NBFC Stocks में इस साल आई गिरावट अब सिर्फ एक सामान्य करेक्शन नहीं लग रही। ब्रोकरेज फर्म एमके की ताजा रिपोर्ट इशारा देती है कि कहानी कहीं ज्यादा गहरी है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद इस सेक्टर पर दबाव और तेज हो गया है, और निवेशकों की बेचैनी साफ दिख रही है।
एमके के मुताबिक, बाजार में डर का माहौल है। एक तरफ युद्ध से ईंधन और गैस की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है, दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऊपर से अल-नीनो का साया, जो मानसून को कमजोर कर सकता है। इन सबके बीच निवेशकों को लग रहा है कि ब्याज दरों में कटौती अब रुक सकती है। यानी कमाई का इंजन धीमा पड़ सकता है।
लेकिन तस्वीर इतनी सीधी भी नहीं है।
एमके की रिपोर्ट एक दिलचस्प सच सामने लाती है। तमाम डर और आशंकाओं के बीच, जमीनी हालात अभी पूरी तरह सामान्य हैं। कर्ज की मांग बनी हुई है। वसूली मजबूत है। कमर्शियल वाहन से लेकर पर्सनल लोन और माइक्रोफाइनेंस तक, कहीं भी दरार नहीं दिख रही। यानी बाहर तूफान की आशंका है, लेकिन अंदर अभी स्थिरता है।
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एमके साफ कहता है कि असली खतरा अभी सामने आना बाकी है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल और गैस महंगे होंगे। इसका असर सीधे खाद और खेती पर पड़ेगा। और अगर इसी के साथ अल-नीनो ने मानसून को कमजोर कर दिया, तो तस्वीर तेजी से बदल सकती है। गांवों की आय घटेगी, छोटे कारोबार दबाव में आएंगे और कर्ज चुकाने की क्षमता पर असर पड़ेगा। यही वह बिंदु होगा जहां एनबीएफसी सेक्टर की असली परीक्षा होगी।
एमके को भरोसा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो सरकार और रिजर्व बैंक पीछे नहीं हटेंगे। कोरोना काल की तरह राहत और नियमों में ढील दी जा सकती है। साथ ही, इस बार एनबीएफसी कंपनियां पहले से ज्यादा मजबूत हैं। उनकी बैलेंस शीट बेहतर है, जिससे वे झटकों को सहने की स्थिति में हैं।
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डर और अनिश्चितता के इस माहौल में एक मौका भी छिपा है। एमके के मुताबिक, हाल की गिरावट के बाद एनबीएफसी शेयर सस्ते हो गए हैं। फिलहाल 2026 के अनुमान सुरक्षित हैं, लेकिन 2027 को लेकर धुंध छाई हुई है। ऐसे में जोखिम और मुनाफे के संतुलन को देखते हुए एमके को आदित्य बिड़ला कैपिटल, श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस और एलएंडटी फाइनेंस में बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं।