शेयर बाजार

भू-राजनीतिक तनाव में राहत से शेयर बाजार में लगातार दूसरे हफ्ते तेजी, निफ्टी-सेंसेक्स 1.2% चढ़े

बाजार में आई तेजी ने भारत के कुल बाजार पूंजीकरण को वापस 5 लाख करोड़ डॉलर के निशान से ऊपर पहुंचा दिया है, जो निवेशकों के भरोसे में आए ज़बरदस्त उछाल को दिखाता है

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समी मोडक   
Last Updated- April 17, 2026 | 9:47 PM IST

भारतीय शेयर बाज़ार में शुक्रवार को लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त जारी रही क्योंकि भू-राजनीतिक चिंता में कमी आने से वैश्विक जोखिम की भावना को बढ़ावा मिला। निफ्टी 0.65 फीसदी यानी 157 अंक बढ़कर 24,354 पर बंद हुआ जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 505 अंक बढ़कर 78,494 पर टिका। पिछले हफ्ते 6 फीसदी की तेज बढ़त के बाद इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में करीब 1.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने प्रमुख तेल आयातक देश भारत में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा दिया। देसी बाजार में कामकाज की अवधि के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही, लेकिन ईरान द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम तक होर्मुज स्ट्रेट को वाणिज्यिक यातायात के लिए पूरी तरह से खोलने की घोषणा के बाद इसमें और गिरावट आई।

व्यापक बाजार ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। शुक्रवार को निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। महीने की शुरुआत से अब तक के आधार पर निफ्टी 50 इंडेक्स में 9.1 फीसदी की बढ़त हुई है जबकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में क्रमशः 13.8 फीसदी और 15.5 फीसदी का इजाफा हुआ है।

बाजार में आई तेजी ने भारत के कुल बाजार पूंजीकरण को वापस 5 लाख करोड़ डॉलर के निशान से ऊपर पहुंचा दिया है, जो निवेशकों के भरोसे में आए ज़बरदस्त उछाल को दिखाता है। 30 मार्च को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण घटकर 4.35 लाख करोड़ डॉलर (412 लाख करोड़ रुपये) रह गया था। अपने शिखर पर सितंबर 2024 में भारत का एमकैप 5.7 लाख करोड़ डॉलर था।

इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक और बिजनेस हेड अंकुर पुंज ने कहा, भले ही निवेशक शांति वार्ता के दूसरे दौर के फिर से शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन कच्चे तेल की घटती कीमतें बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए हुए हैं। अगर ये बातचीत कुछ सकारात्मक नतीजों में बदलती है, तो हम बाज़ार में बढ़त जारी रहते देखेंगे।

निफ्टी अभी भी अपने संघर्ष-पूर्व के स्तरों से करीब 4 फीसदी नीचे है जबकि व्यापक बाजारों ने अपने सभी नुकसानों की भरपाई कर ली है। हालांकि निफ्टी 50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तरों से करीब 7.5 फीसदी नीचे हैं जबकि निफ्टी मिडकैप 100 अपने उच्च स्तरों से करीब 3 फीसदी नीचे है।

डीएसपी म्युचुअल फंड के एक नोट में कहा गया है, स्मॉल और मिड-कैप के लिए ज्यादा सावधानी भरा नजरिया अपनाना ज़रूरी है। निवेश आवंटन ऐसे ऐक्टिव मैनेजरों के जरिये करवाया जाना चाहिए, जो मूल्यांकन और गुणवत्ता पर ध्यान देते हों और सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये किया जाए।

शुक्रवार को आईटी को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। इस हफ्ते निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में 4.6 फीसदी की बढ़त हुई, जिसका मुख्य कारण तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में हुई बढ़त थी। वहीं, वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमतों में मजबूती के चलते निफ्टी मेटल इंडेक्स 4.2 फीसदी ऊपर चढ़ा।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफआईआई) लगातार दूसरे दिन शुद्ध खरीदार रहे और शुक्रवार को उन्होंने 683 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को बाजार में हुई बढ़त में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और हिंदुस्तान यूनिलीवर का सबसे बड़ा योगदान रहा। तिमाही नतीजों के निराशाजनक रहने के बाद निफ्टी में विप्रो और एचडीएफसी लाइफ को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।

First Published : April 17, 2026 | 9:44 PM IST