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TCS 9% टूटा, LTIMindtree और Coforge भी फिसले; IT शेयरों में क्या हुआ? एक्सपर्ट ने बताई आगे की राह

AI और अमेरिकी दर कटौती की उम्मीदों पर आई तेजी थमी, Nifty IT 5% से ज्यादा टूटा

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 03, 2026 | 12:29 PM IST

पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार की अगुवाई करने वाले आईटी शेयर बुधवार को अचानक भारी बिकवाली की चपेट में आ गए। निवेशकों ने हाल की तेज रैली के बाद मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे पूरे सेक्टर में दबाव देखने को मिला। Nifty IT इंडेक्स करीब 5.6 फीसदी टूटकर 29,376 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। सेक्टर के सभी 10 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सबसे ज्यादा दबाव टीसीएस, एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, टेक महिंद्रा और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में देखने को मिला।

TCS बना सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर

कंपनी अंतिम कारोबार भाव (रुपये) बदलाव (रुपये) बदलाव (%) वॉल्यूम (लाख शेयर) कारोबार मूल्य (करोड़ रुपये)
टीसीएस 2,231.40 -215.50 -8.81% 93.62 2,140.60
एलटीआईमाइंडट्री 4,008.80 -332.90 -7.67% 6.04 245.99
कोफोर्ज 1,430.00 -89.50 -5.89% 30.05 437.73
टेक महिंद्रा 1,480.50 -90.90 -5.78% 17.53 264.38
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स 5,164.00 -306.50 -5.60% 4.20 219.04

नोट: यह डेटा 3 जून 2026 को दोपहर 12:16 बजे तक का है। सभी शेयर Nifty IT इंडेक्स के सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे

आईटी शेयरों में गिरावट की अगुवाई टीसीएस ने की। शेयर करीब 9 फीसदी तक टूट गया। एलटीआईमाइंडट्री में 7 फीसदी से ज्यादा, कोफोर्ज में करीब 6 फीसदी, टेक महिंद्रा में करीब 6 फीसदी और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस, एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो भी दबाव में रहे। यानी बिकवाली सिर्फ एक-दो शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे सेक्टर में देखने को मिली।

आखिर क्यों टूटा IT सेक्टर?

बाजार जानकारों का कहना है कि हाल की गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली रही। पिछले कुछ दिनों में आईटी शेयरों में जोरदार तेजी आई थी, जिसे वैश्विक माहौल में सुधार, टेक्नोलॉजी पर बढ़ते खर्च की उम्मीद और AI से जुड़ी सकारात्मक धारणा का सहारा मिला था।

वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, निवेशकों को भरोसा है कि दुनिया भर की कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन और AI पर खर्च बढ़ाएंगी। इससे आईटी सर्विस कंपनियों के लिए नए कारोबारी मौके पैदा हो सकते हैं।

इसके अलावा विकसित देशों में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है, इसलिए अमेरिका और यूरोप जैसी अर्थव्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद का फायदा इन शेयरों को मिला।

अमेरिका से मिले कमजोर संकेत

हालांकि हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका असर अमेरिका में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर पर भी दिखा। इंफोसिस का एडीआर करीब 2.5 फीसदी और विप्रो का एडीआर 8 फीसदी से ज्यादा गिर गया। इससे संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक भी टेक शेयरों में हाल की तेजी के बाद कुछ मुनाफा निकाल रहे हैं। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार वैश्विक ग्राहकों पर काफी निर्भर है, इसलिए विदेशी बाजारों में होने वाली हलचल का असर इनके शेयरों पर तेजी से दिखाई देता है।

AI की कहानी मजबूत, लेकिन वैल्यूएशन पर सवाल

रॉस मैक्सवेल का कहना है कि लंबी अवधि में आईटी सेक्टर की तस्वीर अब भी सकारात्मक दिखती है, लेकिन हाल की तेज रैली के बाद काफी उम्मीदें पहले ही शेयरों के भाव में शामिल हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, अगर कंपनियों की कमाई बाजार की मौजूदा उम्मीदों के मुताबिक नहीं बढ़ती, तो निवेशकों को आगे भी उतार-चढ़ाव और गिरावट देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार अब सिर्फ AI की कहानी नहीं, बल्कि यह भी देखना चाहता है कि AI से होने वाली कमाई वास्तव में कंपनियों के नतीजों में कब और कितनी दिखाई देती है।

क्या खत्म हो गई IT सेक्टर की तेजी?

विशेषज्ञ फिलहाल इसे किसी बड़े खतरे की शुरुआत नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह हाल की तेज रैली के बाद सामान्य मुनाफावसूली है। रॉस मैक्सवेल का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। जिन कंपनियों के पास मजबूत ग्राहक आधार, अच्छी ऑर्डर बुक और AI जैसी नई तकनीकों में मजबूत मौजूदगी है, वे आगे भी बेहतर स्थिति में रह सकती हैं।

उनके मुताबिक, निवेशकों को सिर्फ छोटी अवधि की तेजी पर नहीं, बल्कि यह देखना चाहिए कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई मौजूदा वैल्यूएशन को कितना सही साबित कर पाती है। फिलहाल IT सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी बरकरार है, लेकिन रास्ते में उतार-चढ़ाव भी जारी रह सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : June 3, 2026 | 12:19 PM IST