स्मॉल और मिडकैप शेयरों ने बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में जंग छिड़ने के बाद हुए नुकसान की भरपाई कर ली है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 27 फरवरी के अपने स्तर से 6.2 फीसदी ऊपर निकल गया है जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 2.2 फीसदी बढ़ चुका है। इनकी तुलना में निफ्टी 50 इंडेक्स और बीएसई सेंसेक्स क्रमशः 4.7 फीसदी और 5.3 फीसदी नीचे हैं।
विश्लेषकों का अनुमान है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद स्मॉल और मिडकैप सेगमेंट में अच्छी बढ़त जारी रहेगी और आने वाले महीनों में वे लार्जकैप से बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी. चोकालिंगम ने कहा कि स्मॉल और मिडकैप शेयरों के अच्छा प्रदर्शन करने का एक कारण यह है कि 2025 में उन्होंने तुलनात्मक रूप से कमजोर प्रदर्शन किया था। इन दोनों सेगमेंट में मूल्यांकन अपेक्षाकृत आकर्षक हैं और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण फरवरी 2026 से इन शेयरों में गिरावट आई है।
उन्होंने कहा, एक और वजह प्राथमिक बाजार की सुस्ती है। प्राथमिक बाजार में निवेश के मौकों की कमी के कारण खुदरा निवेशकों का पैसा सेकंडरी बाजार के शेयरों, खासकर स्मॉल और मिडकैप सेगमेंट, की ओर गया। हम लगातार सलाह देते रहे हैं कि गिरावट आने पर खास तौर पर स्मॉल और मिडकैप शेयरों में निवेश करें।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और रुपये की कमजोरी का इन शेयरों पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है। इसलिए, हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में स्मॉल और मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।
नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों से पता चलता है कि जहां एक ओर विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने 27 फरवरी से 27 अप्रैल के बीच भारतीय शेयर बाजारों से करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये निकाले, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ बाजारों को सहारा दिया।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक और निदेशक यू.आर. भट्ट ने कहा, हमें उम्मीद नहीं है कि एफआईआई का पैसा जल्द ही जबरदस्त जोश के साथ भारत लौटेगा। उन्होंने कहा, उनके लिए भारत की तुलना में दूसरे बाजारों का सापेक्ष मूल्यांकन मायने रखता है और रुपया-डॉलर की विनिमय दर भी। जिन कंपनियों के शेयर तेल कीमतों के झटके को झेल सकते हैं, वे कम से कम मध्यम अवधि में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स सबसे ज्यादा फायदे में रहा। यह 27 फरवरी से 28 अप्रैल के बीच 10.7 फीसदी बढ़ा। इसके बाद निफ्टी मेटल इंडेक्स का स्थान रहा जिसमें 6.6 फीसदी की तेजी देखी गई। आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल और फार्मा इंडेक्स में 1 से 2 फीसदी के बीच बढ़त हुई है।
इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 27 फरवरी के स्तर से 11.8 फीसदी नीचे गिर गया। निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 8 फीसदी नीचे गिरे। इसके बाद निफ्टी आईटी (5.4 फीसदी नीचे) और निफ्टी ऑयल ऐंड गैस (4.7 फीसदी नीचे) का स्थान रहा।
वेलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा कि कमाई में सुधार के चलते अगले 12-18 महीनों तक स्मॉल-कैप की कहानी जारी रहेगी। उन्हें उम्मीद है कि अगले दो सालों में स्मॉल-कैप शेयर 20-25 फीसदी चक्रवृद्धि के हिसाब से रिटर्न देंगे।