शेयर बाजार

शराब कंपनियों के शेयरों में उछाल, कर्नाटक की घोषणा का असर

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आज शराब पर कर के वैश्विक मानक अपनाने और शराब की कीमतों से नियंत्रण हटाने की घोषणा की

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दीपक कोरगांवकर   
Last Updated- March 06, 2026 | 9:56 PM IST

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आज शराब पर कर के वैश्विक मानक अपनाने और शराब की कीमतों से नियंत्रण हटाने की घोषणा की। यह खबर आते ही दिन के कारोबार में एनएसई पर ब्रुअरीज और डिस्टिलरीज कंपनियों के शेयर 7 प्रतिशत तक चढ़ गए जबकि बाजार गिरावट का शिकार रहा।

रेडिको खेतान (2,738 रुपये), तिलकनगर इंडस्ट्रीज (457.75 रुपये) और यूनाइटेड स्पिरिट्स (1,417.90 रुपये) दिन के कारोबार में 7 प्रतिशत तक चढ़ गए। यूनाइटेड ब्रुअरीज (1,731 रुपये), एलाइड ब्लेंडर्स ऐंड डिस्टिलर्स (473.30 रुपये) और ग्लोबस स्पिरिट्स (884.30 रुपये) में 5-5 फीसदी तक की तेजी आई। इसकी तुलना में निफ्टी 50 सूचकांक 1.27 फीसदी गिरकर 24,450 पर बंद हुआ।

क्यों बढ़े शराब कंपनियों के शेयर?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अपना 17वां बजट पेश करते हुए एल्कोहल-इन-बेवरिज (एआईबी) के लिए उत्पाद शुल्क ढांचा पेश किया। अप्रैल 2026 से इन पर शराब की कुल मात्रा के बजाय उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा पर कर लगाया जाएगा। डेक्कन हेरल्ड ने खबर दी है कि बाजार को व्यवधान से बचने के लिए यह बदलाव अगले तीन से चार वर्षों में धीरे-धीरे किया जाएगा।

अल्कोहलिक बेवरिज क्षेत्र पर एमके का नजरिया

राज्य के बजट में कर बढ़ोतरी तेज वृद्धि की उम्मीदों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम रही है। यह तब है जब राज्य सरकार को समाज कल्याण योजनाओं के लिए धन की आवश्यकता है।

अब तक घोषित राज्यों के बजट के बीच उत्तर प्रदेश प्रगतिशील राज्य बना हुआ है। प्रदेश के बजट में किए गए नीतिगत बदलाव खपत को बढ़ावा देने और राज्य में अवसर विकसित करने के लिए हैं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने अल्कोहलिक बेवरेज क्षेत्र से संबंधित अपडेट में कहा कि अधिक पारदर्शिता के माध्यम से सभी कंपनियों के लिए यह फायदेमंद है लेकिन नियामकीय बदलावों से ज्यादा लाभ रेडिको खेतान को होगा।

2026-27 की आबकारी शुल्क नीति में 71,278 करोड़ रुपये का सर्वाधिक राजस्व लक्ष्य तय किया गया है जो मौजूदा लक्ष्य 60,000 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है।

उत्तर प्रदेश उत्पाद आबकारी नीति 2026-27 में बड़ा बदलाव किया गया है जो पारदर्शिता (पोर्टल के माध्यम से लेनदेन), प्रीमियमकरण (लेबल पंजीकरण शुल्क कम किया गया, जिससे प्रीमियम वेंड में घरेलू सुपर-प्रीमियम ब्रांडों की अनुमति है), निर्यात-आधारित वृद्धि (थोक एल्कोहल के साथ-साथ बोतलबंद उत्पादों के निर्यात के लिए कम शुल्क) का बढ़ावा देती है।

First Published : March 6, 2026 | 9:29 PM IST