएगी, जबकि खुदरा क्षेत्र में 4 फीसदी की बढ़त हो सकती है। कम उत्पादन और पेट्रोलियम मुनाफे में सरकार की हिस्सेदारी ज्यादा होने के कारण अपस्ट्रीम सेगमेंट कमजोर बना रह सकता है।
उसके अनुमान के अनुसार, राजस्व 2.84 लाख करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 9 फीसदी की वृद्धि), एबिटा 44,050 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर स्थिर) और शुद्ध लाभ 16,200 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 17 फीसदी की गिरावट) रहेगा।
पीएल कैपिटल
पीएल कैपिटल का अनुमान है कि एकल आधार पर एबिटा घटकर 14,150 करोड़ रुपये रह जाएगा। इसकी मुख्य वजह होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बाधाओं के कारण माल-भाड़ा बढ़ना, गैस की बढ़ी हुई कीमतें और पेट्रोकेमिकल स्प्रेड में कमजोरी है। हालांकि रिफाइनिंग क्रैक्स की मजबूती कुछ हज तक इस गिरावट की भरपाई कर देगी।
खुदरा एबिटा लगभग 6,870 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर लगभग 5.6 फीसदी ज्यादा है. वहीं जियो का एबिटा तिमाही आधार पर 3.3 फीसदी बढ़ सकता है। इसमें एआरपीयू के मामूली रूप से बढ़कर 215.8 रुपये होने और ग्राहकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी का योगदान रहेगा।
एकीकृत स्तर पर एबिटा 44,360 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी) रह सकता है जबकि मार्जिन घटकर 16.2 फीसदी रहने की संभावना है। राजस्व 2.74 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 16,980 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 12.5 फीसदी कम है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज
कोटक को उम्मीद है कि एकीकृत एबिटा 45,018.9 करोड़ रुपये रहेगा (सालाना आधार पर 2.7 फीसदी ज्यादा, तिमाही आधार पर 2.2 फीसदी कम) और मार्जिन घटकर 15.6 फीसदी रह जाएगा। सेगमेंट के हिसाब से बात करें तो ओ2सी एबिटा लगभग 15,000 करोड़ रुपये पर स्थिर रहने की संभावना है, जिस पर पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े एनर्जी मार्केट की बाधाओं का असर पड़ेगा।
केजी डी-6 की कम मात्रा के कारण तेल व गैस एबिटा में सालाना आधार पर 9.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है, जबकि बेहतर ट्रैक्शन के चलते खुदरा एबिटा बढ़कर लगभग 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कोटक का अनुमान है कि एकीकृत राजस्व 2.89 लाख करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 10.5 फीसदी ज्यादा) और शुद्ध लाभ 18,468.6 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 4.8 फीसदी कम) रहेगा।