Vedanta Demerger: वेदांता लिमिटेड के शेयर 1 मई की डिमर्जर रिकॉर्ड डेट से पहले निवेशकों के फोकस में बने हुए हैं। पिछले एक महीने में यह 12 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए हैं। जबकि एक हफ्ते में इनमें करीब 5 फीसदी की तेजी आई। कंपनी के शेयरों में यह हलचल 1 मई होने वाले डीमर्जर के चलते देखने को मिल रहा है। साथ ही डिविडेंड की उम्मीदें भी बड़ा ट्रिगर बनी हुई है। कंपनी 30 अप्रैल को अपने तिमाही नतीजों का एलान करेंगी। इस बीच, ब्रोकरेज फर्म नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च ने अपने विश्लेषण में बताया है कि डिमर्जर के बाद नई कंपनियों की लिस्टिंग प्रक्रिया 4 से 8 हफ्तों में पूरी हो सकती है।
नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, इस डिमर्जर में मौजूदा वेदांता लिमिटेड लिस्टेड इकाई के रूप में बनी रहेगी। जबकि इसके चार प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में डिवाइड किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद ग्रुप कुल पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंट जाएगा। इनमें वेदांता (पैरेंट), वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता स्टील एंड आयरन ओर शामिल हैं। यह पुनर्गठन कंपनी के स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगा और हर बिजनेस को स्वतंत्र रूप से वैल्यू करने का मौका देगा।
वेदांता के पूरे डिमर्जर में निवेशकों के लिए सबसे अहम तारीख 1 मई 2026 है। इसे कंपनी ने रिकॉर्ड डेट के रूप में तय किया है। इसका मतलब है कि इस दिन जिन निवेशकों के पास वेदांता के शेयर होंगे, वे नई बनने वाली सभी कंपनियों के शेयर पाने के एलिजिबल होंगे।
हालांकि, इसमें टाइमिंग का खास ध्यान रखना जरूरी है। T+1 सेटलमेंट सिस्टम लागू होने के कारण निवेशकों को एक्स-डेट (30 अप्रैल) से कम से कम एक दिन पहले शेयर खरीदना होगा। यानी 29 अप्रैल आखिरी दिन होगा जब तक खरीदारी करने पर डिमर्जर का लाभ मिलेगा। अगर कोई निवेशक एक्स-डेट या उसके बाद शेयर खरीदता है, तो उसे यह लाभ नहीं मिलेगा।
शेयर बाजार 1 मई को लेबर डे के अवसर पर बंद रहेगा। इसलिए 30 अप्रैल को स्पेशल प्री-ओपन सेशन (9:15–9:45 बजे) में शेयर की कीमत तय की जाएगी और इसके बाद 10 बजे से सामान्य ट्रेडिंग शुरू होगी। इसमें डिमर्जर के बाद की नई कीमत दिखाई देगी।
नुवामा के अनुसार, डीमर्जर से शेयरों की संख्या बढ़ेगी। लेकिन कुल वैल्यू अलग-अलग कंपनियों में बंट जाएगी। कीमत का एडजस्टमेंट डिमर्जर से पहले के क्लोजिंग प्राइस और एक्स-डिमर्जर ओपनिंग प्राइस के अंतर के आधार पर किया जाएगा।
नुवामा के अनुसार, लिस्टिंग टाइमलाइन को लेकर फिलहाल कोई तय समय सीमा नहीं है। हालांकि, पिछले उदाहरणों के आधार पर एक अनुमान लगाया जा सकता है। ब्रोकरेज ने उदाहरण देते हुए बताया कि टाटा मोटर्स सीवी लगभग 1 महीने में, आईटीसी होटल्स करीब 23 दिनों में, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज 33 दिनों में और सीमेंस एनर्जी करीब 75 दिनों में लिस्ट हुई थीं। इन उदाहरणों को देखते हुए वेदांता की नई कंपनियां मई के अंत से जुलाई की शुरुआत के बीच लिस्ट हो सकती हैं।
यह डिमर्जर केवल एक कॉरपोरेट कार्रवाई नहीं, बल्कि एक इंडेक्स इवेंट भी है। फिलहाल वेदांता का निफ्टी नेक्स्ट 50 में करीब 5.2 फीसदी वजन है। डिमर्जर के बाद यह वजन नई कंपनियों में बंट जाएगा।
नुवामा के अनुसार, वेदांता इंडेक्स में बनी रहेगी। जबकि बाकी नई इकाइयों को लिस्टिंग तक ‘डमी कॉन्स्टिट्यूएंट’ के रूप में दिखाया जाएगा। इस दौरान उनकी कीमत और मार्केट कैप स्थिर मानी जाएगी। लिस्टिंग के बाद इन्हें अस्थायी रूप से हटाकर दोबारा इंडेक्स में शामिल करने के लिए उनकी पात्रता का आकलन किया जाएगा।
हालांकि, इसमें एक जोखिम भी है। अगर नई कंपनियों की लिस्टिंग जून से आगे खिसकती है, तो वे सितंबर के इंडेक्स रीबैलेंसिंग चक्र से चूक सकती हैं। इससे पैसिव फंड्स से आने वाला निवेश भी टल सकता है। उदाहरण के तौर पर वेदांता एल्युमिनियम जैसी बड़ी इकाई बड़े इंडेक्स में जगह बना सकती है। जबकि पावर और ऑयल एंड गैस जैसी छोटी इकाइयां स्मॉलकैप इंडेक्स में शामिल हो सकती हैं।