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SpaceX ला रही है इतिहास का सबसे बड़ा IPO, भारतीय निवेशक कैसे कर पाएंगे निवेश?

स्पेसएक्स के आईपीओ में करीब 30 फीसदी इश्यू यानी लगभग 22.5 अरब डॉलर के शेयर रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखे गए हैं

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कुमार गौरव   
Last Updated- June 09, 2026 | 1:36 PM IST

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) वॉल स्ट्रीट के सबसे बड़े आईपीओ में से एक लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी 555.6 मिलियन शेयर 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर बेचकर करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है। अगर आईपीओ इसी कीमत पर आता है, तो स्पेसएक्स की कुल वैल्यू करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है। कंपनी के शेयर 12 जून से नैस्डैक पर ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं, जबकि अंतिम इश्यू प्राइस 11 जून को तय होने की उम्मीद है।

अमेरिका में निवेशकों का जबरदस्त उत्साह

स्पेसएक्स के आईपीओ को लेकर अमेरिका के खुदरा निवेशकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 30 फीसदी इश्यू यानी लगभग 22.5 अरब डॉलर के शेयर रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। फिडेलिटी, रॉबिनहुड, सोफाई, चार्ल्स श्वाब और ई-ट्रेड जैसे प्लेटफॉर्म अपने ग्राहकों को इस आईपीओ में निवेश का मौका दे सकते हैं। हालांकि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम निवेश की शर्तें अलग हैं।

क्या भारतीय निवेशक IPO में हिस्सा ले सकते हैं?

भारतीय निवेशकों के लिए सीधे आईपीओ में निवेश करना आसान नहीं होगा। अमेरिका की आईपीओ प्रक्रिया भारत की ASBA व्यवस्था से अलग है और विदेशी खुदरा निवेशकों को आमतौर पर सीधे आईपीओ में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिलती। इस वजह से भारतीय निवेशकों को शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ही स्पेसएक्स के शेयर खरीदने का मौका मिलेगा। SBI सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल के मुताबिक, भारतीय निवेशक लिस्टिंग के बाद सीधे या फंड्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से स्पेसएक्स में निवेश कर सकते हैं।

भारतीय निवेशकों के पास क्या विकल्प हैं?

स्पेसएक्स के शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद भारतीय निवेशक लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के जरिए शेयर खरीद सकते हैं। इसके लिए निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय निवेश प्लेटफॉर्म पर खाता खोलना होगा, विदेश में पैसा भेजना होगा और फिर नैस्डैक पर लिस्टेड शेयरों में निवेश करना होगा। इसके अलावा कुछ ग्लोबल फीडर फंड्स, विदेशी ETF और GIFT सिटी के जरिए भी अप्रत्यक्ष निवेश का विकल्प मिल सकता है। हालांकि फिलहाल उपलब्ध ज्यादातर फंड्स में स्पेसएक्स शामिल नहीं है, लेकिन लिस्टिंग के बाद स्थिति बदल सकती है।

स्पेसएक्स आखिर करती क्या है?

स्पेसएक्स का कारोबार मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में फैला हुआ है- अंतरिक्ष, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। कंपनी पुन: इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट बनाती है और उन्हें सरकारी तथा निजी ग्राहकों के लिए लॉन्च करती है। इसके अलावा स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी कंपनी का बड़ा कारोबार है।

निवेश से पहले इन जोखिमों को समझना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेसएक्स में निवेश के साथ कुछ बड़े जोखिम भी जुड़े हुए हैं। कंपनी की सफलता काफी हद तक एलन मस्क पर निर्भर है, जो टेस्ला समेत कई अन्य कंपनियां भी संभालते हैं। इसके अलावा कंपनी की आय का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी सरकारी एजेंसियों से आता है। स्टारलिंक को अलग-अलग देशों में नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

उदाहरण के तौर पर ब्राजील में कंपनी की कुछ स्थानीय संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। वहीं, स्पेसएक्स के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट स्टारशिप में भी जोखिम बना हुआ है। अब तक हुए 12 परीक्षणों में से तीन उड़ानें असफल रही हैं। इसके अलावा AI कारोबार में भारी निवेश की जरूरत पड़ती है, जिससे कंपनी पर खर्च का दबाव बना रह सकता है।

निवेशकों की नजर रहेगी लिस्टिंग पर

स्पेसएक्स का आईपीओ दुनिया के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। हालांकि भारतीय निवेशक इसमें सीधे हिस्सा नहीं ले पाएंगे, लेकिन लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों और उसके प्रदर्शन पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर रहेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : June 9, 2026 | 1:36 PM IST