इलेस्ट्रेशन- बिनय सिन्हा
हर कोई ईरान में छिड़ी जंग की बात कर रहा है: यह कितनी लंबी चलेगी? एक और सवाल इतना ही महत्त्वपूर्ण है: यह लड़ाई कैसे खत्म होगी? हमारे पास इसके निश्चित जवाब नहीं हैं। हम यह जरूर जानते हैं अमेरिका और इजरायल ने जंग शुरू होते वक्त यानी दो सप्ताह पहले जो कुछ कहा था वह सब गलत साबित हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को वैसी जल्द जीत नहीं मिली जैसी वे चाहते थे। ईरान की सरकार ने अपने सुप्रीम लीडर और करीब 40 वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद भी हार नहीं मानी। ईरान के लोगों ने कोई बगावत नहीं की। ईरान का नेतृत्व ट्रंप के समक्ष बिना शर्त समर्पण करने के मूड में नहीं है। यहां तक कि सैन्य मामलों में भी यह जंग उस तरह नहीं सामने आई है जैसी कि अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी। सात मार्च को जंग शुरू होने के एक सप्ताह बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने एक चौंकाने वाले बयान में पत्रकारों से कहा था कि अमेरिका ईरान के हवाई क्षेत्र पर श्रेष्ठता और नियंत्रण कायम करने की दिशा में बढ़ रहा है।
यह वक्तव्य इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि हमें पहले ही यह विश्वास दिलाया गया था कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह नष्ट कर दी गई है। कि अमेरिकी और इजरायली विमान ईरान के ऊपर से मनमाने ढंग से मिसाइलें और बम गिरा रहे थे। लेविट के बयान से दो दिन पहले, इजरायल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने घोषणा की थी कि ईरान की 80 फीसदी वायु रक्षा प्रणाली नष्ट कर दी गई है और इजरायल ने वहां ‘लगभग पूर्ण वायु श्रेष्ठता’ हासिल कर ली है।
लैरी जॉनसन एक पूर्व नौसेना अधिकारी हैं और सैन्य मामलों पर उनका केंद्रित ब्लॉग व्यापक रूप से पढ़ा जाता है। वह इस पर अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी और इजरायली विमान ईरान की पश्चिमी सीमा के पास उड़ान भर रहे हैं और 370 किलोमीटर से लेकर 980 किलोमीटर तक की दूरी वाली मिसाइलें दाग रहे हैं। यह ईरान के आसमान पर प्रभुत्व रखने जैसा बिल्कुल नहीं है। यही एक कारण है कि युद्ध अपेक्षा से अधिक लंबा खिंच रहा है।
यह जंग कब तक चलेगी इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि अमेरिका के लक्ष्य स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग लक्ष्य घोषित किए हैं। उदाहरण के लिए, ईरान के परमाणु हथियारों का उन्मूलन (जो पिछले जून में पहले ही ‘नष्ट’ कर दिए गए थे)। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पंगु बनाना। पश्चिम एशिया में ईरान के प्रॉक्सी यानी गुप्त सहयोगियों के समर्थन को समाप्त करना। ईरान की जनता को एक धर्मतांत्रिक शासन से मुक्त कराना। शासन परिवर्तन, जिसका अर्थ हो सकता है कि नेताओं का एक नया समूह (भले ही धर्मतांत्रिक) जो अमेरिका और इजरायल के प्रति अधिक अनुकूल हो। विश्लेषकों के मुताबिक इन उद्देश्यों के किसी भी संयोजन को पूरा करने में चार से छह सप्ताह से अधिक समय लगेगा।
इजरायल और ईरान दोनों नहीं चाहते कि जंग जल्दी खत्म हो। इजरायल तब तक बमबारी करना चाहता है जब तक कि ईरान का सैन्य और औद्योगिक ढांचा ध्वस्त न हो जाए। वहीं ईरान ने गत जून की 12 दिनों की जंग से सबक लिया है कि कोई भी युद्ध विराम बस एक और हमले की तैयारी में इस्तेमाल होगा। वह यह जताना चाहता है कि ईरान पर कोई भी हमला इजरायल, अमेरिका और उनके सहयोगियों को बहुत भारी पड़ेगा।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 6 मार्च तक 85 डॉलर से अधिक नहीं थी। विश्लेषकों ने आकलन किया था कि संघर्ष चार से छह सप्ताह तक सीमित रहेगा। लेकिन वे तब हैरान रह गए जब 8 मार्च तक तेल की कीमत 108 डॉलर तक जा पहुंची। तब उनका मानना था कि बाजार युद्ध को चार से छह सप्ताह से अधिक लंबा मानकर कीमत तय कर रहे हैं। 80 डॉलर और 100 डॉलर प्रति बैरल तेल की कीमत में बहुत बड़ा अंतर है।
80 डॉलर केवल एक असुविधा है, जबकि 100 डॉलर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर व्यवधान है। दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं। कीमत में 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल की अधिक छलांग तब हुई जब ईरान ने घोषणा की कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला करेगा। यह धमकी बेहद सफल रही है।
वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक ऐंड इंटरनैशनल स्टडीज का अनुमान है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जहाज-ट्रैकिंग डेटा के आधार पर, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की दैनिक औसत संख्या 153 से घटकर 13 हो गई है। यह समुद्री यातायात में 90 फीसदी से अधिक की गिरावट है। जो उत्पादित तेल होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता उसे भंडारित करना होता है। तेल भंडारण अपने उच्चतम स्तर पर है इसलिए सऊदी अरब और अन्य तेल उत्पादकों ने तेल उत्पादन में कटौती भी की है।
कुछ तेल जमीनी पाइपलाइनों से होकर गुजरता है। ईरान की मिसाइलें उन पर निशाना साधे हुए हैं। तेल रिफाइनरियों पर भी हमले हुए हैं। एक समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह इस धारणा को दर्शाता है कि ऊर्जा अधोसंरचना पूरी तरह जोखिम में है और यह संघर्ष के अगले चरण में बढ़ती हुई स्थिति को इंगित करता है।
ट्रंप ने हाल के दिनों में दो बार संकेत दिया है कि युद्ध अनुमान से कम लंबा होगा। उन्होंने 9 मार्च को पत्रकारों से कहा कि ईरान युद्ध बहुत जल्दी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान की वायु सेना, नौसेना और संचार आदि नष्ट हो चुके हैं, युद्ध तकरीबन खत्म हो चुका है। हालात सामान्य होने की उम्मीद में तेल कीमतें घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल रह गईं लेकिन जल्दी ही वे वापस 100 डॉलर पहुंच गईं।
युद्ध कैसे समाप्त होता है, यह उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि युद्ध कब समाप्त होता है। वर्तमान संकेतों के आधार पर, युद्ध अमेरिका की शर्तों पर समाप्त होने की संभावना नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट की राह जल्दी नहीं खुलेगी और वहां से गुजरने वाले जहाजों के बीमा की बहाली में वक्त लगेगा। बंद पड़ी रिफाइनरीज में सामान्य उत्पादन दोबारा शुरू होना एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर ईरान सरकार बनी रही तो खाड़ी देश जिन्होंने तेल से हटकर पर्यटन और वित्त में विविधता लाने की कोशिश की है वे भी प्रभावित होंगे।
संक्षेप में, संघर्ष समाप्त होने का मतलब यह नहीं होगा कि पुरानी सामान्य स्थिति थोड़े ही समय में बहाल हो जाएगी; कुछ मामलों में तो, यह बिल्कुल भी बहाल नहीं होगी। ईरान में युद्ध चार से छह सप्ताह में समाप्त हो सकता है, या यह और लंबा खिंच सकता है। युद्ध अमेरिका की शर्तों पर समाप्त नहीं होगा, इसलिए दोनों ही परिस्थितियों में विश्व अर्थव्यवस्था को होने वाला नुकसान कम नहीं होगा।