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रुपये में 12 साल की सबसे बड़ी तेजी, 2% चढ़कर $92.83 पर पहुंचा; RBI के फैसले ने पलटा खेल

Dollar Vs Rupee: रुपये में इस तरह की तेज बढ़त आखिरी बार एक दशक से अधिक पहले सितंबर 2013 में देखने को मिली थी।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- April 02, 2026 | 4:39 PM IST

Dollar Vs Rupee Today, 2 April: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गुरुवार (2 अप्रैल) को जोरदार मजबूती आई। रुपया खुलते ही 1.4 प्रतिशत मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 93.53 पर पहुंच गया। इसी के साथ रुपये ने 2013 के बाद अपनी सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त दर्ज की। तब आरबीआई ने रुपये को स्थिरता देने के लिए असाधारण कदम उठाए थे।

दोपहर में रुपया 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर डॉलर के मुकाबले 92.8350 पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सेशन में यह 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था। रुपये में इस तरह की तेज बढ़त आखिरी बार एक दशक से अधिक पहले सितंबर 2013 में देखने को मिली थी। तब आरबीआई के आपातकालीन कदमों ने मुद्रा को स्थिर किया था और फेडरल रिजर्व के टेपरिंग कार्यक्रम में अप्रत्याशित राहत मिलने से रुपये को सहारा मिला था। आखिर में भारतीय रुपया 1.8% उछलकर 93.10 पर बंद हुआ।

रुपये में मजबूती की वजह?

आरबीआई ने बैंकों को रुपये के ऑफशोर कारोबार के सबसे लोकप्रिय साधन की पेशकश करने से रोक दिया है। इससे 149 अरब डॉलर प्रतिदिन के बाजार पर दबाव पड़ सकता है। यह कदम गिरती मुद्रा को संभालने के लिए उठाया गया एक कड़ा उपाय माना जा रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने और रुपये को सहारा देने के लिए एक दशक में सबसे सख्त कदमों में से कुछ लागू किए हैं। इस साल रुपये लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रहा है और ईरान युद्ध के बाद इस पर दबाव और बढ़ गया है।

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पहला कदम शुक्रवार देर रात उठाया गया, जब नियामकों ने बैंकों की दैनिक ऑनशोर मुद्रा पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित कर दिया। इस फैसले के बाद बैंकों को कम से कम 30 अरब डॉलर के आर्बिट्राज सौदों को समेटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जब इससे भी रुपये की गिरावट नहीं थमी और यह नए निचले स्तर पर पहुंच गया, तो बैंकों को कुछ नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश करने से रोक दिया गया। यह बाजार ऑफशोर में औसतन 149 अरब डॉलर प्रतिदिन का है, जो ऑनशोर बाजार के मुकाबले लगभग दोगुना है।

First Published : April 2, 2026 | 3:23 PM IST