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Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Nifty50 और Sensex में मजबूत उछाल दर्ज किया गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष विराम (truce) की उम्मीदें रहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक बड़ा समझौता हो चुका है और केवल अंतिम दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर बाकी हैं।
इसके अलावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में भी कहा गया कि G7 बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने की संभावना बढ़ रही है। अगर यह डील होती है, तो इससे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुल सकता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के अनुसार, यह साल भारत के लिए कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण रहा है। शुरुआत में अर्थव्यवस्था ने अमेरिका के टैरिफ का असर झेला और बाद में ऊर्जा कीमतों से जुड़े झटकों का सामना करना पड़ा। हालांकि अब दोनों मोर्चों पर स्थिति कुछ हद तक बेहतर हुई है, लेकिन अर्थव्यवस्था अभी भी एक कठिन दौर से गुजर रही है।
वर्तमान समय में मुद्रास्फीति (inflation), कमजोर मानसून और वैश्विक व घरेलू ग्रोथ में सुस्ती जैसे कारक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए हुए हैं। इन सभी कारणों से बाजार और आर्थिक गतिविधियों में अनिश्चितता बनी हुई है।
निकट भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नई नीति दिशा मानी जा रही है, जो नए चेयरमैन के नेतृत्व में तय होगी। आगामी फेड मीटिंग पर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या फेड ग्रोथ और लगातार बनी हुई महंगाई के बीच संतुलन बना पाएगा या नहीं।
ऊंचे बॉन्ड यील्ड, मजबूत लेबर मार्केट और जिद्दी महंगाई (sticky inflation) को देखते हुए फेड के पास आक्रामक रेट कट की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
इन सभी परिस्थितियों के बीच भारतीय इक्विटी बाजार लंबे कंसोलिडेशन फेज के अंतिम चरण में दिखाई दे रहे हैं। मजबूत घरेलू लिक्विडिटी बाजार को वैश्विक झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि धीरे-धीरे इक्विटी का स्वामित्व कमजोर वैश्विक निवेशकों से मजबूत घरेलू निवेशकों की ओर शिफ्ट हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली में कमी आती है या फेड की नीति को लेकर स्पष्टता मिलती है, तो घरेलू निवेशकों की बड़ी पूंजी बाजार में सक्रिय हो सकती है। इससे बाजार में ब्रॉड-बेस्ड ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है।
Nifty50 इंडेक्स में शriram Finance, Bajaj Finance और Larsen & Toubro सबसे बड़े लाभ में रहे और इन शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
बाजार के व्यापक दायरे में भी मजबूती रही।
सेक्टोरल इंडेक्स में भी अच्छी तेजी रही।