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SEBI का नया प्रस्ताव: स्टॉक ब्रोकर्स के नेटवर्थ नियम बदलेंगे, क्या होगा असर?

सेबी ने कहा कि नेटवर्थ मार्जिन के बाद “दूसरी सुरक्षा परत” के रूप में काम करता है और इतना मजबूत होना चाहिए कि वह उन जोखिमों को भी संभाल सके जो मार्जिन से कवर नहीं होते

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- April 24, 2026 | 7:22 PM IST

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शुक्रवार को स्टॉक ब्रोकर्स के लिए नेटवर्थ की आवश्यकता तय करने के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। एक कंसल्टेशन पेपर में नियामक ने कहा कि मौजूदा तरीका– जो ब्रोकर्स के पास रखे गए ग्राहकों के औसत दैनिक कैश बैलेंस के 10% से जुड़ा है– अब कम प्रासंगिक हो गया है। इसकी वजह यह है कि अपस्ट्रीमिंग फ्रेमवर्क लागू होने के बाद क्लाइंट्स का अधिकांश पैसा क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स के पास ट्रांसफर हो जाता है, जिससे ब्रोकर्स के पास बहुत कम बैलेंस बचता है।

इस स्थिति को देखते हुए SEBI ने एक नया तरीका प्रस्तावित किया है, जिसमें ब्रोकर्स द्वारा संभाले जाने वाले क्लाइंट फंड्स के साथ-साथ सर्विस किए जा रहे एक्टिव ग्राहकों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाएगा।

नेटवर्थ “दूसरी सुरक्षा परत”

सेबी ने कहा कि नेटवर्थ मार्जिन के बाद “दूसरी सुरक्षा परत” के रूप में काम करता है और इतना मजबूत होना चाहिए कि वह उन जोखिमों को भी संभाल सके जो मार्जिन से कवर नहीं होते।

कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने कहा, “यह जरूरी है कि इस दूसरी सुरक्षा परत को और मजबूत किया जाए। इसके लिए नेटवर्थ की आवश्यकता को ब्रोकर्स के ऑपरेशन के आकार और जोखिम के अनुरूप बनाया जाना चाहिए– जिसमें उनके पास मौजूद कुल क्लाइंट फंड्स, सीधे जुड़े एक्टिव ग्राहकों की संख्या और अधिकृत व्यक्तियों के जरिए जुड़े ग्राहकों की संख्या शामिल हो।”

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कैसे होगी नेटवर्थ की कैलकुलेशन?

प्रस्ताव के तहत वेरिएबल नेटवर्थ की कैलकुलेशन कई पैरामीटर्स के आधार पर एक ज्वाइंट तरीके से की जाएगी। इसमें पिछले छह महीनों के दौरान सभी क्लाइंट्स के औसत क्रेडिट बैलेंस का 10% शामिल होगा। इसके अलावा, जिन ब्रोकर्स के 10,000 से ज्यादा और 50,000 तक एक्टिव डायरेक्ट क्लाइंट्स हैं, उनके लिए 50 लाख रुपये का प्रावधान होगा। इसके बाद हर अतिरिक्त 50,000 क्लाइंट्स (या उसके हिस्से) पर 50 लाख रुपये और जोड़ने होंगे।

साथ ही, अधिकृत व्यक्तियों के जरिए जुड़े क्लाइंट्स के लिए भी चरणबद्ध (ग्रेडेड) नेटवर्थ की जरूरत तय की गई है। 2,500 तक क्लाइंट्स पर 5 लाख रुपये, 2,500 से ज्यादा और 10,000 तक क्लाइंट्स पर 25 लाख रुपये, और इसके बाद हर अतिरिक्त 10,000 क्लाइंट्स (या उसके हिस्से) पर 50 लाख रुपये का प्रावधान होगा, जो सभी एक्सचेंजों पर लागू होगा।

बड़े ब्रोकर्स पर ज्यादा जिम्मेदारी

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि संशोधित नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन ब्रोकर्स के पास ज्यादा क्लाइंट्स हैं, वे उसी अनुपात में ज्यादा फाइनेंशियल बफर बनाए रखें।

यह प्रस्ताव एक वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के बाद आया है, जिसमें NSE और BSE जैसे एक्सचेंजों के साथ-साथ ब्रोकर्स एसोसिएशन्स भी शामिल थे। सेबी ने इस ड्राफ्ट पर 15 मई 2026 तक आम जनता से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

First Published : April 24, 2026 | 7:22 PM IST