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Closing Bell: जंग के डर से शेयर बाजार में बिकवाली! Sensex फिसला, Nifty 23,162 पर बंद

Stock Market Today: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में दबाव है, तेल महंगा हुआ और भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिले हैं।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 11, 2026 | 3:59 PM IST

Stock Market Update, June 11: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होने से प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

बीएसई सेंसेक्स 150.63 अंक यानी 0.20 फीसदी की गिरावट के साथ 73,832.55 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 53.35 अंक यानी 0.23 फीसदी फिसलकर 23,161.60 के स्तर पर बंद हुआ।

निफ्टी 50 में Infosys, Adani Ports & Special Economic Zone और Eternal सबसे बड़े नुकसान वाले शेयर रहे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली

व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.81 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.67 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। हालिया तेजी के बाद इन शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

आईटी, कंज्यूमर ड्यूरेबल और केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और निफ्टी केमिकल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया।

एक्सपर्ट की राय

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली, लेकिन यह रिकवरी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को कमजोर बनाए रखा।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग और फार्मा शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। मजबूत आय, भारतीय रिजर्व बैंक के अनुकूल कदमों और डिफेंसिव सेक्टरों की ओर निवेशकों के झुकाव ने इन क्षेत्रों को समर्थन दिया। वहीं, हालिया बेहतर प्रदर्शन के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली हुई, जो निकट अवधि में बाजार के समेकन का संकेत देती है।

आईटी शेयरों पर दबाव क्यों?

आईटी सेक्टर के शेयरों में कमजोरी रही। निवेशकों को चिंता है कि अमेरिका में महंगाई अपेक्षा से अधिक मजबूत रहने पर ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया टल सकती है। इससे वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त बनी रह सकती हैं, जिसका असर आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है।

साथ ही, दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक अब भी सख्त मौद्रिक नीति के संकेत दे रहे हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की ओर से संभावित दर वृद्धि की आशंकाओं ने भी वैश्विक तरलता और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

बाजार की धारणा पर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम का भी असर पड़ा। अमेरिका ने ईरान पर अतिरिक्त सैन्य हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के पास वॉशिंगटन के साथ समझौते के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा।

इस बीच, ईरान ने अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

First Published : June 11, 2026 | 8:14 AM IST