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स्मार्ट ऑर्डर राउटिंग हिस्सेदारी बढ़कर 3.3% हुई, लेकिन कैश ट्रेडिंग में अभी भी सीमित उपयोग

स्मार्ट ऑर्डर राउटिंग (एसओआर) एक ऐसी सुविधा है, जो कीमत और लिक्विडिटी के आधार पर किसी सौदे को अपने-आप सबसे फायदेमंद जगह पर भेज देती है

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- April 23, 2026 | 10:40 PM IST

स्मार्ट ऑर्डर राउटिंग (एसओआर) एक ऐसी सुविधा है, जो कीमत और लिक्विडिटी के आधार पर किसी सौदे को अपने-आप सबसे फायदेमंद जगह पर भेज देती है। पिछले एक साल में यह सुविधा काफी लोकप्रिय हुई है। हालांकि इसे अपनाने वालों की कुल संख्या अभी भी कम है।

एनएसई मार्केट पल्स के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में नकदी सौदों के मूल्य में एसओआर की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 3.3 फीसदी हो गई, जो एक साल पहले 0.7 प्रतिशत थी।

बीएसई पर मार्च 2026 के अंत में यह आंकड़ा 2.94 फीसदी रहा जबकि मार्च 2025 में यह 1.72 फीसदी था। इसके विपरीत, एनएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार इक्विटी डेरिवेटिव में एसओआर का इस्तेमाल न के बराबर है और इसका टर्नओवर शून्य बना हुआ है।

ट्रेडिंग गतिविधियों में कोलोकेशन का दबदबा बना हुआ है। मार्च 2026 में कैश सेगमेंट में कुल ट्रेडेड वैल्यू में इसका हिस्सा करीब 44 फीसदी रहा। एक साल पहले यह 38.3 फीसदी था। मोबाइल ट्रेडिंग ने भी अपनी पकड़ मज़बूत की है और इस महीने के दौरान बढ़कर यह 20.1 फीसदी तक पहुंच गई। सालाना आधार पर कोलोकेशन का हिस्सा बढ़कर रिकॉर्ड 39.4 फीसदी तक पहुंच गया जबकि मोबाइल ट्रेडिंग 5 साल के उच्चतम स्तर 21.4 फीसदी पर पहुंच गई।

इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम आधारित) में कोलोकेशन का हिस्सा सालाना आधार पर 14 आधार अंक बढ़कर 53.4 फीसदी हो गया जबकि मोबाइल ट्रेडिंग में 334 आधार अंक की तेज बढ़ोतरी हुई और यह 27.3 फीसदी पर पहुंच गया। बाजार भागीदारों ने एसओआर के धीमेपन का कारण नियामक के कड़े सुरक्षा उपायों को बताया जिनके तहत ब्रोकर के राउटिंग एल्गोरिदम का पूरी तरह से ऑडिट जरूरी है ताकि यह पक्का किया जा सके कि वे बाजार में अस्थिरता पैदा न करें।

ब्रोकरों ने बताया कि हर ऐप्लिकेशन ट्रेड से पहले कई तरह की जोखिम जांच से गुजरता है, मॉक टेस्टिंग होती है और सिस्टम ऑडिट किया जाता है। इस कारण मंजूरी मिलने में ज्यादा समय लगता है।

जेएम फाइनैंशियल इंस्टिट्यूशनल सिक्योरिटीज में प्रबंध निदेशक और सीईओ (इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज) अंकुर जवेरी ने कहा, अगर एसओआर नाकाम रहता है तो ब्रोकरों को अपडेटेड मजबूती मानकों के मुताबिक पूरी तरह से काम करने वाला वैकल्पिक ट्रेडिंग तरीका दिखाना होगा। यह देखते हुए कि एसओआर कई एक्सचेंजों की ऑर्डर बुक को जोड़ता है, एक तकनीकी गड़बड़ी भी पूरे बाजार में फैल सकती है। इसलिए, सोच-समझकर बनाई गई नियामक की जोखिम से बचने की प्रक्रिया का मकसद सिस्टम को बचाना है। हमने पहले भी ऐसे दौर देखे हैं और यह भी अस्थायी बात है क्योंकि सिस्टम और मंजूरी में धीरे-धीरे तालमेल हो जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जहां कई ब्रोकरों को मंजूरी मिल गई है, वहीं कई अन्य अभी भी एक्सचेंजों से मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

First Published : April 23, 2026 | 10:25 PM IST