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Tata Stock: टाटा का यह शेयर हाई से 57% टूटा, कभी निवेशकों का फेवरिट था; क्या अब करेगा कमबैक?

Tata Stock: ऑल टाइम हाई से शेयर करीब 57.5% गिर चुका है। शेयर 30 जून 2025 को बने 6,259 रुपये के 52 वीक हाई लेवल से भी करीब 44% नीचे आ चुका है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 16, 2026 | 12:09 PM IST

Trent Share Price: टाटा समूह की रिटेल कंपनी और फेमस जूडियो ब्रांड चलाने वाली कंपनी ट्रेंट का शेयर अब पहले जैसी चमक खो चुका है। कभी यह शेयर निवेशकों का पसंदीदा माना जाता था। अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2024 के बीच इसमें जबरदस्त तेजी आई थी और इस दौरान निवेशकों का पैसा लगभग 10 गुना तक बढ़ गया था। लेकिन इसके बाद से शेयर में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

ट्रेंट लिमिटेड के शेयर 11 अक्टूबर 2024 को 8,234.95 रुपये के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद इसमें तेज गिरावट आई और 13 मार्च 2026 को यह गिरकर 3,500 रुपये के 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। यानी अपने ऑल टाइम हाई से Trent Share करीब 57.5 प्रतिशत गिर चुका है। एसीई इक्विटीज़ के आंकड़ों के अनुसार, शेयर 30 जून 2025 को बने 6,259 रुपये के 52 वीक हाई लेवल से भी करीब 44 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

Trent Share Price: क्यों गिर रहा शेयर?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि Trent Share में गिरावट की वजह सिर्फ कंपनी से जुड़ी बातें नहीं हैं, बल्कि बाजार में चल रही गिरावट और शेयर के ज्यादा महंगे वैल्यू का सामान्य स्तर पर आना भी है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च प्रमुख संतोष मीना के अनुसार ट्रेंट के शेयर में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से कई सालों की तेजी के बाद शेयर के महंगे मूल्य में सुधार का नतीजा है, न कि कंपनी के कारोबार में किसी बड़ी कमजोरी का।

उन्होंने कहा कि जूडियो और वेस्टसाइड के तेज विस्तार और मजबूत ग्रोथ के कारण इस शेयर का मूल्य काफी ज्यादा हो गया था। लेकिन अब कुछ कारणों से निवेशकों का उत्साह थोड़ा कम हुआ है। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़कर 5,345 करोड़ रुपये रही, जो पहले के अनुमान से कम थी और ग्रोथ की रफ्तार धीमी दिखी।

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इसके अलावा एक ही इलाके में कई स्टोर खुलने से बिक्री पर असर, तेजी से विस्तार के कारण स्टोरों के बीच प्रतिस्पर्धा, और उपभोक्ता मांग में नरमी जैसे कारणों से शेयर के मूल्य में तेज गिरावट आई है। हालांकि गिरावट के बाद भी यह शेयर अभी लगभग 77 गुना के पी/ई अनुपात पर ट्रेड कर रहा है, जो पहले की तुलना में कम जरूर है लेकिन अभी भी ऊंचा माना जाता है।

कुछ एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि ट्रेंट में गिरावट का कारण सिर्फ कंपनी नहीं बल्कि पूरे बाजार में बिकवाली का दबाव भी है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीतिकार क्रांति बाथिनी के अनुसार जिन शेयरों में पिछले कुछ सालों में बहुत तेज तेजी आई थी, उनमें अब सामान्य सुधार देखा जा रहा है और ट्रेंट भी उसी का हिस्सा है।

क्या अब करेगा Trent Stock कमबैक?

पिछले करीब 17 महीनों में तेज गिरावट आने के बावजूद एनालिस्ट टाटा गरायो की कंपनी ट्रेंट के लंबे समय के भविष्य को लेकर अभी भी सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि भले ही अभी कुछ समय तक शेयर पर दबाव बना रहे। लेकिन लॉन्ग टर्म में यह फिर से निवेशकों के लिए एसेट बनाने वाला शेयर बन सकता है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च प्रमुख संतोष मीना के अनुसार शॉर्ट टर्म में कुछ चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इनमें कमजोर आर्थिक माहौल, सस्ते रिटेल सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम किए गए कमाई के अनुमान शामिल हैं। इससे शेयर में थोड़ी और गिरावट आ सकती है।

हालांकि उनका कहना है कि कंपनी की लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत है। भारत में संगठित रिटेल की हिस्सेदारी अभी कम है और ट्रेंट का प्रीमियम और वैल्यू दोनों तरह का बिजनेस मॉडल इसकी ताकत है। इसके अलावा कंपनी के मार्जिन भी मजबूत बने हुए हैं। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में विस्तार के साथ कंपनी का एबिटडा 28 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी लगातार नए स्टोर भी खोल रही है।

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मीना का मानना है कि अगले तीन से पांच साल में ट्रेंट का शेयर अपने पुराने हाई लेवल को फिर से छू सकता है और उससे ऊपर भी जा सकता है। इसके लिए कुछ अहम कारण हो सकते हैं, जैसे समान स्टोर बिक्री में फिर से लगभग 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा की वृद्धि, ऑपरेशंस से मिलने वाला बेहतर लाभ, उपभोक्ता मांग में सुधार और आने वाली तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर नतीजे। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्तर पर यह शेयर धैर्य रखने वाले लंबे समय के निवेशकों के लिए खरीद का अच्छा मौका हो सकता है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीतिकार क्रांति बाथिनी का भी कहना है कि लंबे समय के निवेशक गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, खासकर तब जब कंपनी को भारत की अनुकूल जनसंख्या संरचना का फायदा मिल रहा हो।

उनके अनुसार भारत की युवा आबादी, कारोबार का विस्तार और टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मौजूदगी के कारण कंपनी आगे भी बढ़ सकती है। मजबूत समूह से जुड़ी होने के कारण जरूरत पड़ने पर कंपनी पूंजी भी जुटा सकती है। इसलिए बाजार में इसे ऊंचा वैल्यूएशन मिलता है। बाथिनी के अनुसार लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसी गिरावटें अच्छा निवेश मौका देती हैं।

 

(डिस्क्लमेर: यहां शेयर में सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

First Published : March 16, 2026 | 11:57 AM IST