शेयर बाजार

शेयर बाजार में 5 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त, सेंसेक्स और निफ्टी ने तोड़ा गिरावट का सिलसिला

अमेरिका-ईरान युद्धविराम और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाजार ने 5 साल की सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक बढ़त दर्ज की, जिससे निवेशकों का मनोबल बढ़ा है

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- April 10, 2026 | 10:58 PM IST

अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम भले ही अस्थायी हो, मगर इससे तेल के दाम में नरमी आई और निवेशकों का मनोबल बढ़ा है जिससे शेयर बाजार ने बीते 5 साल में सबसे अच्छी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की। बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी ने 6 हफ्ते की साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 919 अंक या 1.2 फीसदी की बढ़त के साथ 77,550 पर बंद हुआ। निफ्टी 276 अंक की तेजी के साथ 24,051 पर बंद हुआ। इस हफ्ते सेंसेक्स 5.8 फीसदी और निफ्टी 5.9 फीसदी बढ़त में रहे, जो 5 फरवरी, 2021 के बाद सूचकांकों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज का बाजार पूंजीकरण 6.4 लाख करोड़ रुपये घटकर 451.2 लाख करोड़ रुपये रहा। इस हफ्ते बाजार पूंजीकरण में 28.9 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। हफ्ते की शुरुआत में घोषित अस्थायी संघर्ष विराम के कारण तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ। ब्रेंट क्रूड इस हफ्ते लगभग 12 फीसदी फिसल गया जो 27 जून, 2025 को समाप्त हुए हफ्ते के बाद से इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। ब्रेंट क्रूड आज 93.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

इस गिरावट से उन निवेशकों को राहत मिली जो ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण होने वाले महंगाई के असर को लेकर चिंतित थे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आम तौर पर भारत की आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट कमाई पर बुरा असर डालती हैं क्योंकि भारत तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। 

हालांकि तनाव के संकेत बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा और इजरायल तथा लेबनान के हिज्बुल्लाह के बीच गोलीबारी हुई। अमेरिका और ईरान ने भी एक-दूसरे पर संघर्ष-विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया। जब तक कि शत्रुता पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती और होर्मुज फिर से खुल नहीं जाता, तब तक वैश्विक जोखिम भावना में लगातार सुधार की संभावना कम ही है।

निवेशक इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के नतीजों पर, साथ ही इस हफ्ते शुरू हुए कंपनियों के नतीजों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। इस संघर्ष का कंपनियों के मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा, इस बारे में प्रबंधन की टिप्पणियां खास तौर पर चर्चा का विषय रहेंगी।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने कहा, ‘अगर तेल की कीमतें नीचे आती हैं तो बाजार में तेजी बनी रह सकती है क्योंकि अभी शेयर और तेल की कीमतों के बीच लगभग सीधा संबंध दिख रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव को देखते हुए, इस बात की संभावना कम है कि तेल की कीमतें लगातार नीचे रहेंगी। इसका मतलब यह है कि बाजार में तेजी के लंबे समय तक बने रहने पर संशय है।’

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 3,325 शेयर लाभ में और 986 नुकसान में बंद हुए। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 672 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 410 करोड़ रुपये की लिवाली की। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बीते तीन सत्र से धीमी पड़ी है मगर इस महीने अभी तक वे 48,213 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं।

मॉर्गन स्टैनली में इंडिया शोध प्रमुख और चीफ इंडिया इक्विटी स्ट्रेटजिस्ट रिधम देसाई ने कहा, ‘पश्चिम एशिया के संघर्ष ने गैस और उर्वरकों की आपूर्ति में चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जैसे-जैसे यह संघर्ष खत्म होने की ओर बढ़ रहा है, भारत के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जुड़ाव पर बहस फिर से शुरू हो जाएगी। एआई में सीधे तौर पर शामिल न होना भारतीय सेवा निर्यात के लिए सबसे बड़ी चुनौती लगती है।’

निफ्टी स्मॉलकैप 1.65 फीसदी और मिडकैप 1.5 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ। इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में 7.5 फीसदी की तेजी आई है। निफ्टी के सभी क्षेत्रीय सूचकांक बढ़त में रहे। इस हफ्ते निफ्टी रियल्टी में 13 फीसदी और निफ्टी फाइनैंशियल सर्विसेज में 10.8 फीसदी की तेजी आई। 

First Published : April 10, 2026 | 10:46 PM IST