बीएसई स्मॉल और मिडकैप इंडेक्स 12 वर्षों में अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त के लिए तैयार हैं। अप्रैल 2026 में (बुधवार तक) बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 20.1 फीसदी चढ़ा जबकि बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 14.8 फीसदी की उछाल आई। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स में 7.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
बीएसई के आंकड़ों से पता चलता है कि इससे पहले मई 2014 में बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 20.4 फीसदी और मिडकैप इंडेक्स 15.6 फीसदी चढ़ा था। उस समय बेंचमार्क सेंसेक्स में 8 फीसदी की वृद्धि हुई थी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार गौरांग शाह के अनुसार हालिया तेजी के कई कारण हैं, जिनमें मार्च 2026 तिमाही की स्थिर कमाई की उम्मीद और प्राथमिक बाजारों में निवेश के अवसरों की कमी के बीच खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी शामिल है।
उन्होंने कहा, इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप के लिए 2025 अच्छा नहीं रहा। इसलिए कई शेयरों के मूल्यांकन काफी आकर्षक थे। मुझे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इसी वजह से ये दोनों सेगमेंट भी अस्थिर रहेंगे। ऐसे में शेयरों का सही चुनाव ही सबसे अहम होगा। बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स के 1,262 शेयरों में से आधे से ज्यादा यानी 734 शेयरों ने अप्रैल में 20 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न देकर बेहतर प्रदर्शन किया। इनमें से 84 शेयरों में करीब 50 फीसदी की तेजी आई और 474 शेयरों में 25 से 50 फीसदी के बीच बढ़त दर्ज की गई।
अल्पावधि के लिहाज से विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी रहती हैं और होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, तब तक पूरे बाजार में कमजोरी बनी रहेगी। तकनीकी नजरिये से विश्लेषकों ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर समर्थन का अहम स्तर बना हुआ है और अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो बाजार 23,600–23,400 के स्तरों की ओर तेजी से नीचे जा सकता है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदि आर ने कहा, बाजार की स्थिरता और आगे कमज़ोरी रोकने के लिए जरूरी है कि बाजार लगातार 24,000 के स्तर से ऊपर बना रहे। मोमेंटम इंडिकेटर्स कमजोर पड़ रहे हैं और रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडिकेटर (आरएसआई) 50 से नीचे खिसक गया है, जो मौजूदा रुझानों में दम न होने का संकेत देता है।
तेल की कीमतें और रुपया अहम
जानकारों के मुताबिक बाजारों की आगे की राह एक अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जो युद्ध से पहले के स्तरों से करीब 79 फीसदी ज्यादा हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुक जाने से होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने पर संदेह है।
इलारा सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख बिनो पातिरपरम्पिल ने कहा, बाजारों को उम्मीद है कि तेल की कीमतें करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही बनी रहेंगी और मुझे नहीं लगता कि बाजार मौजूदा स्तरों पर इस संभावना को पूरी तरह से समाहित कर रहे हैं। निफ्टी अगले कुछ महीनों तक 22,000 से 25,000 के दायरे में ही रहेगा।
कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि रुपया इस समय की हर दूसरी एशियाई मुद्रा की तरह होर्मुज पर एक हाई-बीटा प्ले है। जब तक यह यह जलमार्ग फिर से नहीं खुल जाता, तब तक रुपये पर दबाव रहने की संभावना है। नजर रखने वाला अगला महत्वपूर्ण स्तर 96 है और इससे ऊपर लगातार बने रहने से 97 की राह खुल जाएगी। यह ऐसा स्तर है जो आ भी सकता है, बशर्ते ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहे और होर्मुज की स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाए।
कोटक सिक्योरिटीज़ में कमोडिटी और करेंसी शोध प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा, दूसरी तरफ 94.80 अब समर्थन का अहम जोन है। 94.50 और 94.80 के बीच किसी भी स्तर पर उन आयातकों की जोरदार डॉलर खरीदारी देखने को मिल सकती है, जो अभी तक इंतजार कर रहे थे। 94.50 के स्तर से संभलने के लिए तेल की कीमतों में भारी गिरावट की जरूरत होगी।