शेयर बाजार

फिर टूटा शेयर बाजार, गिरावट के भंवर में सेंसेक्स; निवेशकों की ₹5.14 लाख करोड़ की संपत्ति डूबी

सेंसेक्स 1,342 अंक यानी 1.7 फीसदी गिरकर 76,864 पर बंद हुआ। यह 1 फरवरी के बाद उसकी सबसे बड़ी गिरावट है

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- March 11, 2026 | 9:59 PM IST

शेयर बाजारों में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। बेंचमार्क सेंसेक्स में केंद्रीय बजट के बाद सबसे तेज गिरावट आई। इसकी वजह ईरान से जुड़ी लड़ाई में कमी नहीं आने के संकेत रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस दावे के बावजूद कि युद्ध समाप्त होने के करीब है, तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं। सेंसेक्स 1,342 अंक यानी 1.7 फीसदी गिरकर 76,864 पर बंद हुआ। यह 1 फरवरी के बाद उसकी सबसे बड़ी गिरावट है। निफ्टी 395 अंक यानी 1.6 फीसदी गिरकर 23,867 पर टिका जो 9 मार्च के बाद उसमें सबसे तीखी गिरावट है।

जंग शुरू होने के बाद से सेंसेक्स में 5.4 फीसदी की गिरावट आई है जबकि निफ्टी 5.2 फीसदी टूटा है। अपने-अपने सर्वकालिक उच्चतम बंद स्तर से सेंसेक्स अब 10.5 फीसदी नीचे गिरकर गिरावट वाले जोन में पहुंच चुका है जबकि निफ्टी में गिरावट 9.3 फीसदी है। हाल के उच्चतम स्तर से 10 फीसदी की कमी को आमतौर पर गिरावट वाला जोन कहा जाता है, जो एक तकनीकी संकेतक है और जिसका इस्तेमाल बाजार के कारोबारी कमजोरी के दौर का संकेत देने के लिए करते हैं।

एक ही सत्र में शेयरों की भारी बिकवाली से निवेशकों की 5.14 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 442 लाख करोड़ रुपये (4.81 ट्रिलियन डॉलर) रह गया। युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार पूंजीकरण में 21.6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ चुकी है।

इस सप्ताह ट्रंप के इस दावे के बावजूद कि ईरान में सैन्य अभियान उनके पहले के चार से पांच सप्ताह के अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से खत्म होने जा रहा है और वह तेहरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं, ज़मीनी स्तर पर तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। न ही इस बात के कोई संकेत मिले हैं कि होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुजरने वाला जहाजी यातायात फिर से सामान्य हो गया है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 5वां हिस्सा गुजरता है।

बुधवार को आई खबरों के मुताबिक अमेरिकी-इजरायली सेनाओं के जोरदार हमलों के बावजूद ईरान ने इजरायल और पश्चिम एशिया के अन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और ब्रेंट क्रूड 90.7 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ऐसी खबरें भी आईं कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी 40 करोड़ बैरल तक का आपातकालीन भंडार जारी कर सकती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत में महंगाई का खतरा बढ़ जाता है और देश की आयातित तेल पर भारी निर्भरता को देखते हुए जीडीपी वृद्धि पर भी असर पड़ता है।

इलारा कैपिटल की उप अनुसंधान प्रमुख और अर्थशास्त्री गरिमा कपूर ने कहा, पश्चिम एशियाई संघर्ष कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं, जिससे एशिया का ऊर्जा संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान बढ़ रहा है। मार्च के मध्य के बाद भी होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक बाधा, प्रभावित उत्पादक कंपनियों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने में देरी और लगातार बनी अनिश्चितता भारत के बाह्य क्षेत्र पर दबाव डाल सकती है। इसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था और राजकोष पर भी पड़ सकता है।

बाजार के उतार-चढ़ाव का सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 11.4 फीसदी बढ़कर 21.06 पर पहुंच गया जिससे निवेशकों की घबराहट स्पष्ट रूप से दिखाई दी। बाजार की स्थिति कमजोर बनी रही और बीएसई पर 2,423 शेयरों में गिरावट जबकि 1,850 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स के तीन शेयरों को छोड़कर बाकी सभी शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। एचडीएफसी बैंक 1.8 फीसदी गिरा और उसने सूचकांक पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजित मिश्र ने कहा, निफ्टी एक बार फिर अपने पिछले निचले स्तर 23,700 की ओर बढ़ रहा है। इस स्तर से नीचे जाने पर गिरावट का अगला दौर शुरू हो सकता है, जो 23,500 और उसके बाद 23,200 तक जा सकता है। ऊपर की ओर 24,100-24,300 के दायरे में किसी भी रिकवरी को मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।

First Published : March 11, 2026 | 9:51 PM IST