प्रतीकात्मक फोटो
Oil Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर ने वैश्विक बाजारों में नई जान फूंक दी है। तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है, शेयर बाजारों में खरीदारी बढ़ी है और निवेशकों की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी समझौते के अंतिम दस्तावेज और शर्तों का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर से पहले तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
सोमवार को कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें करीब 4 फीसदी गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का मानना है कि अगर तेल की कीमतें नीचे रहती हैं तो इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। सस्ता कच्चा तेल इन कंपनियों के मार्जिन को बेहतर बना सकता है। इसके अलावा एयरलाइन कंपनियां भी लाभ में रह सकती हैं क्योंकि उनके खर्च का बड़ा हिस्सा एविएशन फ्यूल पर निर्भर करता है। तेल सस्ता होने से एयरलाइंस की लागत घट सकती है और मुनाफा बढ़ सकता है।
INVasset PMS के फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और तेल की कीमतें नरम पड़ने से लॉजिस्टिक्स, सीमेंट, पेंट, ऑटो और कुछ वित्तीय कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है। उनके मुताबिक भारत के लिए इस संघर्ष की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ भू-राजनीतिक नहीं थी, बल्कि इसका असर तेल, रुपये, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा था। अब अगर तेल और माल ढुलाई की लागत कम होती है तो कई सेक्टरों को सीधी राहत मिलेगी।
बर्नस्टीन के अनुसार अगर युद्ध पूरी तरह खत्म होता है और ब्याज दरों को लेकर दबाव कम होता है, तो अमेरिका में खर्च बढ़ सकता है। इसका फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को मिल सकता है। वहीं हेल्थकेयर सेक्टर में भी तेजी देखने को मिल सकती है क्योंकि अमेरिका में दवा कीमतों को लेकर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद पश्चिम एशिया में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं। ऐसे में भारतीय इंफ्रा और इंजीनियरिंग कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बन सकती है। यही वजह है कि कई निवेशक अब L&T जैसी कंपनियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि भारत में खपत यानी कंजम्प्शन आगे भी मजबूत बनी रह सकती है। कम ब्याज दरें, टैक्स राहत और आय में सुधार इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक ऊर्जा, खनन, रक्षा, उर्वरक, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर आने वाले वर्षों में निवेश के नए बड़े क्षेत्र बन सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली की पसंदीदा कंपनियों में मारुति सुजुकी, ट्रेंट, लेंसकार्ट, वरुण बेवरेजेज, बजाज फाइनेंस, ICICI बैंक, L&T, अल्ट्राटेक सीमेंट, प्रेस्टीज एस्टेट्स और अदाणी पावर शामिल हैं।
ये भी पढ़ें… IPO की रेस में Razorpay की एंट्री! 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है वैल्यूएशन
हालांकि बाजार में उत्साह है, लेकिन सभी विशेषज्ञ पूरी तरह आक्रामक होने की सलाह नहीं दे रहे हैं। अल्फानिटी फिनटेक के सह-संस्थापक यू. आर. भट्ट का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल थोड़ा सावधान रहना चाहिए क्योंकि 19 जून को समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर अभी बाकी हैं। उनके मुताबिक समझौते की बारीक शर्तें सामने आने के बाद ही साफ तस्वीर बनेगी।
भट्ट का मानना है कि अगर तेल की कीमतें और गिरती हैं तो OMC और एयरलाइन शेयरों में तेजी जारी रह सकती है। वहीं पश्चिम एशिया में पुनर्निर्माण शुरू होने पर भारतीय इंफ्रा कंपनियां भी निवेशकों के रडार पर आ सकती हैं। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी ऐसा शेयर बताया है, जिसमें आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन की संभावना है।