प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ईंधन की कीमतों के संबंध में उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंता ने देश में इलेक्ट्रिक दो-पहिया (ई-दोपहिया वाहनों) को अपनाने की रफ्तार तेज कर दी है। मार्च में इन वाहनों की पैठ का स्तर पिछले महीनों के लगभग 6.5 से 7 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 9.7 प्रतिशत हो गया है। एथर एनर्जी के मुख्य कारोबारी अधिकारी (सीबीओ) रवनीत एस फोकेला ने यह जानकारी दी है।
वह सोमवार को लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलरेशन फोरम (लीफ) की शुरुआत के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। लीफ उद्योग के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम है। इसका मकसद इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए ईवी चार्जिंग के बुनियादी ढांचे का मानकीकरण और विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने ‘संपूर्ण ई-दोपहिया उद्योग को बढ़ावा दिया है, क्योंकि पेट्रोल की कीमतों में अस्थिरता से चिंतित ग्राहक तेजी से इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने सरकार के वाहन पंजीकरण डेटाबेस का जिक्र करते हुए कहा, ‘ई-दोपहिया पर मेरी स्पष्ट राय है। अगर आप पैठ पर नजर डालें, तो यह पिछले कई महीनों से लगभग 6.5 से 7 प्रतिशत रही है। इस महीने की शुरुआत से अब तक कुल दोपहिया बिक्री में ई-दोपहिया की पैठ 9.7 प्रतिशत है। यह वाहान का आज सुबह तक के आंकड़े हैं।’
उन्होंने कहा कि मार्च में अब तक वाहन पोर्टल पर लगभग 1,62,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण किया गया है और महीने के दो दिन अभी बाकी हैं। इसकी तुलना फरवरी में लगभग 1,12,000 वाहनों का पंजीकरण किया गया था। यह बात निरंतर तीव्र वृद्धि का संकेत देती है।