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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात में पहले ही 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने यह जानकारी दी है।
जीजेईपीसी में कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस महीने हमारे कुल निर्यात को कम से कम 20 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। अगर यही हालात बने रहे तो आने वाले तीन महीने में हमें 1.2 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है।’ उन्होंने बताया कि, ‘कुल मिलाकर लगभग 2 अरब डॉलर का झटका लग सकता था, लेकिन चीन और हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों से इसकी कुछ भरपाई हो सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘हमने अमेरिकी शुल्कों के दबाव से बचाव किया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का बाजार पकड़ा। हमारे कुल निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत दुबई पहुंचा, जहां से वह खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों में गया। हालांकि अमेरिकी शुल्कों की स्थिति कुछ नरम पड़ी है, लेकिन पश्चिम एशिया के रूप में हम जो विविधता लाए थे, वह अब कमजोर पड़ गई है।
यूएई और जीसीसी को किया जाने वाला कुल निर्यात 8.3 अरब डॉलर का है। यूएई और विशेष रूप से दुबई इस क्षेत्र के प्रमुख आपूर्ति केंद्र है। उसने कच्चे और तैयार हीरों के व्यापार केंद्र के रूप में बेल्जियम का स्थान ले लिया है। इसके अतिरिक्त भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के कारण देश में लगभग 200 टन सोने के आयात को भी नुकसान होगा।
परिषद के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार फरवरी में भारतीय रत्न और आभूषण का निर्यात सालाना आधार पर 3.86 प्रतिशत बढ़कर 2.68 अरब डॉलर हो गया। हालांकि अप्रैल 2025 से इस साल फरवरी तक निर्यात 25.93 अरब डॉलर के स्तर पर कमोबेश स्थिर रहा, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 25.92 अरब डॉलर था।