Vedanta Demerger: अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांत लिमिटेड का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा डिमर्जर अब आगे बढ़ चुका है। कंपनी अब पांच अलग-अलग इकाइयों में बंटने जा रही है, जिसमें चार नई कंपनियां बनाई जाएंगी। 1 मई 2026 को इसकी रिकॉर्ड डेट थी, हालांकि उस दिन महाराष्ट्र दिवस के कारण शेयर बाजार बंद था।
दरअसल, वेदांत ने पहली बार सितंबर 2023 में डिमर्जर का प्लान पेश किया था। उस समय कंपनी अपने अलग-अलग बिजनेस जैसे एल्यूमिनियम, जिंक, ऑयल एंड गैस, पावर और स्टील को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बदलना चाहती थी। शुरुआत में यह योजना 6 कंपनियों की थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 5 कर दिया गया, ताकि हर बिजनेस पर ज्यादा साफ फोकस किया जा सके।
इस योजना के तहत वेदांत अपने चार बड़े बिजनेस को अलग कंपनियों में बांटेगी। इनमें वेदांत एल्यूमिनियम मेटल, वेदांत पावर, वेदांत ऑयल एंड गैस और वेदांत आयरन एंड स्टील शामिल हैं। सबसे अहम बात यह है कि वेदांत के मौजूदा शेयरधारकों को हर एक शेयर के बदले इन चारों नई कंपनियों का एक-एक शेयर मिलेगा।
वहीं, जो पैरेंट कंपनी बचेगी, उसमें हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी, इंटरनेशनल जिंक, कॉपर और फेरो क्रोम जैसे बिजनेस बने रहेंगे।
इस डिमर्जर का मकसद हर बिजनेस को अलग पहचान देना है, ताकि निवेशक किसी एक सेक्टर पर फोकस करके निवेश कर सकें। इससे कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और पूंजी का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
अनिल अग्रवाल ने दिसंबर 2025 में कहा था कि वेदांत एक बड़े बरगद के पेड़ की तरह है, जिसमें हर बिजनेस अपने आप में बड़ा बनने की क्षमता रखता है। उनका विजन है कि हर नई कंपनी भविष्य में वेदांत जितनी बड़ी बन सकती है और इससे निवेशकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
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मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, इस डिमर्जर से अलग-अलग बिजनेस की असली वैल्यू सामने आएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों को बेहतर वैल्यू मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जिंक, कॉपर और एल्यूमिनियम जैसे बिजनेस कंपनी की बड़ी ताकत हैं, क्योंकि इनकी लागत कम है और इनका वैश्विक स्तर पर मजबूत नेटवर्क है। वहीं, ऑयल एंड गैस बिजनेस भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से अहम है, हालांकि यह कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करता है।
लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कंपनी पर कर्ज का दबाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम बने हुए हैं। डिमर्जर के बाद डिविडेंड को लेकर भी कुछ बदलाव हो सकते हैं। कुल मिलाकर, उनके मुताबिक लंबे समय के लिए तस्वीर सकारात्मक है, लेकिन शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने इस स्टॉक पर होल्ड की सलाह दी है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि डिमर्जर के बाद सभी कंपनियों की कुल वैल्यू करीब 820 रुपये प्रति शेयर हो सकती है। उनका कहना है कि निवेशकों को शेयर होल्ड करके रखना चाहिए, क्योंकि सभी कंपनियों की लिस्टिंग के बाद उन्हें फायदा मिल सकता है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, वेदांत एल्यूमिनियम मेटल सबसे आकर्षक बिजनेस हो सकता है, जिसकी लिस्टिंग वैल्यू 400 रुपये प्रति शेयर से ज्यादा हो सकती है। इसके पीछे मजबूत कमाई, वैश्विक मांग और कंपनी की विस्तार योजनाएं कारण हैं।
वेदांत ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को वेदांत एल्यूमिनियम मेटल को ट्रांसफर करने को मंजूरी दी है। यह यूनिट वित्त वर्ष 2025 में करीब 15909 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लाई थी, जो कंपनी के कुल कारोबार का करीब 10 प्रतिशत है। यह ट्रांसफर 30 अप्रैल 2026 तक पूरा होने की उम्मीद थी और इसमें कुछ डिबेंचर भी शामिल थे।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने कहा है कि मेटल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक हालात और नई परियोजनाओं में देरी जैसे जोखिम बने रहेंगे, जो कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
बाजार की उम्मीद है कि रिकॉर्ड डेट के 1 से 2 महीने के अंदर नई कंपनियों की लिस्टिंग हो सकती है, हालांकि यह मंजूरी पर निर्भर करेगा।
रवि सिंह के मुताबिक, डिमर्जर के बाद शेयर की कीमत में जो गिरावट दिखती है, वह ज्यादातर तकनीकी कारणों से होती है, क्योंकि शेयर का भाव नई कंपनियों की वैल्यू को जोड़कर एडजस्ट होता है, न कि कंपनी के पैरेंट प्रदर्शन में किसी कमजोरी की वजह से।