प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देश में वाहनों की खुदरा बिक्री के लिहाज से वित्त वर्ष 26 अब तक का सर्वश्रेष्ठ वर्ष रहा। इस वर्ष वाहनों की छह में से पांच श्रेणियों में रिकॉर्ड वार्षिक बिक्री दर्ज की गई। इससे वाहनों की कुल बिक्री 3 करोड़ के करीब पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 25 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) के आज एक बयान में इस बारे में आंकड़े साझा किए। इनके अनुसार यह शानदार प्रदर्शन मुख्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 2.0 की तेजी की बदौलत हुआ।
यात्री वाहनों ने पहली बार 47 लाख का आंकड़ा पार किया और 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहिया वाहनों ने फिर से कोविड से पहले वाला शीर्ष स्तर हासिल कर लिया और 13.4 प्रतिशत वृद्धि के साथ 2.14 करोड़ से ज्यादा वाहनों की खुदरा बिक्री की। वाणिज्यिक वाहनों ने भी अब तक के सर्वश्रेष्ठ आंकड़े दर्ज किए और 11.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10 लाख से ऊपर का स्तर छुआ। तिपहिया वाहनों ने 11.68 प्रतिशत के इजाफे के साथ लगातार तीसरे वर्ष वार्षिक रिकॉर्ड बनाया।
ट्रैक्टर इस साल बेहतर प्रदर्शन करने वाली श्रेणी रही। इस श्रेणी ने 18.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ इतिहास में पहली बार 10 लाख की खुदरा बिक्री का आंकड़ा पार किया। निर्माण उपकरण श्रेणी एकमात्र अपवाद रही, जिसमें 11.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि परियोजना-स्तर पर देरी और अधिक आधार ने बिक्री को प्रभावित किया।
इन सभी श्रेणियों के बेहतर प्रदर्शन का परिणाम यह रहा कि 2.96 करोड़ वाहनों की अब तक की सबसे अधिक खुदरा बिक्री हुई और इसमें 13.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ। फाडा के अध्यक्ष सीएस विघ्नेश्वर ने कहा, ‘यह केवल आंकड़े ही नहीं हैं, बल्कि उद्योग के 3 करोड़ की उपलब्धि के करीब पहुंचने का प्रतीक है। यह ऐसी उपलिब्ध है, जो दो साल पहले दूर की बात लग रही थी। इस साल को जो बात विशेष रूप से अहम बनाती है, वह यह है कि वृद्धि संरचनात्मक रूप से मजबूत थी, जो खर्च उठाने की बेहतर क्षमता, शहरी और ग्रामीण भारत में परिवहन की बढ़ती मांग तथा मिलेजुले इंजनों के मिश्रण पर आधारित थी।’ उद्योग का यह संगठन दो अंकों में वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।
अलबत्ता यह साल समान रफ्तार वाला नहीं था। पहले पांच महीने यानी अप्रैल से अगस्त तक की अवधि सुस्त रफ्तार वाली थी। इसमें मासिक वृद्धि 2 से 5 प्रतिशत के बीच रही, क्योंकि बाजार पिछले वर्ष के स्टॉक के सुस्त चक्र, चुनिंदा वित्तीय सहायता की बाधाओं और नीतिगत स्पष्टता की उम्मीद में ग्राहक का प्रतीक्षा एवं समीक्षा वाला रुख रहा।
सितंबर में जीएसटी 2.0 के कार्यान्वयन के साथ अहम मोड़ आया। विघ्नेश्वर ने कहा, ‘दर में सुधार ने बड़े स्तर पर दोपहिया वाहनों, छोटी कारों, तिपहिया और चुनिंदा वाणिज्यिक श्रेणियों पर प्रभावी कर बोझ को काफी कम कर दिया। उसने ऐसे समय खर्च उठाने की वास्तविक क्षमता में सुधार किया, जब उपभोक्ता पहले से ही इसके लिए तैयार था।’