प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वाणिज्यिक वाहन चलाने वाले कुशल चालकों की किल्लत दूर करने के लिए सरकार एक चालक सूचकांक (ड्राइवर इंडेक्स) लाने पर विचार कर रही है। यह सूचकांक ट्रक जैसे वाणिज्यिक वाहनों के चालकों के लिए एक रेटिंग प्रणाली की तरह होगी जो उनके कौशल स्तर और वाहन चलाने के पुराने तौर-तरीकों के आधार पर उनकी वरीयता (रैंकिंग) तय करेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव वी उमाशंकर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उमाशंकर ने बताया कि मंत्रालय से एक चालक रैंकिंग या रेटिंग प्रणाली तैयार करने का अनुरोध किया गया था । उन्होंने कहा कि इसका मकसद एक जगह से दूसरी जगह माल पहुंचाने वाले चालकों के पिछले चालान, लाइसेंस की अवधि, बीमा और अन्य विभिन्न पहलुओं के आधार पर उनकी (चालकों की) भर्ती करना है।
सरकार ने इस ढांचे से जुड़े शुरुआती पहलुओं को तैयार करना शुरू कर दिया है। उमाशंकर ने कहा,‘इस सूचकांक की खास बात इसमें शामिल मापदंड होंगे। चेन्नई गणित संस्थान इस पर विचार करने और एक रेटिंग प्रणाली तैयार करने में हमारी मदद कर रहा है। अगर यह लागू हो जाता है तो यह वाणिज्यिक वाहनों के चालकों की भर्ती प्रक्रिया में मदद करेगा।’
उमाशंकर ने किराये पर कार देने वाली कंपनियों द्वारा किए जा रहे ऐसे ही प्रयासों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियां कार किराये पर लेने वाले व्यक्तियों की योग्यता का आकलन कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था पर अभी विचार किया जा रहा है और इसे लागू करने का कोई अंतिम निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।
भारत में इस समय कुशल चालकों की भारी कमी है। वर्ष 2025 में राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में 22 लाख कुशल चालकों की की कमी पूरी करने के लिए 1,600 चालक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने हेतु 4,500 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की थी।
शुक्रवार को उमाशंकर ने कहा कि विशेष भारी वाहनों को चलाने में सक्षम चालकों की कमी पूरी करने के लिए लॉजिस्टिक ऑपरेटर को सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए और सरकार इसके लिए बुनियादी ढांचा प्रदान कर सकती है।
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बड़े ट्रकों जैसे भारी माल वाहक वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की न के बराबर पैठ के बीच सरकार एक ट्रक-ट्रेलर प्रणाली शुरू करने पर भी विचार कर रही है। इसमें माल को इंजन से अलग कर किसी अन्य पूरी तरह से चार्ज इंजन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा,‘हम जल्द ही ट्रक-ट्रेलर पर एक मसौदा अधिसूचना लाने पर विचार कर रहे हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि इससे इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैट्री स्वैपिंग और बैट्री चार्जिंग की जरूरत वाले पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण से संबंधित चिंताओं का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। उमाशंकर ने कहा कि इससे चार्जिंग के दौरान फिजुल में खड़ी ट्रकों की समस्या का समाधान होगा। उन्होंने आगे बताया कि अलग किए जा सकने वाले कंटेनर लदे ट्रेलरों के लिए चार्जिंग सुविधाएं खास स्थानों पर उपलब्ध होंगी। दिलचस्प बात यह है कि सरकार इस ढांचे का इस्तेमाल वाणिज्यिक भारी माल ढुलाई को वैश्विक प्रणाली में एकीकृत करने के लिए करेगी।