Stock Market Closing Bell, 9 April Thursday 2026: एशियाई बाजारों में कमजोर रुख के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार (9 अप्रैल) को गिरावट में बंद हुए। एक दिन पहले सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान और अमेरिका में तनाव फिर बढ़ने की खबरों से बाजार में बिकवाली देखी गई। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में मुनाफावसूली का भी असर दिखा। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों में गिरावट ने भी बाजार को नीचे खींचा। इससे पहले बुधवार को बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी -50 और सेंसेक्स ईरान-अमेरिका में युद्धविराम की घोषणा से लगभग 4 प्रतिशत चढ़कर बंद हुए थे।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) गिरावट के साथ 77,319.33 अंक पर खुला। खुलने के बाद थोड़ी रिकवरी देखी गई लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ गई। कारोबार के दौरान यह 76,347 अंक तक गिर गया था। अंत में यह 931.25 अंक या 1.20 फीसदी की गिरावट लेकर 76,631.65 पर बंद हुआ।
इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी कमजोर शुरुआत के साथ 23,909 अंक पर खुला। बुधवार को यह 23,997 पर बंद हुआ था। वहीं, कारोबार के दौरान यह 23,682 अंक तक गिर गया और अंत में 222.25 अंक या 0.93 फीसदी गिरकर 23,775 पर बंद हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में रिसर्च विनोद नायर ने कहा, ”युद्धविराम से बनी सकारात्मकता कम हो गई। अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ गया और होरमुज जलडमरूमध्य पर जारी प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर ऊपर चली गईं। इससे भारत में महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली, 10 साल के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी ने निकट अवधि में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कम किया। पिछले सत्र की तेज तेजी के बाद लगातार एफआईआई बिकवाली के बीच वित्तीय शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि व्यापक बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहे।”
उन्होंने कहा, ”वैश्विक स्तर पर फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की ताजा बैठक के मिनट्स में सख्त रुख दिखा, जिसमें दरों में बढ़ोतरी के संकेत दिए गए। इसके साथ ही भू-राजनीतिक कारणों से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।”
एक्सपर्ट ने कहा, ”अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2027 के लिए कमाई के अनुमान में कटौती फिर से देखने को मिल सकती है। हालांकि, हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन अब भी आकर्षक बने हुए हैं और अगर भू-राजनीतिक हालात में सुधार होता है, तो मध्यम अवधि में बाजार का भरोसा तेजी से लौट सकता है।”
सेंसेक्स की कंपनियों में से, इंडिगो, एलएंडटी, इटरनल, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रही। दूसरी तरफ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, टीसीएस, एचसीएल टेक, टाटा स्टील और टेक महिंद्रा बढ़त में रहे।
सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई, इसके बाद निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में बढ़त रही। वहीं ब्रोडर मार्केट ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स क्रमशः 0.32 प्रतिशत और 0.17 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि वह बार-बार समझौतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान पर लगातार हमले और ईरान की सीमा में ड्रोन की घुसपैठ इसी का उदाहरण है।
एशियाई क्षेत्र के ज्यादातर बाजारों में गुरुवार को गिरावट देखी गई। अमेरिका-ईरान तनाव फिर से बढ़ने की खबरों से निवेशकों की चिंता बढ़ गई। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी क्रमशः 0.48 प्रतिशत और 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिका के शेयर फ्यूचर्स बाजार में गिरावट देखी गई। ईरान द्वारा युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया। एसएंडपी 500 और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर्स क्रमशः 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
वहीं, पिछले कारोबारी सेशन में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और एसएंडपी 500 क्रमशः 2.85 प्रतिशत और 2.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए थे। नैस्डैक कंपोजिट 2.80 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
उधर, कच्चा तेल ब्रेंट अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में 2.9 प्रतिशत बढ़कर 97.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सोना और चांदी के दाम में गिरावट रही। सोना 0.66 प्रतिशत और चांदी 2.02 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रही थी।