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26th Business Standard-Seema Nazareth Award: पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने मीडिया को दी ‘संवाद’ की नसीहत

पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने सीमा नेजरेथ पुरस्कार समारोह में मीडिया को संवाद और जवाबदेही का आईना दिखाया। पत्रकार संकेत कौल को उत्कृष्ट पत्रकारिता हेतु सम्मानित किया गया

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- April 27, 2026 | 11:00 PM IST

‘मीडिया जब असहमति के अधिकार की रक्षा करता है तो वह यह भी सुनिश्चित करता है कि सत्ता में बैठे लोग निरंतर जनता के प्रति जवाबदेह रहें।’ यह बात पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने सोमवार को 26वें बिज़नेस स्टैंडर्ड सीमा नेजरेथ उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार 2025 में अपने संबोधन में कही।

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में ‘ आर्ग्युमेंटेटिव इंडियन ऐंड इंडियाज मीडिया कल्चर’(बहसतलब भारतीय और भारत की मीडिया संस्कृति) विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने बहस, असहमति और सच की तलाश की मीडिया की पुरानी परंपरा के आलोक में मीडिया की भूमिका को परिभाषित किया।

यह पुरस्कार हर वर्ष बिज़नेस स्टैंडर्ड के 30 वर्ष से कम आयु के पत्रकारों को दिया जाता है। कोविड के समय इस आयोजन को ऑनलाइन कर दिया गया था और 6 वर्ष बाद यह पूरी तरह से भौतिक रूप से आयोजित हुआ।

पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने अपनी बात की शुरुआत नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के विचारों से की जिन्होंने ‘बहसतलब भारतीय’ का विचार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किया था। उन्होंने कहा कि सेन का मूल विचार यह था कि भारत ने रूढ़िवादिता को चुनौती देने और जिज्ञासा की भावना पैदा करने के माध्यम से, अपरंपरागत विचारों, खुली बहस और निरंतर प्रश्न पूछने की एक लंबी और गहरी जड़ें जमा चुकी परंपरा का आनंद लिया है।

भारत की न्याय परंपरा के बारे में बात करते हुए सरन ने इस बहस की प्रकृति को सामने रखा और कहा, ‘वाद के रूप में हमारे यहां दो लोगों के बीच सत्य की खोज को लेकर ईमानदार, सम्मानजनक बहस हुआ करती थी।’ इसके विपरीत जल्प के विरुद्ध चेतावनी दी गई थी। इसका अर्थ था वार्ताकार को पराजित करने के लिए शत्रुतापूर्ण विवाद उत्पन्न करना। वितंडा यानी विनाशकारी तर्क-वितर्क के विरुद्ध भी चेतावनी दी गई थी जिसका उद्देश्य दूसरे पक्ष को अपमानित करने का था।

इस ढांचे के नैतिक मूल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘पुराने समय से भारतीय आदर्श इस आधार पर निर्मित है कि तर्क की शक्ति से ही किसी को राजी किया जाता है, न कि बल प्रयोग की क्रूरता से। असहमति जताने वाला शत्रु नहीं, बल्कि सत्य की खोज में भागीदार होता था।’

इस परिदृश्य के साथ ही सरन ने वर्तमान समय का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय मीडिया के कंधों पर बहुत अधिक जिम्मेदारी है जिसे इस दौर में बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘अगर भारत का डीएनए बहस, बहुलता और संवाद आधारित है तो मीडिया को भी इस डीएनए को ही प्रतिबिंबित करना चाहिए।’ हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि मौजूदा मीडिया संस्कृति में कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो बहस की कला वाद की परंपरा से परे जल्प और वितंडा में बदल गई है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक ध्रुवीकरण, वाणिज्यिक दबाव और अन्य दबावों में मीडिया इको चैंबर में बदल गया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि ‘एकरंगी दृष्टिकोण अपनाने का जोखिम है, जहां जटिल वास्तविकताओं को कठोर श्वेत-श्याम कथाओं में समेट दिया जाता है, और सबसे ऊंची आवाज को ही सबसे प्रभावशाली समझ लिया जाता है।’ उन्होंने कहा कि इस ‘एकरंगी मीडिया वातावरण में आप या तो देशभक्त होते हैं या गद्दार।’

सरन ने कहा, ‘एक जीवंत मीडिया संस्कृति विभिन्न विचारों और सोचने के अलग-अलग तरीकों के आदान-प्रदान का मंच होना चाहिए। जब कोई न्यूजरूम बौद्धिक विविधता को अपनाता है और शालीनता पर जोर देता है, तो वह हमारी सबसे गहरी ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करता है।’

उन्होंने मीडिया के तीन मुख्य कार्यों को रेखांकित किया। पहला, जनमत को सूचित और शिक्षित करना, जो ‘तब संभव नहीं है जब आप उन्हें केवल वही दें जो वे पहले से मानते हैं।’ दूसरा, सत्ता को जवाबदेह ठहराना। उन्होंने कहा, ‘सत्ता जांच की अनुपस्थिति में फलती-फूलती है। लेकिन विशेष रूप से सत्ता तब और फलती-फूलती है जब एक जैसा कथानक होता है। और तीसरा, लोकतंत्र की रक्षा करना। जैसा कि अमर्त्य सेन हमें याद दिलाते हैं, लोकतंत्र विचार-विमर्श द्वारा शासन है। यदि विचार-विमर्श से समझौता होता है, तो लोकतंत्र से भी समझौता होता है।’

सोमवार दोपहर के इस आयोजन के दौरान पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड-सीमा नेजरेथ पुरस्कार 2025 नई दिल्ली स्थित वरिष्ठ संवाददाता संकेत कौल को प्रदान किया गया। इस पुरस्कार में 75,000 रुपये की नकद राशि, एक चांदी की कलम और प्रशस्ति-पत्र शामिल है। इसे बिज़नेस स्टैंडर्ड और नेजरेथ परिवार ने सीमा नेजरेथ की स्मृति में स्थापित किया है, जो बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक युवा पत्रकार थीं और जिनका 19 मार्च 1999 को निधन हो गया था।

जूरी ने कौल की सराहना में कहा कि उन्होंने ‘जनहित के मुद्दों पर गहन कवरेज किया है, जिनमें फार्मास्युटिकल्स, शिक्षा और रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं।’ जिन रिपोर्ट का उल्लेख किया गया उनमें जहरीली खांसी की दवा, केंद्र सरकार की प्रयुक्त चिकित्सा उपकरणों के आयात की अनुमति देने की योजना, और निजी अस्पतालों का आयुष्मान भारत कार्यक्रम से बच निकलना शामिल था। जूरी ने कहा कि कौल के साक्षात्कार और आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण ‘सरकारी सुधारात्मक कार्रवाई और नागरिक निगरानी के लिए वास्तविक चेकलिस्ट के रूप में काम करते हैं।’

विशेष उल्लेख पुरस्कार मोहम्मद आसिफ खान को दिया गया, जो नई दिल्ली स्थित ब्लूप्रिंट पत्रिका के वरिष्ठ संवाददाता हैं। ब्लूप्रिंट बिज़नेस स्टैंडर्ड की मासिक पत्रिका है, जो रक्षा और भू-राजनीति पर केंद्रित है। इस पुरस्कार में प्रशस्ति-पत्र और 15,000 रुपये की नकद राशि शामिल है।

जूरी ने नोट किया कि खान ‘प्रतिद्वंद्वियों से उत्पन्न खतरों और युद्ध की बदलती प्रकृति को संदर्भ में रखते हुए पाठकों को भारत की विकसित होती सैन्य क्षमता, हथियार प्रणालियों और रक्षा चिंताओं की रोचक समझ प्रदान करते हैं।’ जूरी ने उनकी इस क्षमता की सराहना की कि वे ‘उभरते खतरों और उनके भारत पर प्रभाव’ को पहले भांप सकते हैं, और उनके इस सामर्थ्य को मान्यता दी कि वे ‘भू-राजनीति, सैन्य तैयारी और कूटनीति के जटिल अंतर्संबंधों’ पर प्रकाश डाल सकते हैं।

समारोह में सीमा नेजरेथ को श्रद्धांजलि भी दी गई। उनके पिता पी.ए. नैजरेथ, उपस्थित नहीं हो सके, वे 90 वर्ष के हैं। आयोजन में उनकी बहन प्रेमिला नेजरेथ सत्यनंद मौजूद थीं और उन्होंने उनके जीवन पर विचार साझा किए। उन्होंने याद किया कि उनके नाम पर स्थापित पहला पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन द्वारा प्रदान किया गया था, और बीते वर्षों में लियो टॉल्सटॉय के परपोते सहित कई विशिष्ट हस्तियों ने यह पुरस्कार प्रदान किया है।

First Published : April 27, 2026 | 10:39 PM IST