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अमेरिका में तेल-गैस इंजन मॉडल बरकरार रखेगी JLR, EV की घटती मांग के बीच रणनीति में बदलाव

टैरिफ के दबाव और ईवी की घटती मांग के कारण टाटा मोटर्स की जेएलआर अमेरिका में तेल-गैस इंजन वाले वाहनों को लंबे समय तक बरकरार रखेगी

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सोहिनी दास   
Last Updated- May 15, 2026 | 11:00 PM IST

टाटा  मोटर्स के स्वामित्व वाली लग्जरी कार विनिर्माता जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने कहा है कि अमेरिका में उसके पोर्टफोलियो में तेल-गैस इंजन वाले वाहन अधिक समय तक रह सकते हैं। 18 अरब पाउंड के इले​क्ट्रिफिकेशन निवेश कार्यक्रम के बावजूद ऐसी संभावना है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी बाजार की बदलती परिस्थितियों और टैरिफ के दबावों के बीच अपने मॉडलों को सुव्यव​स्थित कर रही है।

टाटा मोटर्स के चौथी तिमाही के आय परिणामों की बातचीत के दौरान जेएलआर के प्रबंधन ने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 24 से शुरू हुई अपनी 5 साल की निवेश योजना को लेकर प्रतिबद्ध है। हालांकि बाजार के हालात की वजह से तकनीकों और भौगोलिक इलाकों के खर्च में बदलाव हो सकता है।

जेएलआर के मुख्य वित्तीय अधिकारी रिचर्ड मो​लिन्युक्स ने कहा, ‘हम वित्त वर्ष 24 से पांच साल के दौरान 18 अरब पाउंड के अपने निवेश को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इसकी प्राथमिकताओं में निश्चित रूप से थोड़ा-बहुत बदलाव आएगा, क्योंकि वैश्विक स्तर पर और विशेष रूप से अमेरिकी बाजार के मामले में हमें अपने पोर्टफोलियो में तेल-गैस इंजनों को ज्यादा लंबे समय तक बनाए रखने की जरूरत है।’

मोलिन्युक्स की टिप्पणियां इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार के संबंध में बढ़ती अनिश्चितता दर्शाती हैं, विशेष रूप से उत्तर अमेरिका में, जहां वाहन विनिर्माताओं ने हाल ही में घटती मांग और बदलते नियमों के बीच ईवी में निवेश की अपनी योजनाओं को धीमा कर दिया है। अमेरिका के आयात शुल्क बढ़ाने का जेएलआर के लाभ पर दबाव है।

अमेरिका उसके सबसे बड़े और सबसे अधिक मुनाफे वाले बाजारों में से एक है। अप्रैल 25 में अमेरिका ने जब आयातित वाहनों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया तो कंपनी ने अमेरिका को किया जाने वाला निर्यात रोक दिया था। ब्रिटेन और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के तहत बाद में कुछ शुल्कों में नरमी आने पर कंपनी ने मई में फिर से निर्यात शुरू कर दिया था।

First Published : May 15, 2026 | 9:56 PM IST