इक्विटी बाजार गतिविधियों में धीमेपन के बीच यील्ड उत्पन्न करने वाली योजनाओं मसलन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट) रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) और नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (एनसीडी) में निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। शेयर बाजार की वापसी के बावजूद इस महीने ओम पावर ट्रांसमिशन के 150 करोड़ रुपये के निर्गम वाली केवल एक आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) सामने आई। यह मार्च 2025 के बाद से किसी महीने की सबसे कमजोर शुरुआत है। उस समय एक भी आईपीओ नहीं आया था।
इसके उलट हाल के हफ्तों में तयशुदा आय और क्वासी-यील्ड या हाइब्रिड साधनों (डेट और इक्विटी दोनों के गुण) ने स्थिर गति हासिल की है, जिनमें तीन एनसीडी इश्यू, दो इनविट लॉन्च और एक छोटे एवं मध्यम रीट्स का बाजार में आना शामिल है। यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि बागमाने प्राइम ऑफिस आरईआईटी का 3,400 करोड़ का आईपीओ अगले सप्ताह खुलने वाला है।
इस महीने की शुरुआत में सिटियस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का 1,105 करोड़ रुपये का आईपीओ 20 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ। मार्च में, एनएचएआई समर्थित राजमार्ग इनविट की 6,000 करोड़ रुपये की पेशकश करीब पांच गुना सब्सक्राइब हुई। बाजार प्रतिभागी इस अंतर को निवेशकों की प्राथमिकता में बदलाव से जोड़ते हैं, जो व्यापक वृहद आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच पूर्वानुमान योग्य नकदी प्रवाह की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
सब्सक्रिप्शन रुझान इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। इनविट की पेशकश की मांग मजबूत रही वहीं हाल के महीनों में कई आईपीओ पूरे सब्सक्रिप्शन जुटाने में जूझते रहे।
नुवामा वेल्थ के अध्यक्ष और प्रमुख राहुल जैन ने कहा कि इन साधनों का आकर्षण उनकी आय की दृश्यता को संभावित पूंजी वृद्धि के साथ जोड़ने की क्षमता में निहित है। उन्होंने कहा, ‘आरईआईटी और इनविट उन निवेशकों के लिए प्रभावी विकल्प बनकर उभरे हैं जो नियमित आय और पूंजी वृद्धि का मिश्रण चाहते हैं, जो पारंपरिक तयशुदा आय उत्पादों में मुश्किल से मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी का यह निर्देश कि इन साधनों को शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह का कम-से-कम 90 फीसदी वितरित करना होगा, आय की पूर्वानुमेयता को बढ़ाता है।
जैन ने कहा, ‘सूचीबद्ध आरईआईटी फिलहाल 7 से 9 फीसदी यील्ड प्रदान करते हैं, जबकि इनविट सामान्यतः 9 से 12 फीसदी देते हैं। जबसे रिजर्व बैंक ने रीपो दरें घटाईं, पारंपरिक तयशुदा आय रिटर्न दबाव में हैं। आरईआईटी और इनविट वास्तविक रिटर्न देकर इस अंतर को पाट रहे हैं, जो मुद्रास्फीति से आगे है।’ उन्होंने इनके पोर्टफोलियो विविधीकरण में योगदान को भी रेखांकित किया, क्योंकि इनका इक्विटी और ऋण से कम सह-संबंध है।
यह आकर्षण एनसीडी तक है। वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों के उच्च-गुणवत्ता वाले निर्गम उन निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं जो बैंक जमा या डेट म्युचुअल फंड से बेहतर रिटर्न चाहते हैं। निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले एनसीडी की यील्ड 9.5 फीसदी से 10.5 प्रतिशत के बीच है।
जूलियस बेयर इंडिया में वेल्थ मैनेजमेंट सॉल्यूशंस के प्रमुख अश्विन पाटनी ने कहा कि निवेशक इन साधनों को इक्विटी के विकल्प के बजाय तय आय के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने जोड़ा कि डेट म्युचुअल फंड कराधान में हाल के बदलावों ने विभिन्न उत्पादों के बीच समानता ला दी है, जिससे निवेशक पारंपरिक विकल्पों से परे खोज करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। पाटनी ने कहा, ‘इन साधनों का अब छह से सात वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसमें स्थिर वितरण शामिल है। उनकी अपेक्षाकृत कम अस्थिरता, साथ ही अंतर्निहित वास्तविक परिसंपत्तियों का सहज आकर्षण, इन्हें विशेष रूप से उन उच्च आय वाले निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है जो किराये की आय में विविधता चाहते हैं।’
विशेषज्ञों ने कहा कि नियामकीय बदलाव भविष्य के निर्गम को भी सहारा देंगे। सेबी द्वारा आरआईईटी को इक्विटी के रूप में वर्गीकृत करने से उनका आकर्षण बढ़ा है, विशेषकर घरेलू म्युचुअल फंडों के बीच, जो स्थिर आय के लिए इन साधनों में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।