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IOC, BPCL, HPCL: कच्चे तेल के 100 डॉलर पार पहुंचने से OMC कंपनियों पर दबाव, UBS ने घटाई रेटिंग

कच्चा तेल 100 डॉलर पार होने से तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव; पेट्रोल-डीजल कीमतों में बदलाव की सीमित गुंजाइश

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- March 09, 2026 | 11:13 AM IST

OMC Stocks: पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) ने भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर अपनी राय दी है। यूबीएस ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ कर दी है, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को ‘सेल’ की रेटिंग दी है।

यूबीएस के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में हालिया तेजी 2022 के तेल बाजार संकट जैसी स्थिति की याद दिलाती है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय सरकारी तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ना नकारात्मक असर डाल सकता है, क्योंकि भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव की गुंजाइश सीमित रहती है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी भी दबाव बढ़ा रही है। मौजूदा समय में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 92 के स्तर पर है, जबकि 2022 में यह लगभग 79 था।

मुनाफे के अनुमान में कटौती

यूबीएस ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए भारतीय तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन के अनुमान में 43–45% और 22–26% तक की कटौती की है। हालांकि इसी अवधि के लिए ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) का अनुमान 30–48% और 21–39% तक बढ़ाया गया है।

ब्रोकरेज के मुताबिक अगर कंपनियों का मुनाफा मार्केटिंग से घटकर रिफाइनिंग की ओर जाता है तो इसका फायदा कंपनियों को कम मिलेगा, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन मार्केटिंग से आता है। इसी वजह से यूबीएस ने IOC, BPCL और HPCL के वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित शुद्ध लाभ (PAT) में क्रमशः 19%, 15% और 46% तक की कटौती की है।

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OMC Stocks: शेयर बाजार में गिरावट

ब्रोकरेज की इस रिपोर्ट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। बीएसई ऑयल एंड गैस इंडेक्स इंट्राडे कारोबार में लगभग 3% तक गिर गया। वहीं HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान सेंसेक्स भी लगभग 2.8% नीचे कारोबार कर रहा था।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 40 महीने बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। अप्रैल 2026 के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में इसकी कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो सोमवार के कारोबार में 25% से ज्यादा की बढ़त दर्शाती है।

पिछले एक महीने में ही ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 68 डॉलर से बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, यानी करीब 71% की तेजी।

तेल कीमत का आगे क्या अनुमान

यूबीएस की ग्लोबल ऑयल टीम ने निकट अवधि के लिए तेल कीमत के अनुमान भी बढ़ाए हैं। ब्रोकरेज ने 2026 की पहली तिमाही के लिए औसत कीमत लगभग 71 डॉलर प्रति बैरल और पूरे वर्ष के लिए करीब 72 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया है।

ब्रोकरेज के अनुसार अगर तेल सप्लाई में बाधा कुछ हफ्तों तक जारी रहती है तो बाजार में जोखिम प्रीमियम बना रह सकता है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है या ऊर्जा ढांचे पर हमले होते हैं तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर से ऊपर और संभवतः 100 डॉलर से भी ऊपर जा सकता है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर

भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें मई 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक तेल कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। यूबीएस का मानना है कि अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं या उत्पाद शुल्क में कटौती की जाती है तो उसका असर ज्यादा समय तक नहीं रहेगा।

हालांकि हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर-रुपया दर 92 रहती है तो तेल कंपनियों का संयुक्त मार्जिन करीब 4–5 रुपये प्रति लीटर रह सकता है, जबकि यह वित्त वर्ष 2025 में 13–14 रुपये प्रति लीटर था।

यूबीएस का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 5 डॉलर प्रति बैरल और बढ़ती है तो डीजल और पेट्रोल के मार्केटिंग मार्जिन में लगभग 2.9 रुपये प्रति लीटर की कमी आ सकती है। इससे IOC के मुनाफे में 153 अरब रुपये, BPCL में 98 अरब रुपये और HPCL में 88 अरब रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है।

OMC Stocks: घटाए गए टारगेट प्राइस

कमाई में अनिश्चितता को देखते हुए यूबीएस ने इन कंपनियों के टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं।

  • IOC का टारगेट प्राइस 190 रुपये से घटाकर 175 रुपये किया गया है।
  • BPCL का टारगेट प्राइस 425 रुपये से घटाकर 365 रुपये कर दिया गया है।
  • HPCL का टारगेट प्राइस 540 रुपये से घटाकर 340 रुपये कर दिया गया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि तेल कीमतों में बढ़ोतरी और मार्जिन पर दबाव के कारण आने वाले समय में इन कंपनियों की कमाई पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : March 9, 2026 | 11:02 AM IST