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Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दूसरे हिस्से में तेज उछाल देखा गया, क्योंकि ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतों में गिरावट आई। यह गिरावट उन रिपोर्ट्स के बाद आई, जिनमें संकेत दिया गया कि अमेरिका और ईरान जल्द ही किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं।
30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 77,424.36 अंक पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान इंडेक्स ने 78,022.78 के हाई और 76,773.25 के लो रेंज में ट्रेड किया। अंत में सेंसेक्स 940.73 अंक यानी 1.22% उछलकर 77,958.52 पर बंद हुआ।
इसी तरह, 50 शेयरों वाला निफ्टी-50 24,171.00 अंक पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान इंडेक्स ने 24,356.50 के हाई और 23,997.90 के लो रेंज में ट्रेड किया। अंत में निफ्टी-50 298.15 अंक यानी 1.24% चढ़कर 24,330.95 पर बंद हुआ।
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ग्लोबल मार्केट में पॉजिटिव रुझान ने घरेलू शेयर बाजार की तेजी को सहारा दिया। सेंसेक्स के 30 शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक टॉप-5 गेनर्स रहे। इनमें 3% से 7% तक की तेजी देखी गई। इसके अलावा, इटरनल, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, ICICI बैंक, मारुति, टाटा स्टील, सन फार्मा, एयरटेल, कोटक बैंक, अदाणई पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, BEL और TCS भी लाभ में रहे।
वहीं, दूसरी तरफ रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, पावर ग्रिड, एनटीपीसी और HCL टेक टॉप-5 लूजर्स रहे। इनमें 0.97% से 1.80% तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा, इंफोसिस, HUL, टाइटन और ITC के शेयर भी नुकसान में रहे।
निफ्टी50 इंडेक्स में इंटरग्लोब एविएशन, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और श्रीराम फाइनेंस सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयर रहे।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 1.76% और 1.93% की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी बैंक और निफ्टी रियल्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा, “घरेलू बाजारों में “रिस्क-ऑन” सेंटिमेंट के चलते तेजी देखी गई। यह तेजी अमेरिका–ईरान के बीच तनाव कम होने और चीन की कूटनीतिक सक्रियता से आई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने में मदद मिली। हालांकि यह ट्रेंड अभी भी खबरों पर निर्भर बना हुआ है। वैश्विक संकेतों को मजबूत एआई-आधारित टेक कंपनियों के बेहतर नतीजों और बड़े फंड जुटाने से और समर्थन मिला, जबकि येन की कमजोरी के कारण डॉलर में आई गिरावट ने उभरते बाजारों (EM) में निवेश को बढ़ावा दिया।”
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का मई वायदा अनुबंध 6.94% गिरकर 102.24 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
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नायर ने कहा कि घरेलू स्तर पर अनुकूल राजनीतिक संकेत, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और ECLGS 5.0 की मंजूरी खासकर MSME सेक्टर के लिए सहायक बनी हुई है। हालांकि, फाइनेंस, फार्मा, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में आई तेजी का एक हिस्सा शॉर्ट कवरिंग और टैक्टिकल खरीदारी के कारण भी रहा। इनपुट लागत का दबाव और विदेशी मुद्रा जोखिम अभी भी मौजूद हैं। इसलिए निवेश के लिए चुनिंदा (सेलेक्टिव) रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।