शेयर बाजार

बाजार में हाहाकार: तेल की कीमतों में उबाल से सेंसेक्स 1,471 अंक टूटा, निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ डूबे

आज सेंसेक्स 1,471 अंक यानी 1.9 फीसदी गिरावट के साथ 74,564 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488 अंक यानी 2.1 फीसदी गिरकर 23,151 पर बंद हुआ

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- March 13, 2026 | 10:48 PM IST

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और प​श्चिम ए​शिया संकट के गहराने की चिंता के बीच भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। बेंचमार्क सूचकांक लगभग 2 फीसदी गिर गए जिससे घरेलू शेयर बाजार के लिए यह एक सबसे उतार-चढ़ाव वाला सप्ताह रहा। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि कहीं पश्चिम एशिया का संघर्ष कई सप्ताह या महीनों तक न खिंच जाए।

यह बिकवाली एक दिन पहले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद हुई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.6 फीसदी बढ़कर 100.5 डॉलर प्रति बैरल हो गई जो 2020 के बाद उसकी एक दिन में सबसे बड़ी तेजी है।  तेल की कीमतें आज 100 डॉलर के आसपास बनी रहीं। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि वह संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखेंगे।

सेंसेक्स 1,471 अंक यानी 1.9 फीसदी गिरावट के साथ 74,564 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488 अंक यानी 2.1 फीसदी गिरकर 23,151 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 7 अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स में इस सप्ताह 5.5 फीसदी की गिरावट आई जो मई 2020 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। इसी प्रकार निफ्टी में भी 5.3 फीसदी की गिरावट आई जो जून 2022 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। इस साल अब तक बीएसई कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 34 लाख करोड़ रुपये घटकर 430 लाख करोड़ रुपये रह गया है। 

ईरान के रुख से चिंतित विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 10,717 करोड़ रुपये की बिकवाली की। घरेलू निवेशकों ने लगभग इतनी ही रकम की लिवाली की। मगर इससे गिरावट नहीं रुक पाई और निवेशकों को करीब 10.2 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा।

तेल की बढ़ती कीमतों और होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से भारत में महंगाई बढ़ने की चिंता भी सताने लगी है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

घरेलू ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने एक रिपोर्ट में कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है तो अगले 4 से 8 हफ्तों में तेल की कीमत 110-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इस रास्ते रोजाना लगभग 2 लाख बैरल तेल गुजरता है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है मगर विश्लेषकों का मानना है कि भूराजनीतिक तनाव कम होने पर बाजार फिर से संभल सकता है। 

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार जोआन गोह ने कहा, ‘भारत अभी बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है जिससे बजट घाटे पर असर पड़ सकता है। रुपया कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। मगर इससे भारत की दीर्घकालिक निवेश रणनीति नहीं बदलेगी।’

First Published : March 13, 2026 | 10:48 PM IST