अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे 20 फीसदी से बढ़ाकर 22-25 फीसदी करने की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है, जिससे चीनी शेयरों में तेजी आई है। पिछले 20 दिनों में चीनी कंपनियों के शेयर औसतन करीब 13 फीसदी बढ़ चुके हैं। एथेनॉल के ई-20 स्तर से वृद्धि के साथ चीनी निर्यात पर एक बार फिर प्रतिबंध लगाएं जाने की आशंका बढ़ गई है ताकि देश में चीनी की कीमत स्थिर बनी रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर चीनी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल रहा है। पिछले 20 दिनों में बीएसई शुगर सूचकांक करीब 13 फीसदी मजबूत हुआ है जबकि इस बीच सेंसेक्स 2.6 फीसदी कमजोर हुआ है। बीएसई में 17 मार्च से चीनी कंपनियों के शेयर दौड़ना शुरू हुए जो एथेनॉल मिश्रण की उम्मीदों के सहारे लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस बीच उत्तम शुगर मिल्स के शेयर 33 फीसदी, डालमिया भारत शुगर 29.5 फीसदी, मावना शुगर 29.4 फीसदी, द्वारका शुगर इंडस्ट्रीय 28.5 फीसदी, अवध शुगर एंड एनर्जी 24.6 फीसदी, धरमपुर 21.8 फीसदी, श्री रेणुका शुगर्स 19.5 फीसदी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग 16.7 फीसदी तक चढ़ गए।
सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में 20 फीसदी एथेनॉल मिला पेट्रोल (E20) बेचा जाएगा। इससे एथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल के अनुसार शेयरों की कीमतें मौजूदा वित्तीय स्थिति के बजाय उम्मीदों से बढ़ रही हैं। चीनी कंपनियों के शेयरों की कीमतों में मौजूदा तेजी की वजह यह उम्मीद है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का मौजूदा स्तर 20% से बढ़कर 22-25 फीसदी हो जाएगा। अगर सरकार मिश्रण दर बढ़ाने का फैसला करती है, तो शेयरों की कीमतों में यह तेजी और आगे बढ़ सकती है। अगर सरकार की तरफ से कोई नीतिगत हस्तक्षेप नहीं होता है, तो गन्ने की बढ़ती लागत का असर मिलों के मार्जिन पर पड़ेगा।
एथेनॉल मिश्रण दर में बढ़ोतरी किये जाने से चीनी निर्यात में प्रतिबंध लगाने की आशंका जताई जाने लगी है। फिच सॉल्यूशंस की एक इकाई, बीएमआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने E20 का दर्जा हासिल कर लिया है और अब ऐसा लगता है कि वह अपने एथेनॉल जनादेश का और विस्तार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, भारत के पास एथेनॉल विस्तार की और क्षमता है, लेकिन इसे साकार करने के लिए देश को चीनी निर्यात को और सीमित करना होगा, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव पड़ेगा और कीमतों में मामूली वृद्धि होगी।
भारत को 2022-23 के सीजन में चीनी की कमी का सामना करना पड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप निर्यात प्रतिबंधित हो गया था और 2023-24 में बंपर उत्पादन के बावजूद, किसी भी शिपमेंट की अनुमति नहीं दी गई थी। 2024-25 में, देश ने 10 लाख टन में से 9 लाख टन का निर्यात किया, जबकि वर्तमान सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में, सरकार ने अब तक 15.9 लाख टन की अनुमति दी है, जिसमें से मार्च के अंत तक 3.6 लाख टन से अधिक का निर्यात किया जा चुका है।
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भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू चीनी सीजन 2025-26 में भारत के चीनी उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। 31 मार्च, 2026 तक देश का कुल चीनी उत्पादन लगभग 9 फीसदी बढ़कर 272.31 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 248.78 लाख टन था।
उद्योग जगत की मानी जाए तो इस सीजन में चीनी उत्पादन 300 लाख टन से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है जबकि देश में सालाना खपत 280-290 लाख टन की है। इस तरह देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग के आसपास ही रहने वाली है। भारत का चीनी उत्पादन 2024-25 सीजन में 261 लाख टन तक गिर गया, जबकि 2023-24 में यह 320 लाख टन था।